चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने आव्रजन (इमिग्रेशन) धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए जालंधर की एक महिला, जिसके खिलाफ कथित वीजा धोखाधड़ी से जुड़े कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, को निर्देश दिया है कि वह अपने विरुद्ध दर्ज सभी प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) का विवरण 15 दिनों के भीतर पांच समाचार पत्रों में प्रकाशित करे। अदालत ने कहा कि किसी FIR को समझौते के आधार पर रद्द करने की मांग पर विचार करने से पहले आम जनता को आरोपी के आपराधिक इतिहास की जानकारी होना आवश्यक है।
यह आदेश न्यायमूर्ति आलोक जैन ने परमजीत कौर द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिकाकर्ता ने सितंबर 2022 में जालंधर पुलिस द्वारा दर्ज इमिग्रेशन धोखाधड़ी के एक मामले की FIR को रद्द करने की मांग करते हुए दावा किया था कि संबंधित पक्षों के बीच समझौता हो चुका है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि यह केवल आंशिक समझौता था और याचिकाकर्ता के खिलाफ इसी प्रकार के आरोपों वाले कई अन्य आपराधिक मामले भी लंबित हैं। अदालत ने कहा कि मामला केवल एक FIR तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें विदेश भेजने के नाम पर कथित धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और नकली वीजा प्रक्रिया जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
अदालत ने कहा कि इस प्रकार के अपराध उन लोगों को निशाना बनाते हैं जो विदेश में बसने या रोजगार पाने की उम्मीद में भारी धनराशि खर्च करते हैं। ऐसे मामलों में कथित धोखाधड़ी न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाती है, बल्कि पीड़ितों के भविष्य और जीवन पर भी गंभीर प्रभाव डालती है। इसलिए ऐसे आरोपों को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के कथित आपराधिक इतिहास को देखते हुए निर्देश दिया कि वह पांच समाचार पत्रों में सार्वजनिक सूचना प्रकाशित करे। इसमें उसका नाम, पता, संपर्क विवरण और उसके विरुद्ध दर्ज सभी आपराधिक मामलों की जानकारी शामिल होगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह विवरण उन सभी मामलों का होना चाहिए, चाहे वे लंबित हों, उनका निस्तारण हो चुका हो, वे रद्द किए जा चुके हों या उनमें कोई अन्य न्यायिक निर्णय आ चुका हो।
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अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि प्रकाशित सूचना में उन मामलों का विशेष उल्लेख किया जाए जिनमें विदेश भेजने के नाम पर कथित धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज, नकली वीजा, झूठे आश्वासन या गलत प्रस्तुतीकरण के आरोप हैं। इसके अलावा ऐसे मामलों की जानकारी भी प्रकाशित करनी होगी जिनमें पीड़ितों को कथित रूप से धन वापस करने के बाद समझौता किया गया हो।
जनहित को ध्यान में रखते हुए अदालत ने निर्देश दिया कि यह सूचना छह प्वाइंट से बड़े फॉन्ट में प्रकाशित की जाए तथा पांच में से कम से कम दो समाचार पत्र पंजाबी भाषा के हों, ताकि स्थानीय लोगों तक यह जानकारी प्रभावी ढंग से पहुंच सके।
मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को निर्धारित की गई है। अदालत ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया है कि वह अगली सुनवाई से पहले प्रकाशित सभी सार्वजनिक सूचनाओं की प्रतियां न्यायालय में प्रस्तुत करे। इसके बाद ही ट्रायल कोर्ट द्वारा समझौते पर भेजी गई रिपोर्ट पर विचार करते हुए FIR रद्द करने की मांग पर निर्णय लिया जाएगा।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश आव्रजन धोखाधड़ी के मामलों में महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है। इससे समझौते के आधार पर राहत मांगने वाले आरोपियों के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी, वहीं विदेश जाने के इच्छुक लोगों को भी एजेंटों और इमिग्रेशन कंपनियों का चयन करते समय अधिक सतर्क रहने का संदेश मिलेगा।
