RBI योजना का हवाला देकर पांच बैंकों से कथित तौर पर कराया गया लोन; OTP और दस्तावेजों के जरिए जुटाई रकम, करीब 10 महीने EMI भरने के बाद भुगतान बंद करने का आरोप

होम लोन माफ कराने के नाम पर रेलवे TTE से ₹52.29 लाख की ठगी, ‘गरिमा गिरोह’ पर छठी FIR

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By Roopa
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गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में होम लोन माफ कराने का झांसा देकर रेलवे के एक टीटीई से ₹52.29 लाख की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। शाहपुर क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज निवासी रेलवे टीटीई अभिमन्यु कुमार की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि एक महिला और उसके सहयोगियों ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की कथित योजना का हवाला देकर पहले पीड़ित का भरोसा जीता और बाद में उसके नाम पर पांच अलग-अलग बैंकों से कुल ₹52.29 लाख का लोन करा लिया।

शिकायत के मुताबिक, अभिमन्यु कुमार की पहचान रेलवे में स्टेशन अधीक्षक ध्रुव नारायण सिंह के माध्यम से हुई थी। ध्रुव नारायण सिंह पर करीब ₹57 लाख का होम लोन चल रहा था। उन्होंने अभिमन्यु को बताया कि उनकी बेटी गरिमा सिंह कथित तौर पर RBI की एक योजना के तहत होम लोन माफ कराने में मदद कर सकती है। लोन माफी की उम्मीद में अभिमन्यु ने अगस्त 2025 में गरिमा से संपर्क किया।

आरोप है कि गरिमा ने पीड़ित को बताया कि लोन माफी की प्रक्रिया पूरी करने के लिए उसके मोबाइल फोन पर कुछ OTP आएंगे। उसने कथित तौर पर यह भी कहा कि विशाल यादव नाम का व्यक्ति फोन कर OTP पूछेगा। गरिमा के निर्देश पर अभिमन्यु ने कथित तौर पर OTP साझा किए और कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद उसके नाम पर पांच बैंकों से कुल ₹52.29 लाख का लोन स्वीकृत हो गया।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस पूरी प्रक्रिया में पीड़ित को यह जानकारी नहीं थी कि उसके नाम पर नए ऋण लिए जा रहे हैं। कथित तौर पर दो बैंकों से लोन लेने के लिए अभिमन्यु को बैंक शाखा तक भी नहीं जाना पड़ा। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन ऋणों के आवेदन किस तरीके से तैयार किए गए, दस्तावेजों का इस्तेमाल कैसे हुआ और बैंक स्तर पर लोन स्वीकृति की प्रक्रिया किस तरह पूरी हुई।

अभिमन्यु के अनुसार, गरिमा ने करीब 10 महीने तक इन ऋणों की EMI का भुगतान किया। इससे उन्हें शुरुआत में किसी बड़ी गड़बड़ी का संदेह नहीं हुआ। बाद में कथित तौर पर किश्तों का भुगतान बंद कर दिया गया। इसके बाद लोन खातों और भुगतान को लेकर अभिमन्यु पर वित्तीय दबाव बढ़ने लगा। मामले की स्थिति स्पष्ट करने के लिए वह अगस्त के पहले सप्ताह में गरिमा के घर पहुंचे।

आरोप है कि वहां पहुंचने पर अभिमन्यु ने देखा कि कई अन्य लोग भी अपने पैसे वापस मांगने के लिए मौजूद थे। इससे उन्हें कथित लेनदेन के व्यापक होने का संदेह हुआ। बातचीत के दौरान विवाद की स्थिति बनी और शिकायत के अनुसार गरिमा ने पुलिस में शिकायत करने की धमकी दी। इसके बाद अभिमन्यु ने पुलिस से संपर्क कर पूरे मामले की जानकारी दी और कथित ₹52.29 लाख की धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गरिमा के खिलाफ पहले से लोन और वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े कई मामले दर्ज हैं। इसी कथित नेटवर्क के खिलाफ अब यह छठी FIR बताई जा रही है। पुलिस पुराने मामलों और नई शिकायत के बीच संभावित समानताओं की भी जांच कर रही है। जांचकर्ताओं को यह पता लगाना है कि क्या सभी मामलों में लोन माफी या बैंक ऋण से जुड़ा एक ही तरीका अपनाया गया था।

मामले में पशु चिकित्सक डॉ. परमात्मा से जुड़ी एक शिकायत भी जांच के दायरे में है। पुलिस ने उनके खिलाफ भी गरिमा और अन्य लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की थी। पांच अगस्त को डॉ. परमात्मा ने एम्स थाने में गरिमा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। इसके अलावा एम्स और सहजनवां थानों में तीन अन्य लोगों की ओर से भी इसी तरह की शिकायतें दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।

इन शिकायतों के आधार पर पुलिस कथित नेटवर्क में शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। जांच का फोकस यह पता लगाने पर है कि पीड़ितों को किस तरह लोन लेने के लिए तैयार किया जाता था, उनके दस्तावेज और OTP कैसे हासिल किए जाते थे और ऋण की रकम किसके खातों में पहुंचती थी। पुलिस बैंक रिकॉर्ड, लोन दस्तावेज और डिजिटल लेनदेन की भी जांच कर सकती है।

गोरखपुर के क्षेत्राधिकारी रवि कुमार सिंह के अनुसार, मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की तैयारी है, जबकि अन्य संदिग्धों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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