नौ साल तक फर्जी खातों, शेल कंपनियों और झूठे जमीन सौदों के नाम पर धोखाधड़ी का आरोप, EOW ने शुरू की जांच

सेवानिवृत्त ACP समेत परिवार पर ₹2.4 करोड़ की जमीन निवेश ठगी का मामला दर्ज, पुणे में बड़ा खुलासा

Roopa
By Roopa
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पुणे में एक सेवानिवृत्त सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) और उनके परिवार के चार अन्य सदस्यों पर एक बड़े जमीन निवेश घोटाले के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि इन लोगों ने एक शहर के कारोबारी से ₹2.4 करोड़ की ठगी की, जो कई वर्षों तक चलने वाली सुनियोजित धोखाधड़ी का हिस्सा थी।

शिकायतकर्ता अभिजीत विलास उंड्रे के अनुसार, आरोपियों ने दिसंबर 2016 से मई 2025 के बीच उनसे संपर्क किया और बोराज गांव में 12 एकड़ जमीन में निवेश के नाम पर भारी मुनाफे का झांसा दिया। इस जमीन को कथित तौर पर मुंबई स्थित एक व्यक्ति की संपत्ति बताया गया था, जो बिक्री के लिए उपलब्ध थी।

आरोप है कि दंपति और अन्य सहयोगियों ने खुद को वैध जमीन मालिक के रूप में पेश किया और भरोसा कायम करने के लिए कंपनी के प्रतिनिधियों को जुबली हिल्स स्थित अपने आवास और नानक्रामगुडा स्थित कार्यालय में बुलाया। यहां उन्हें विभिन्न प्रीमियम लोकेशनों जैसे TGSPA सर्कल, ORR सर्विस रोड (नानक्रामगुडा टोल गेट के पास) और गाचीबौली स्थित FCI सोसाइटी की जमीनों के नक्शे और आंशिक दस्तावेज दिखाए गए।

जांच में बाद में यह सामने आया कि जिन जमीनों को सौदे के लिए दिखाया गया था, उनमें से कई की कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं थी और कुछ पर विवाद या अतिक्रमण के मामले पहले से लंबित थे, जिससे वे बिक्री योग्य नहीं थीं।

शिकायत के अनुसार, जब कंपनी ने बिक्री से पहले पूरा दस्तावेजी सत्यापन, रजिस्टर्ड सेल डीड और एनकम्ब्रेंस सर्टिफिकेट की मांग की, तो आरोपियों ने लगातार टालमटोल किया और “पहले भुगतान, बाद में दस्तावेज” की शर्त रखी।

भरोसे में आकर कंपनी ने वर्ष 2021 में आरोपियों के बैंक खातों में सीधे ₹14.85 करोड़ ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद आरोपियों ने संपर्क बंद कर दिया और किसी भी बातचीत से बचने लगे।

न तो कोई बिक्री समझौता हुआ, न ही संपत्ति कंपनी के नाम पर रजिस्टर्ड की गई और न ही पैसा वापस किया गया, जिसके बाद पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

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शिकायत मिलने के बाद साइबराबाद की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने मामला दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू कर दी है। पुलिस बैंक लेनदेन, संपत्ति रिकॉर्ड और दस्तावेजी साक्ष्यों की जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क और संभावित साजिश का पता लगाया जा सके।

अधिकारियों को आशंका है कि इस मामले में और लोग भी शामिल हो सकते हैं और यह किसी संगठित रियल एस्टेट धोखाधड़ी गिरोह का हिस्सा हो सकता है, जो अलग-अलग नामों से काम कर रहा है।

आरोपियों की पहचान श्रीधर सरनाला, उनकी पत्नी संध्या सरनाला, दत्ता केदारी और बालासाहेब आर. वालुंज के रूप में हुई है। पुलिस का कहना है कि फर्जी कंपनियों और गलत दस्तावेजों के जरिए निवेशकों को गुमराह किया गया।

जांचकर्ताओं के अनुसार, आरोपियों ने शेल कंपनी और फर्जी प्रॉपर्टी लिस्टिंग के जरिए यह दिखाने की कोशिश की कि सौदे पूरी तरह वैध हैं और किसी तरह का कानूनी विवाद नहीं है।

पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया है कि पैसे लौटाने की मांग करने पर उन्हें धमकियां दी गईं और लगातार टालमटोल किया गया, जिसके बाद उन्हें कानूनी मदद लेनी पड़ी।

पुलिस अब बैंक स्टेटमेंट, डिजिटल रिकॉर्ड और संचार डेटा की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि धनराशि आगे कैसे ट्रांसफर की गई।

यह मामला रियल एस्टेट सेक्टर में बड़े वित्तीय घोटालों के बढ़ते खतरे को उजागर करता है और निवेश से पहले पूरी कानूनी जांच की आवश्यकता पर जोर देता है।

अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि जांच के दौरान और खुलासे हो सकते हैं और अन्य संभावित आरोपियों से भी पूछताछ की जाएगी।

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