प्रयागराज के कैलाश हॉस्पिटल रिसर्च सेंटर में बिलिंग सिस्टम से छेड़छाड़ और पासवर्ड दुरुपयोग के जरिए लाखों के गबन का खुलासा

हॉस्पिटल में डिजिटल चोरी का बड़ा खुलासा: बिलिंग सिस्टम से लाखों की हेराफेरी, पासवर्ड गेम से चलता रहा गबन

Team The420
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प्रयागराज। शहर के एक निजी न्यूरोसर्जन से जुड़े अस्पताल में डिजिटल सिस्टम के जरिए बड़े वित्तीय गबन का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जॉर्जटाउन स्थित कैलाश हॉस्पिटल रिसर्च सेंटर में कंप्यूटर आधारित बिलिंग सिस्टम में लंबे समय तक की गई हेराफेरी का खुलासा हुआ है। प्रारंभिक जांच के बाद तीन कर्मचारियों के खिलाफ गबन, कूटरचना और आईटी एक्ट की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है।

मामले की शुरुआत तब हुई जब अस्पताल प्रबंधन को एक मरीज के बिल में असामान्य अंतर दिखाई दिया। 10 अप्रैल 2026 को हर्षित नामक मरीज का बिल 5147 रुपये दिखाया गया था, लेकिन कंप्यूटर रिकॉर्ड में केवल 147 रुपये दर्ज पाए गए। इस अंतर ने प्रबंधन को सतर्क कर दिया और तत्काल आंतरिक जांच शुरू कर दी गई।

जांच आगे बढ़ने पर पता चला कि यह कोई एकल गलती नहीं थी, बल्कि पूरे बिलिंग सिस्टम में लंबे समय से सुनियोजित तरीके से हेराफेरी की जा रही थी। आरोप है कि कुछ कर्मचारियों ने सॉफ्टवेयर में छेड़छाड़ कर वास्तविक बिलिंग राशि को कम दिखाया और अंतर की रकम आपस में बांट ली जाती थी।

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मामले में शिव कुमार, सुरेश कुमार और अनिरुद्ध यादव को आरोपी बनाया गया है। शिकायत के अनुसार मुख्य आरोपी शिव कुमार के पास सिस्टम का गोपनीय पासवर्ड था, जिसका उपयोग वह कंप्यूटर के साथ-साथ मोबाइल के जरिए भी करता था। इसी एक्सेस का दुरुपयोग कर वह बिलिंग डेटा में बदलाव करता रहा। अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी इस पूरे नेटवर्क में संदिग्ध पाई गई है।

अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि यह गड़बड़ी अचानक नहीं हुई, बल्कि एक संगठित तरीके से लंबे समय से चल रही वित्तीय हेराफेरी का हिस्सा थी। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि नए कर्मचारियों को भी इस प्रक्रिया में शामिल करने के लिए लालच दिया जाता था, ताकि पूरा सिस्टम बिना किसी रुकावट के चलता रहे।

घटना सामने आने के बाद अस्पताल ने बिलिंग सॉफ्टवेयर और सभी वित्तीय रिकॉर्ड की विस्तृत ऑडिट शुरू कर दी है। अनुमान लगाया जा रहा है कि जैसे-जैसे पुराने रिकॉर्ड खंगाले जाएंगे, गबन की कुल राशि और बढ़ सकती है।

पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए डिजिटल साक्ष्यों की जांच शुरू कर दी है। सर्वर लॉग्स, एक्सेस रिकॉर्ड और पासवर्ड उपयोग के पैटर्न की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि सिस्टम में कब-कब और किस स्तर पर छेड़छाड़ की गई।

जॉर्जटाउन थाना प्रभारी के अनुसार, जांच के आधार पर आईटी एक्ट की अतिरिक्त धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं। यह भी जांच का हिस्सा है कि क्या इस पूरे मामले में किसी बाहरी तकनीकी व्यक्ति या सॉफ्टवेयर स्तर पर कोई सहायता शामिल थी।

साइबर और डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला स्वास्थ्य संस्थानों में डिजिटल सुरक्षा की गंभीर कमजोरी को उजागर करता है। उनका कहना है कि पासवर्ड सुरक्षा, एक्सेस कंट्रोल और नियमित ऑडिट की कमी इस तरह के वित्तीय गबन को आसान बना देती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, अस्पताल जैसे संवेदनशील संस्थानों में डिजिटल सिस्टम पर अत्यधिक भरोसा करते समय सुरक्षा उपायों को मजबूत करना अनिवार्य है, क्योंकि एक छोटी सी चूक भी बड़े वित्तीय नुकसान में बदल सकती है।

फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की वित्तीय और डिजिटल गतिविधियों की गहन जांच में जुटी हैं। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े और भी तथ्य सामने आ सकते हैं, जिससे पूरे घोटाले की परतें और खुलेंगी।

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