अहमदाबाद: गुजरात के अहमदाबाद में साइबर और पहचान की धोखाधड़ी से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें आरोपियों ने कथित तौर पर एक कारोबारी की पहचान का इस्तेमाल कर हैदराबाद के व्यवसायी से ₹75 लाख मंगवाए और फिर कालूपुर की अंगड़िया फर्म से नकदी उठाकर फरार हो गए। अहमदाबाद शहर पुलिस की जोन-3 लोकल क्राइम ब्रांच ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके कब्जे से ₹25 लाख नकद और पांच मोबाइल फोन बरामद किए हैं। जब्त संपत्ति की कुल कीमत करीब ₹25.52 लाख बताई गई है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राजस्थान निवासी मोडसिंग उर्फ मोध सिंह उर्फ विक्रमसिंह राजपुरोहित, 48, और बनासकांठा के डीसा निवासी भरतगिरी खेमगिरी गोस्वामी, 32, के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, दोनों ने कथित तौर पर पहचान बदलकर और अलग-अलग नामों का इस्तेमाल कर ठगी की योजना को अंजाम दिया।
फोन पर खुद को बुलियन कारोबारी बताया
पुलिस के अनुसार, हैदराबाद निवासी कारोबारी रोहितकुमार नरेंद्रकुमार जैन को 8 जुलाई को फोन आया था। कॉल करने वाले ने कथित तौर पर खुद को बुलियन कारोबारी पृथ्वीराज कोठारी बताया और जैन से हैदराबाद से अहमदाबाद ₹75 लाख भेजने को कहा। रकम भेजने की प्रक्रिया को विश्वसनीय दिखाने के लिए आरोपी ने कथित तौर पर अशोक जैन नाम के एक व्यक्ति का नाम और मोबाइल नंबर भी उपलब्ध कराया।
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अगले दिन एक अन्य व्यक्ति ने कथित तौर पर खुद को ‘बाबूभाई’ बताया और जैन से कहा कि वह अहमदाबाद जाकर रकम की खेप प्राप्त करेगा। निर्देशों पर भरोसा करते हुए जैन ने ₹75 लाख कालूपुर स्थित आर गणेश अंगड़िया के माध्यम से भेज दिए।
पुलिस का कहना है कि ‘बाबूभाई’ ने अंगड़िया फर्म से नकदी प्राप्त की और इसके बाद आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन बंद कर दिए। रकम हासिल होने के बाद संपर्क टूटने पर कारोबारी को ठगी का पता चला।
CCTV से आरोपियों की गतिविधियों का पता चला
मामले की जानकारी मिलने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर जांच शुरू की गई। जोन-3 एलसीबी की टीम कालूपुर पोस्ट ऑफिस क्षेत्र के आसपास संदिग्ध गतिविधियों की जांच कर रही थी। इसी दौरान पुलिस को दोनों आरोपियों की कथित संलिप्तता के बारे में सूचना मिली।
पुलिस ने 12 अगस्त को राजपुरोहित और गोस्वामी को पकड़ा। तलाशी के दौरान ₹25 लाख नकद और पांच मोबाइल फोन बरामद किए गए। जांचकर्ताओं ने इलाके के CCTV फुटेज की भी जांच की, जिससे आरोपियों की कथित गतिविधियों और आवाजाही के बारे में जानकारी मिली।
पुलिस के मुताबिक, राजपुरोहित ने कथित तौर पर पृथ्वीराज कोठारी की पहचान का इस्तेमाल कर शिकायतकर्ता का विश्वास हासिल करने में अहम भूमिका निभाई। उसने रकम हैदराबाद से अहमदाबाद मंगवाने की व्यवस्था की और कथित योजना में ‘अशोक जैन’ तथा ‘बाबूभाई’ नामों का इस्तेमाल किया। जांच एजेंसियों का आरोप है कि राजपुरोहित ने गोस्वामी को नकदी लेने के लिए भेजा था। गोस्वामी ने कथित तौर पर अंगड़िया फर्म में ‘बाबूभाई’ की पहचान का इस्तेमाल किया।
आरोपी पर 20 से ज्यादा मामले दर्ज होने का दावा
पुलिस ने बताया कि राजपुरोहित के खिलाफ गुजरात और अन्य राज्यों में 20 से अधिक मामले दर्ज हैं। इनमें चोरी, सेंधमारी, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और पहचान बदलकर ठगी जैसे आरोप शामिल हैं। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, उसके खिलाफ अहमदाबाद सहित विभिन्न स्थानों पर 2006 से 2018 के बीच मामले दर्ज हुए थे। महाराष्ट्र में उसके खिलाफ छह और राजस्थान में दो मामले दर्ज होने की जानकारी भी पुलिस ने दी है।
बाकी ₹50 लाख की तलाश जारी
दोनों आरोपियों को 12 अगस्त को भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया। पुलिस अब कथित गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने और ठगी की बाकी ₹50 लाख रकम का पता लगाने में जुटी है।
जांचकर्ता जब्त मोबाइल फोन और संचार रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित तौर पर इस्तेमाल की गई फर्जी पहचान कैसे तैयार की गई और क्या आरोपियों ने इसी तरीके से अन्य कारोबारियों या अंगड़िया फर्मों को भी निशाना बनाया था। पुलिस इस मामले में संभावित अन्य पीड़ितों और सहयोगियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
