प्रयागराज (उत्तर प्रदेश): साइबर अपराध की जांच में प्रयागराज से जुड़े एक कथित अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट के संकेत मिले हैं, जिसके तार कंबोडिया, बैंकॉक और दुबई जैसे देशों में बैठे साइबर अपराधियों से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है। जांच एजेंसियों के अनुसार, विदेशी साइबर गिरोह भारत में बैंक खातों, मोबाइल सिम कार्ड और डिजिटल भुगतान नेटवर्क का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर ऑनलाइन ठगी को अंजाम देने की कोशिश कर रहे हैं।
जांच में सामने आया है कि साइबर ठगी से हासिल रकम सीधे विदेशों में बैठे अपराधियों तक नहीं पहुंचाई जाती। इसके लिए स्थानीय स्तर पर बैंक खाते, मोबाइल नंबर और डिजिटल माध्यमों की व्यवस्था तैयार की जाती है। इन खातों और सिम कार्ड के जरिए ठगी की रकम को कई स्तरों पर ट्रांसफर किया जाता है, जिससे वास्तविक अपराधियों और धन के अंतिम लाभार्थियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
पुलिस के अनुसार, विदेशी साइबर गिरोह छात्रों, बेरोजगार युवाओं, मजदूरों और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके बैंक खाते, एटीएम कार्ड और मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करते हैं। कई मामलों में लोगों को यह विश्वास दिलाया जाता है कि वे केवल पैसे के लेनदेन में सहायता कर रहे हैं, लेकिन बाद में उनके खाते साइबर अपराध से जुड़ी रकम को प्राप्त करने और आगे भेजने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।
जांच अधिकारियों के मुताबिक, साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले ऐसे बैंक खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है। ठगी की रकम इन खातों में आने के बाद कुछ ही समय में कई अन्य खातों में भेज दी जाती है या एटीएम के माध्यम से निकाल ली जाती है। इस प्रक्रिया से अपराधियों को धन के स्रोत और अंतिम गंतव्य को छिपाने में मदद मिलती है।
प्रयागराज साइबर पुलिस ने फर्जी सिम कार्ड नेटवर्क से जुड़े मामलों की भी जांच की है। जांच में आरोप सामने आए हैं कि कुछ लोग ग्राहकों के बायोमेट्रिक विवरण का कथित दुरुपयोग कर फर्जी तरीके से मोबाइल सिम सक्रिय कर रहे थे। इन सिम कार्डों का इस्तेमाल साइबर अपराधियों द्वारा कॉलिंग, मैसेजिंग और ऑनलाइन ठगी की गतिविधियों में किए जाने की आशंका है।
पुलिस के अनुसार, जिले में 114 बैंक खाताधारकों और मोबाइल नंबर धारकों का सत्यापन किया गया है। इसके बाद 11 थानों में 18 मुकदमे दर्ज किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में कुछ बैंक खातों और मोबाइल नंबरों का संबंध निवेश धोखाधड़ी, डिजिटल अरेस्ट, पार्ट टाइम जॉब स्कैम, क्रिप्टो ट्रेडिंग फ्रॉड और ऑनलाइन निवेश से जुड़े साइबर अपराधों से सामने आया है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि इन बैंक खातों का इस्तेमाल देश के करीब 16 राज्यों में हुई लगभग ₹110 करोड़ की कथित साइबर ठगी से जुड़े लेनदेन में किया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में कितने स्थानीय और विदेशी लोग शामिल हैं तथा ठगी की रकम को किन माध्यमों से आगे भेजा गया।
Future Crime Research Foundation से जुड़े साइबर अपराध विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह अपनी गतिविधियों को छिपाने के लिए स्थानीय नेटवर्क का सहारा लेते हैं। बैंक खाते, फर्जी सिम कार्ड, डिजिटल वॉलेट और सोशल इंजीनियरिंग तकनीक इनके प्रमुख साधन होते हैं। ऐसे मामलों में बैंकिंग रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा, डिजिटल ट्रांजेक्शन और संचार रिकॉर्ड की फोरेंसिक जांच से अपराधियों के नेटवर्क की पहचान करने में मदद मिलती है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी अन्य व्यक्ति को कमीशन के लालच में बैंक खाता, एटीएम कार्ड या मोबाइल सिम उपलब्ध कराना गंभीर कानूनी जोखिम पैदा कर सकता है। यदि इन माध्यमों का इस्तेमाल साइबर अपराध में किया जाता है तो संबंधित व्यक्ति भी जांच के दायरे में आ सकता है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति को पैसे के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक या मोबाइल सिम इस्तेमाल के लिए न दें। संदिग्ध लेनदेन दिखाई देने पर तत्काल बैंक को सूचना दें और साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराएं।
जांच एजेंसियां अब कथित साइबर सिंडिकेट के अंतरराष्ट्रीय संपर्कों, धन के प्रवाह और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
