नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब केवल टेक इंडस्ट्री या बिजनेस सेक्टर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सीधे सैन्य और राष्ट्रीय सुरक्षा के सबसे संवेदनशील स्तर तक पहुंच चुका है। अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस (Pentagon) ने शुक्रवार को एक बड़ा ऐलान करते हुए Google, OpenAI, Microsoft, Amazon Web Services, Nvidia, Oracle, SpaceX और Reflection जैसी आठ प्रमुख टेक कंपनियों के साथ AI डिप्लॉयमेंट समझौते किए हैं।
इस समझौते के तहत इन कंपनियों की उन्नत AI तकनीकें अब अमेरिकी सेना के Classified नेटवर्क्स पर काम करेंगी, जिनमें Impact Level 6 और Impact Level 7 जैसी उच्च सुरक्षा श्रेणियां शामिल हैं। IL6 सिस्टम “Secret-level” डेटा को संभालता है, जबकि IL7 और भी अधिक संवेदनशील राष्ट्रीय सुरक्षा और खुफिया सूचनाओं के लिए उपयोग किया जाता है।
Pentagon ने इस कदम को अमेरिकी सैन्य क्षमताओं के “AI-first transformation” की दिशा में एक निर्णायक बदलाव बताया है। रक्षा विभाग के अनुसार, यह प्रणाली युद्धक्षेत्र में तेजी से निर्णय लेने, डेटा विश्लेषण, और रियल-टाइम स्थितिजन्य जागरूकता (situational awareness) को मजबूत करेगी।
रिपोर्ट के अनुसार, यह पहल Pentagon के पहले से चल रहे AI प्लेटफॉर्म GenAI.mil पर आधारित है, जिसे 2025 के अंत में लॉन्च किया गया था। इस प्लेटफॉर्म का उपयोग 13 लाख से अधिक सैन्य कर्मियों द्वारा किया जा चुका है, जिन्होंने इसके माध्यम से लाखों AI-जनरेटेड प्रोम्प्ट्स और हजारों AI एजेंट्स को ऑपरेशनल कार्यों में शामिल किया है।
Pentagon का कहना है कि यह नया मॉडल किसी एक कंपनी पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि मल्टी-वेंडर AI सिस्टम पर आधारित होगा, जिससे तकनीकी जोखिम कम होंगे और प्रतिस्पर्धा के जरिए बेहतर परिणाम मिल सकेंगे। हालांकि इस प्रोग्राम के तहत किसी भी कॉन्ट्रैक्ट की वित्तीय जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
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OpenAI के प्रवक्ता ने इस कदम का समर्थन करते हुए कहा कि रक्षा क्षेत्र में AI का उपयोग यह सुनिश्चित करेगा कि सैन्य बलों को विश्व स्तरीय तकनीकी उपकरण उपलब्ध हों, जिससे उनकी निर्णय क्षमता और मिशन दक्षता बढ़ सके। वहीं Amazon Web Services ने भी कहा कि कंपनी लंबे समय से अमेरिकी रक्षा और सैन्य आधुनिकीकरण प्रयासों का हिस्सा रही है और भविष्य में भी इस सहयोग को आगे बढ़ाएगी।
हालांकि इस बड़े AI सैन्य विस्तार को लेकर कई विशेषज्ञों ने चिंताएं भी जताई हैं। डिजिटल अधिकार और सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि संवेदनशील सैन्य नेटवर्क्स में AI के उपयोग से पारदर्शिता, जवाबदेही और गलत निर्णयों के खतरे बढ़ सकते हैं।
Center for Democracy and Technology के एक विशेषज्ञ ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि AI द्वारा लिए गए निर्णयों पर नियंत्रण किसका होगा और यह कैसे सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी गलती का परिणाम मानव जीवन पर न पड़े।
Pentagon का यह कदम ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी रक्षा विभाग पहले से ही AI को अपने वॉरगेमिंग, खुफिया विश्लेषण और ऑपरेशनल प्लानिंग सिस्टम्स में शामिल कर रहा है। इससे पहले भी OpenAI और Google जैसी कंपनियों के साथ अलग-अलग AI प्रोजेक्ट्स पर सहयोग किया जा चुका है।
SpaceX, Nvidia और Google की ओर से इस समझौते पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम वैश्विक स्तर पर सैन्य शक्ति और तकनीकी प्रतिस्पर्धा के नए युग की शुरुआत है, जहां AI केवल एक सहायक तकनीक नहीं बल्कि रणनीतिक निर्णय लेने का केंद्रीय हिस्सा बनता जा रहा है।
