कोलकाता में ‘KYC अपडेट’ के नाम पर साइबर जाल, नकली बैंक अधिकारी बनकर मोबाइल में मालिशियस ऐप इंस्टॉल कराया; 18 ट्रांजैक्शन में उड़ाई गई रकम

“₹9.58 लाख की KYC ठगी: फर्जी बैंक कॉल और APK ऐप से वरिष्ठ नागरिक का बैंक खाता साफ”

Roopa
By Roopa
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कोलकाता। डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल के बीच साइबर ठगों ने एक 67 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक को निशाना बनाकर ₹9.58 लाख की ठगी कर ली। आरोप है कि ठगों ने खुद को बैंक अधिकारी बताकर “KYC अपडेट” के नाम पर न सिर्फ उनकी निजी बैंकिंग जानकारी हासिल की, बल्कि एक फर्जी मोबाइल एप्लिकेशन इंस्टॉल करवाकर उनके फोन का नियंत्रण भी अपने हाथ में ले लिया।

जानकारी के अनुसार यह घटना 27 अप्रैल को सामने आई, जब कोलकाता के सॉल्ट लेक इलाके में रहने वाले पीड़ित को एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को एक निजी बैंक का प्रतिनिधि बताया और कहा कि उनके खाते की KYC तुरंत अपडेट करनी जरूरी है। इसके बाद कॉल को एक अन्य व्यक्ति को ट्रांसफर किया गया, जिसने खुद को बैंक का सीनियर मैनेजर ‘आकाश वर्मा’ बताते हुए भरोसा जीतने की कोशिश की।

जांच अधिकारियों के मुताबिक, इसके बाद पीड़ित को धीरे-धीरे बैंकिंग से जुड़ी संवेदनशील जानकारी साझा करने के लिए राजी किया गया। कुछ ही देर बाद व्हाट्सएप पर ‘CUSTOMER SUPPORT P15.apk’ नाम की एक फाइल भेजी गई और इसे “वेरिफिकेशन प्रक्रिया” के तहत इंस्टॉल करने के लिए कहा गया।

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे ही यह APK फाइल मोबाइल में इंस्टॉल हुई, ठगों को डिवाइस का रिमोट एक्सेस मिल गया। इसके बाद उन्होंने बैंकिंग ऐप्स तक पहुंच बनाकर कई अनधिकृत लेनदेन शुरू कर दिए। इस दौरान 27 और 28 अप्रैल के बीच लगातार 18 ट्रांजैक्शन किए गए, जिनमें ₹9,58,300 की राशि अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दी गई।

पीड़ित को इस धोखाधड़ी का पता तब चला जब उन्होंने अपने बैंक खाते की स्टेटमेंट और एटीएम ट्रांजैक्शन की जांच की। इसके बाद उन्होंने तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई और स्थानीय पुलिस से संपर्क किया। शिकायत के आधार पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, पहचान की चोरी और साइबर अपराध की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजी गई APK फाइल को कभी इंस्टॉल न करें और न ही फोन कॉल या मैसेज पर बैंकिंग डिटेल्स साझा करें। अधिकारियों ने कहा कि ऐसे मामलों में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है, क्योंकि साइबर ठग लगातार नए तरीके अपना रहे हैं।

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इस मामले पर साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रोफेसर त्रिवेणी सिंह ने कहा कि आज के समय में साइबर अपराधी तकनीक से ज्यादा “मानवीय मनोविज्ञान” का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा कि ठग भरोसा कायम करने के लिए खुद को बैंक अधिकारी या तकनीकी सहायता कर्मचारी बताते हैं और फिर डर या जल्दबाजी का माहौल बनाकर लोगों से गलत कदम उठवा लेते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे APK-आधारित हमले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिनमें फर्जी कस्टमर केयर नंबर, नकली वेबसाइट और सर्च इंजन पर गलत जानकारी डालकर लोगों को फंसाया जाता है। एक बार यह एप्लिकेशन फोन में आ जाए, तो यह OTP तक पढ़ सकता है, स्क्रीन मिरर कर सकता है और बैंकिंग सुरक्षा को बायपास कर सकता है।

अधिकारियों ने बताया कि इस मामले की जांच जारी है और साइबर नेटवर्क तथा फंड ट्रेल को ट्रैक किया जा रहा है। यह भी देखा जा रहा है कि पैसा किन-किन खातों के जरिए आगे ट्रांसफर किया गया।

साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने दोहराया है कि बैंक कभी भी फोन कॉल, व्हाट्सएप या मैसेज के जरिए पासवर्ड, OTP या KYC अपडेट की मांग नहीं करते। ऐसे किसी भी अनुरोध को तुरंत संदेह की नजर से देखना चाहिए।

फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और संभावना जताई जा रही है कि इस तरह के और मामले भी सामने आ सकते हैं। अधिकारियों ने आम जनता से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत रिपोर्ट करने की अपील की है।

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