लखनऊ। राज्य कर विभाग की जांच में एक बड़े कर चोरी के मामले का खुलासा हुआ है। आरोप है कि एक कारोबारी बसंत सिंह कनवर ने फर्जी फर्म बनाकर लगभग चार करोड़ नब्बे सात लाख रुपये से अधिक की टैक्स चोरी की और सरकार को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया।
लखनऊ के गोमतीनगर विस्तार क्षेत्र में सामने आए इस मामले में विभागीय जांच के बाद गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। आरोपी ने एमएस रिद्धि इंटरप्राइजेज नाम से फर्म का पंजीकरण कराया था और दस्तावेजों में बैंक खाता एवं बिजली बिल भी प्रस्तुत किया था। शुरुआती जांच में सब कुछ सामान्य प्रतीत हुआ, लेकिन आगे की जांच में बड़े घोटाले के संकेत मिले।
जांच के दौरान यह सामने आया कि पोर्टल पर फर्म के नाम से वर्ष 2025 से 2026 के बीच लगभग ₹4.97 करोड़ का कारोबार दर्शाया गया था, जबकि वास्तविक स्थिति इससे बिल्कुल अलग थी। राज्य कर विभाग को संदेह तब हुआ जब डिजिटल रिकॉर्ड और वास्तविक गतिविधियों में बड़ा अंतर पाया गया।
इसके बाद विभाग ने फर्म का भौतिक निरीक्षण कराया, जिसमें पाया गया कि दिए गए पते पर कोई भी व्यावसायिक गतिविधि संचालित नहीं हो रही थी। मौके पर न तो कर्मचारी मिले और न ही किसी प्रकार का व्यापारिक संचालन दिखाई दिया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि फर्म केवल कागजों पर मौजूद थी।
अधिकारियों के अनुसार, इस फर्म का इस्तेमाल केवल फर्जी बिलिंग और इनपुट टैक्स क्रेडिट के दुरुपयोग के लिए किया गया था। आरोपी ने कथित रूप से फर्जी लेनदेन दिखाकर कर प्रणाली को गुमराह किया और बड़े स्तर पर टैक्स चोरी को अंजाम दिया।
जांच में यह भी पाया गया कि फर्म के नाम पर दर्शाया गया कारोबार पूरी तरह काल्पनिक था और वास्तविक व्यापार कभी हुआ ही नहीं। विभागीय अधिकारियों ने इसे गंभीर आर्थिक अपराध मानते हुए संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है और आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
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मामले की जांच अब डिजिटल रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन और जीएसटी पोर्टल के डाटा के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे नेटवर्क की परत-दर-परत जांच की जाएगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन शामिल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल कर टैक्स चोरी एक संगठित तरीके से की जा रही है, जिससे राजस्व व्यवस्था को गंभीर नुकसान होता है। ऐसे मामलों में निगरानी और सत्यापन प्रणाली को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
वहीं, यह मामला सामने आने के बाद कर विभाग ने फर्जी फर्मों के खिलाफ अभियान और तेज कर दिया है। नए पंजीकरण आवेदनों की जांच को भी अधिक सख्त किया जा रहा है ताकि भविष्य में ऐसे घोटालों को रोका जा सके।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि फर्जी पते और गलत दस्तावेजों के आधार पर पंजीकरण करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही व्यापारिक समुदाय को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
जांच में अब डिजिटल फोरेंसिक टीम को भी शामिल किया गया है, जो सभी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और लेनदेन का विश्लेषण कर रही है। इससे उम्मीद है कि जल्द ही पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकेगा और घोटाले की पूरी सच्चाई सामने आएगी।
अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध फर्म या लेनदेन की जानकारी तुरंत विभाग को दें ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके। उन्होंने कहा कि पारदर्शी कर व्यवस्था ही आर्थिक स्थिरता की नींव है और इसे कमजोर करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
