ग्रुप C और जूनियर इंजीनियर पद का झांसा देकर परिवार से किस्तों में वसूली गई रकम, नकली दस्तावेजों से भरोसा जीतने की कोशिश

धनबाद में रेलवे नौकरी के नाम पर ₹29 लाख की ठगी का खुलासा: फर्जी जॉइनिंग लेटर और मेडिकल सर्टिफिकेट से रचा गया जाल, तीन पर FIR दर्ज

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By Roopa
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धनबाद में रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर एक बड़े ठगी रैकेट का खुलासा हुआ है, जहां बेरोजगारी और सरकारी नौकरी की चाह का फायदा उठाकर एक परिवार से कुल ₹29 लाख की धोखाधड़ी की गई। इस मामले में फर्जी नियुक्ति पत्र और मेडिकल सर्टिफिकेट दिखाकर पीड़ितों को झांसे में लिया गया।

यह मामला सरायढेला थाना क्षेत्र का है, जहां छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के कुडुमकेला, घरघोड़ा निवासी गुरुदेव प्रसाद की शिकायत पर तीन आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उनके दोनों बेटों विकास चौहान और अविनाश चौहान को रेलवे में ग्रुप C और जूनियर इंजीनियर पद पर नौकरी दिलाने का झांसा दिया गया।

एफआईआर के अनुसार, इस पूरे मामले में मनीष कुमार, जितेंद्र कुमार और बिरेंद्र कुमार की भूमिका सामने आई है। बताया गया है कि जितेंद्र कुमार न्यू गोधर कुसुंडा कोलियरी में जनरल मजदूर के पद पर कार्यरत है। शिकायतकर्ता के अनुसार, वर्ष 2023 में एक शादी समारोह के दौरान जितेंद्र से मुलाकात हुई थी, जिसके बाद धीरे-धीरे जान-पहचान बढ़ी।

इसके बाद जितेंद्र ने मनीष कुमार और बिरेंद्र कुमार से भी मुलाकात कराई और इसी दौरान रेलवे में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया। आरोप है कि इन सभी ने मिलकर एक सुनियोजित योजना के तहत परिवार को भरोसे में लिया और मोटी रकम की मांग शुरू कर दी।

शिकायत के अनुसार, कुल ₹22 लाख की राशि पांच अलग-अलग बैंक ट्रांजैक्शन के जरिए मनीष और जितेंद्र की पुत्री अमृता कुमारी के खाते में ट्रांसफर कराई गई। इसके अलावा ₹7 लाख की नकद रकम तीन अलग-अलग किस्तों में जितेंद्र कुमार और बिरेंद्र कुमार को दी गई।

ठगी को विश्वसनीय बनाने के लिए आरोपियों ने फर्जी रेलवे जॉइनिंग लेटर और नकली मेडिकल सर्टिफिकेट भी तैयार कर दिए, जो देखने में पूरी तरह असली प्रतीत होते थे। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर परिवार को ट्रेनिंग के लिए हावड़ा स्टेशन तक भेजने की तैयारी भी कराई गई।

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हालांकि, बाद में जब परिवार ने स्वतंत्र रूप से दस्तावेजों की जांच कराई तो पूरा फर्जीवाड़ा सामने आ गया। जांच में स्पष्ट हुआ कि सभी नियुक्ति पत्र और मेडिकल सर्टिफिकेट नकली थे और किसी भी आधिकारिक प्रक्रिया से उनका कोई संबंध नहीं था।

सच्चाई सामने आने के बाद जब पीड़ित परिवार ने अपनी रकम वापस मांगी, तो आरोपियों ने टालमटोल शुरू कर दी और बाद में धमकी देने लगे। इसके बावजूद पैसे लौटाने से साफ इनकार कर दिया गया।

मामले की शिकायत के बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि यह मामला संगठित धोखाधड़ी का प्रतीत होता है, जिसमें फर्जी दस्तावेजों के जरिए नौकरी का लालच देकर बड़ी रकम वसूली गई।

फिलहाल पुलिस बैंक लेनदेन, कॉल डिटेल और दस्तावेजों की जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इस रैकेट से जुड़े अन्य लोग भी सक्रिय हैं और क्या इसी तरीके से अन्य लोगों को भी ठगा गया है।

पुलिस ने आश्वासन दिया है कि मामले में सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और पूरे नेटवर्क का जल्द खुलासा किया जाएगा।

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