1.4 एकड़ मंदिर भूमि के निजी व्यक्तियों के नाम कथित अवैध पंजीकरण के बाद व्यापक सर्वे और सत्यापन का आदेश; भगवान मुरुगन के छह प्रमुख मंदिरों की संपत्तियों की भी होगी जांच

पलानी मंदिर की ₹100 करोड़ मूल्य की भूमि के कथित फर्जी पंजीकरण मामले में बड़ी कार्रवाई, HR&CE ने विशेष समिति गठित की

Roopa
By Roopa
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चेन्नई: तमिलनाडु सरकार के हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग (HR&CE) ने पलानी स्थित अरुलमिगु धंडायुथपानी स्वामी मंदिर की कथित रूप से अवैध रूप से पंजीकृत भूमि के मामले में व्यापक कार्रवाई शुरू कर दी है। विभाग ने मंदिर की सभी संपत्तियों का विस्तृत सर्वेक्षण और सत्यापन करने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया है। यह कदम उस मामले के सामने आने के बाद उठाया गया है, जिसमें मंदिर की लगभग 1.4 एकड़ भूमि, जिसकी अनुमानित कीमत करीब ₹100 करोड़ बताई जा रही है, कथित तौर पर निजी व्यक्तियों के नाम पर पंजीकृत कर दी गई थी।

राज्य सरकार ने केवल पलानी मंदिर तक ही जांच सीमित नहीं रखी है। अधिकारियों के अनुसार, भगवान मुरुगन के अरुपडई वीडु (छह प्रमुख धामों) से जुड़े अन्य मंदिरों की संपत्तियों के सत्यापन के लिए भी इसी प्रकार की विशेष समितियां गठित की जाएंगी। सरकार का उद्देश्य मंदिरों की भूमि और अन्य परिसंपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता की पहचान करना है।

HR&CE विभाग द्वारा गठित विशेष समिति में विभाग और राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है। समिति को निर्देश दिए गए हैं कि वह मंदिर की सभी संपत्तियों का सत्यापन करे, जिनमें सरकारी अभिलेखों में दर्ज भूमि के साथ-साथ वे संपत्तियां भी शामिल होंगी जो किसी कारणवश आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो सकी हैं।

समिति को यह भी जांचने का दायित्व सौंपा गया है कि क्या मंदिर की किसी भूमि पर अवैध अतिक्रमण हुआ है, स्वामित्व का अनधिकृत हस्तांतरण किया गया है या फिर किसी अन्य प्रकार की अनियमितता हुई है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे यथाशीघ्र विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें, ताकि रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की जा सके।

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विशेष समिति की अध्यक्षता HR&CE विभाग के अतिरिक्त आयुक्त (तिरुचिरापल्ली जोन) करेंगे। समिति में पलानी मंदिर के संयुक्त आयुक्त, पलानी के राजस्व मंडल अधिकारी (RDO), डिंडीगुल के उप-कलेक्टर, सर्वे एवं भूमि अभिलेख विभाग के सहायक निदेशक तथा मंदिर भूमि के विशेष तहसीलदार को सदस्य बनाया गया है। विभिन्न विभागों के अधिकारियों को शामिल करने का उद्देश्य राजस्व रिकॉर्ड, भूमि अभिलेख और मंदिर संपत्तियों का समन्वित सत्यापन सुनिश्चित करना है।

अधिकारियों के अनुसार, सर्वेक्षण के दौरान प्रत्येक संपत्ति की वर्तमान स्थिति, राजस्व अभिलेख, स्वामित्व संबंधी दस्तावेज, सीमांकन और वास्तविक कब्जे की जांच की जाएगी। यदि किसी भूमि के पंजीकरण, हस्तांतरण या उपयोग में अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर अवैध रूप से हस्तांतरित संपत्तियों को वापस मंदिर के नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।

इस बीच, मामले ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है। अन्नाद्रमुक (AIADMK) के महासचिव एडप्पडी के. पलानीस्वामी ने 25 जुलाई को पलानी में विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में शामिल लोगों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है और पूरे प्रकरण की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराई जानी चाहिए।

फिलहाल HR&CE विभाग का कहना है कि विशेष समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। राज्य सरकार का मानना है कि मंदिरों की संपत्तियों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण, डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना और नियमित सत्यापन भविष्य में इस प्रकार के कथित अवैध पंजीकरण, अतिक्रमण और स्वामित्व संबंधी विवादों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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