जानी-मानी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी ‘पैसा लो डिजिटल लिमिटेड’ के खिलाफ आयकर विभाग का करीब 33 घंटे चला सर्वे शुक्रवार रात साढ़े 10 बजे समाप्त हुआ। गुरुवार दोपहर करीब डेढ़ बजे शुरू हुई कार्रवाई कंपनी के विभिन्न ठिकानों से होती हुई शुक्रवार को बाईपास रोड स्थित गांधी नगर कार्यालय पर केंद्रित रही। सर्वे के दौरान विभागीय टीम को कथित तौर पर कई वित्तीय अनियमितताएं मिली हैं। अधिकारियों ने उपलब्ध दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर कंपनी से अतिरिक्त आय स्वीकार करने और उस पर नियमानुसार कर देनदारी तय करने को कहा है।
सूत्रों के अनुसार, सर्वे के दौरान सामने आए दस्तावेजों के आधार पर विभाग का मानना है कि कंपनी की वास्तविक आय और रिकॉर्ड में दर्शाई गई आय के बीच अंतर हो सकता है। हालांकि, अतिरिक्त आय की वास्तविक राशि और उस पर बनने वाली कर देनदारी को लेकर अभी विभाग और कंपनी के बीच अंतिम सहमति नहीं बनी है। कंपनी के कारोबार और टर्नओवर को देखते हुए विभाग को उम्मीद है कि जांच के बाद सामने आने वाली अतिरिक्त आय पर बड़ी राशि में कर देनदारी बन सकती है।
जांच के दौरान अधिकारियों ने कंपनी की ओर से लोन वितरण के लिए जुटाई गई रकम और उसके स्रोतों पर विशेष ध्यान दिया। विभागीय टीम ने कथित तौर पर ऐसे वित्तीय लेनदेन और प्रक्रियाओं की जांच की, जिनमें नियमों के अनुपालन को लेकर सवाल उठे हैं। अधिकारियों ने कंपनी के दस्तावेजों, खातों और अन्य रिकॉर्ड का परीक्षण कर यह पता लगाने का प्रयास किया कि विभिन्न स्रोतों से प्राप्त रकम का इस्तेमाल किस तरह किया गया और क्या सभी लेनदेन नियमानुसार दर्ज किए गए थे।
आयकर विभाग ने कंपनी को उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर कुछ अतिरिक्त आय को स्वीकार करने के लिए भी कहा है। हालांकि, अंतिम कर निर्धारण सर्वे के दौरान सामने आए दस्तावेजों, कंपनी के जवाब और आगे की जांच के आधार पर किया जाएगा। फिलहाल विभागीय कार्रवाई को वित्तीय रिकॉर्ड की विस्तृत जांच के रूप में देखा जा रहा है।
सर्वे के दौरान कंपनी को वित्तीय सहायता देने वाले निवेशकों की भी जानकारी जुटाई गई। अधिकारियों ने यह जानने की कोशिश की कि कंपनी में पैसा किन निवेशकों के माध्यम से पहुंचा और क्या किसी अन्य कंपनी से भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से धन उपलब्ध कराया गया था। संबंधित कंपनियों और निवेशकों के बीच वित्तीय संबंधों की पड़ताल के साथ दस्तावेजों में दर्ज ब्याज दरों की भी जांच की गई।
आयकर विभाग की टीम ने कंपनी के विभिन्न वित्तीय दस्तावेजों, खातों और लेनदेन से संबंधित रिकॉर्ड की समीक्षा की। इसका उद्देश्य यह पता लगाना था कि कंपनी की फंडिंग संरचना किस तरह काम करती है और लोन कारोबार के लिए जुटाई गई पूंजी के स्रोत तथा उसके इस्तेमाल में कोई ऐसी विसंगति तो नहीं है, जिसका असर कर देनदारी पर पड़ता हो।
यह कार्रवाई आयकर विभाग के प्रधान आयुक्त प्रथम डॉ. संजय लाल के निर्देशन में हुई। सर्वे का नेतृत्व उप आयुक्त आशिमा महाजन ने किया। विभागीय टीम ने लंबे समय तक कंपनी के कार्यालयों में उपलब्ध दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच की। कार्रवाई समाप्त होने के बाद भी संबंधित वित्तीय जानकारी के विश्लेषण और कर देनदारी के निर्धारण की प्रक्रिया आगे जारी रह सकती है।
‘पैसा लो डिजिटल लिमिटेड’ का संबंध एक ऐसे कारोबारी समूह से बताया जाता है जिसकी गतिविधियां कई क्षेत्रों में फैली हैं। कंपनी के प्रबंध निदेशक सुनील अग्रवाल डेढ़ दर्जन से अधिक कंपनियों से जुड़े बताए जाते हैं। समूह की कारोबारी गतिविधियों में वित्तीय सेवाओं के अलावा ऊर्जा, ऑटोमोबाइल, हाउसिंग फाइनेंस और तकनीक जैसे क्षेत्र शामिल हैं। आगरा में एक प्रमुख दिल्ली पब्लिक स्कूल की इकाई का संचालन भी इसी समूह से जुड़ा बताया जाता है। समूह के अन्य निदेशकों में हरीश सिंह, शांतनु अग्रवाल और अनूप कृष्ण के नाम शामिल हैं।
कंपनी के मौजूदा कारोबार में लघु व्यवसाय, माइक्रोफाइनेंस और मोबिलिटी लोन प्रमुख क्षेत्र बताए जाते हैं। इसका नेटवर्क ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों तक फैला है, जहां छोटे दुकानदारों, किसानों, कारीगरों और स्वरोजगार करने वाले लोगों को ऋण उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाता है। ऐसे ग्राहकों को अक्सर पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था से आसानी से ऋण नहीं मिल पाता।
आयकर सर्वे के बाद अब कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड की विस्तृत समीक्षा महत्वपूर्ण होगी। विभाग की जांच से यह स्पष्ट होगा कि सामने आई विसंगतियां कर निर्धारण को किस स्तर तक प्रभावित करती हैं और कंपनी पर वास्तविक अतिरिक्त कर देनदारी कितनी बनती है। फिलहाल विभाग और कंपनी दोनों स्तर पर रिकॉर्ड के मिलान और आगे की प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है।
