भुवनेश्वर। ओडिशा में साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी के खिलाफ चलाए गए राज्यव्यापी अभियान ‘ऑपरेशन साइबर कवच’ में बड़ी सफलता मिली है। करीब एक महीने तक चले इस विशेष अभियान के दौरान 379 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि हजारों संदिग्ध खातों और नेटवर्क की जांच कर साइबर ठगी के संगठित ढांचे पर बड़ा प्रहार किया गया।
13 फरवरी से 12 मार्च के बीच चलाए गए इस अभियान में पुलिस ने विशेष रूप से ‘म्यूल बैंक अकाउंट’ और फर्जी सिम नेटवर्क को निशाना बनाया, जो साइबर ठगी के प्रमुख माध्यम माने जाते हैं। इस दौरान कुल 39,714 बैंक खातों का सत्यापन किया गया, जिनका इस्तेमाल संदिग्ध लेन-देन और धोखाधड़ी में किया जा रहा था।
कार्रवाई के दौरान 379 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 349 लोग सीधे तौर पर म्यूल खातों से जुड़े पाए गए। इसके अलावा अन्य आरोपी फर्जी सिम कार्ड के इस्तेमाल, एटीएम के जरिए अवैध निकासी और चेक से जुड़े फ्रॉड में शामिल थे। पुलिस ने 7,549 संदिग्ध व्यक्तियों को नोटिस भी जारी किए हैं, जिनकी भूमिका की जांच अभी जारी है।
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कई जिलों में एक साथ छापेमारी, इंटर-स्टेट गैंग्स का खुलासा
यह अभियान राज्य के कई प्रमुख जिलों—भुवनेश्वर, कटक, संबलपुर और गंजाम—में एक साथ चलाया गया। समन्वित छापेमारी के दौरान कई अंतरराज्यीय गिरोहों का पर्दाफाश हुआ, जो ऑनलाइन सट्टेबाजी, हवाला लेन-देन और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े अपराधों में सक्रिय थे।
छापेमारी के दौरान बड़ी संख्या में सिम कार्ड, एटीएम कार्ड, बैंकिंग दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं। जांच में सामने आया कि ये गिरोह देश के अलग-अलग हिस्सों में फैले नेटवर्क के जरिए फर्जी खातों का इस्तेमाल कर पैसे का ट्रांसफर और निकासी करते थे, जिससे उनकी पहचान छिपी रहे।
संगठित तरीके से चलता था साइबर फ्रॉड नेटवर्क
प्रारंभिक जांच से स्पष्ट हुआ है कि साइबर अपराधी सुनियोजित तरीके से ‘म्यूल अकाउंट’ तैयार करते थे। इसके लिए गरीब या अनजान लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाए जाते थे, जिन्हें बाद में कमीशन के आधार पर गिरोह को सौंप दिया जाता था। इसी तरह फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल कर ऑनलाइन पहचान बनाई जाती थी, जिससे ट्रांजैक्शन ट्रेस करना मुश्किल हो जाता था।
इसके जरिए ठगी की रकम को कई स्तरों पर ट्रांसफर कर अंततः नकद निकासी या क्रिप्टोकरेंसी में बदल दिया जाता था। पुलिस का मानना है कि इस तरह के नेटवर्क साइबर अपराध को संगठित रूप देते हैं और इन पर सख्त कार्रवाई जरूरी है।
विशेष रणनीति के तहत चला अभियान
यह विशेष अभियान राज्य स्तर पर एक उच्च स्तरीय समीक्षा के बाद शुरू किया गया था, जिसमें सभी जिलों को समन्वित कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। जिला स्तर पर लगातार छापेमारी और निगरानी के जरिए संदिग्ध गतिविधियों को चिन्हित कर कार्रवाई की गई।
प्रख्यात साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा, “म्यूल अकाउंट और फर्जी सिम साइबर अपराध की रीढ़ बन चुके हैं। जब तक इन नेटवर्क्स को तोड़ा नहीं जाएगा, तब तक ऑनलाइन ठगी पर पूरी तरह लगाम लगाना मुश्किल है। ऐसे अभियानों से इन संगठित गिरोहों पर प्रभावी चोट पड़ती है।”
उन्होंने यह भी कहा कि आम लोगों को अपने बैंक खाते और मोबाइल नंबर किसी को भी देने से बचना चाहिए, क्योंकि यही जानकारी साइबर अपराधियों के लिए सबसे बड़ा हथियार बनती है।
आगे भी जारी रहेगी कार्रवाई
पुलिस ने संकेत दिए हैं कि ‘ऑपरेशन साइबर कवच’ जैसे अभियान आगे भी जारी रहेंगे और साइबर अपराध से जुड़े नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए निरंतर कार्रवाई की जाएगी। बरामद डिजिटल डेटा और खातों की गहन जांच के जरिए अन्य संदिग्धों की पहचान की जा रही है।
साथ ही आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या ऑनलाइन ऑफर के झांसे में न आएं और तुरंत इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दें
