बरहामपुर। ओडिशा के गंजाम जिले में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं और नौकरी तलाश रहे लोगों से कथित ठगी करने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। छत्रपुर पुलिस ने शुक्रवार को तीन महिलाओं समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, आरोपी पिछले करीब एक साल से अलग-अलग इलाकों में लोगों को सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर रकम वसूल रहे थे। ठगी के बाद उन्हें फर्जी नियुक्ति पत्र और पहचान पत्र दिए जाते थे।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पुराना छत्रपुर निवासी बिष्णुप्रिया बेहरा (27), कबीसूर्यनगर के पइका जमुना निवासी नारायण सेठी (36), उसकी पत्नी दीपा बेहरा (22) और अगस्टिनुआगांव निवासी सुनीता दास (36) के रूप में हुई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित नेटवर्क ने कितने लोगों को निशाना बनाया और अब तक कितनी रकम वसूली गई।
चपरासी की नौकरी के नाम पर मांगे ₹2.30 लाख
मामला पुटी गोपालपुर निवासी इमरान खान (40) की शिकायत के बाद सामने आया। खान चामाखंडी स्थित टाटा परियोजना में काम करता है। उसने गुरुवार को छत्रपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के मुताबिक, सुनीता दास ने खुद को गंजाम प्रखंड कार्यालय में डाटा एंट्री ऑपरेटर बताया और खान की पत्नी फातिमा बेगम को चपरासी की सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा दिया।
आरोप है कि सुनीता ने नौकरी दिलाने के बदले ₹2.30 लाख की मांग की। उसने खान से व्यक्तिगत दस्तावेज भी लिए। खान ने कथित तौर पर फोनपे के माध्यम से ₹2.10 लाख का भुगतान किया। रकम लेने के बाद सुनीता ने फातिमा को नियुक्ति पत्र और पहचान पत्र सौंप दिया। हालांकि, बाद में जब इन दस्तावेजों की जांच की गई तो वे फर्जी पाए गए। इसके बाद पीड़ित ने पुलिस से शिकायत की।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और 3(5) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को अन्य आरोपियों और कथित ठगी के तरीके के बारे में जानकारी मिली।
फर्जी सरकारी कर्मचारी बनकर तैयार करते थे कागज
पुलिस के अनुसार, बिष्णुप्रिया बेहरा कथित तौर पर खुद को रंगेइलुंडा प्रखंड में राशन कार्ड संचालक बताकर लोगों से संपर्क करती थी। आरोप है कि वह फर्जी नियुक्ति पत्र और रोजगार से जुड़े अन्य दस्तावेज तैयार करने में भी शामिल थी। पुलिस को संदेह है कि सरकारी कार्यालयों और पदों से जुड़ी जानकारी का इस्तेमाल लोगों का भरोसा जीतने के लिए किया जाता था।
जांच में यह भी सामने आया कि सुनीता द्वारा पीड़ितों से कथित तौर पर वसूली गई रकम बिष्णुप्रिया को हस्तांतरित की जाती थी। इससे दोनों के बीच वित्तीय लेनदेन और कथित आपसी संबंधों की जांच का रास्ता खुला। पुलिस अब इन लेनदेन से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
वहीं, नारायण सेठी और उसकी पत्नी दीपा बेहरा पर खल्लिकोट तथा आसपास के इलाकों में इसी तरह सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर लोगों से पैसे लेने का आरोप है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि दोनों ने कितने लोगों को निशाना बनाया और उनके पास से मिली सामग्री का इस कथित नेटवर्क में किस तरह इस्तेमाल होता था।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
11 फर्जी नियुक्ति पत्र समेत कई दस्तावेज जब्त
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से ₹25,000 नकद, तीन मोबाइल फोन, 11 फर्जी नियुक्ति पत्र और एक फर्जी पहचान पत्र बरामद किया है। तलाशी के दौरान कथित पीड़ितों से संबंधित कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी मिले। इनमें स्कूल प्रमाणपत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड और जाति प्रमाणपत्र शामिल हैं।
जांचकर्ताओं के लिए ये दस्तावेज अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि इनके आधार पर उन लोगों की पहचान की जा सकती है जिन्हें सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा दिया गया था। पुलिस जब्त मोबाइल फोन की भी जांच कर रही है ताकि आरोपियों के बीच हुई बातचीत, संभावित लेनदेन और अन्य पीड़ितों से संपर्क की जानकारी जुटाई जा सके।
पूछताछ में नेटवर्क की कड़ियां तलाश रही पुलिस
गिरफ्तार चारों आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फर्जी नियुक्ति पत्र और पहचान पत्र कहां तैयार किए जाते थे। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि दस्तावेजों में सरकारी विभागों के नाम, पद और अन्य आधिकारिक विवरण किस तरह इस्तेमाल किए जाते थे।
जांच का एक अहम पहलू कथित तौर पर वसूली गई रकम का लेनदेन भी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि पैसा किन खातों या लोगों तक पहुंचता था और क्या इस नेटवर्क में गिरफ्तार आरोपियों के अलावा अन्य लोग भी शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार, चारों आरोपियों को अदालत में पेश किया जाएगा। मामले की जांच जारी है और पुलिस संभावित अन्य पीड़ितों तथा गिरोह से जुड़े लोगों की पहचान करने में जुटी है।
