पुलिस का आरोप- तसदुक हुसैन डार फर्जी एंटीक, आयुर्वेदिक उत्पाद, जमीन और वन उपज से जुड़े कई वित्तीय मामलों में शामिल; जंगली लहसुन की शिकायत के बाद जांच का दायरा बढ़ा

नकली एंटीक से ₹55.80 लाख की जंगली लहसुन डील तक: कथित ठगी नेटवर्क में कश्मीर का कारोबारी PSA के तहत हिरासत में

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By Roopa
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अनंतनाग: जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में पुलिस ने कथित वित्तीय ठगी के मामलों की लंबी कड़ी सामने आने के बाद तसदुक हुसैन डार उर्फ तास डार को सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (PSA) के तहत हिरासत में लिया है। पुलिस के अनुसार, डार पर नकली एंटीक सामान को असली बताकर बेचने, आयुर्वेदिक उत्पादों और औषधियों के जरिए ग्राहकों को आकर्षित करने, प्रॉपर्टी सौदों और वन उपज से जुड़े कथित लेनदेन में शामिल होने के आरोप हैं। कार्रवाई उस जांच के बाद हुई, जिसमें एक व्यक्ति से ₹55.80 लाख की कथित जंगली लहसुन ठगी का मामला सामने आया था।

जिला मजिस्ट्रेट की ओर से PSA के तहत वारंट जारी किए जाने के बाद पुलिस ने डार को हिरासत में लिया। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे डिस्ट्रिक्ट जेल, भद्रवाह भेज दिया गया।

जंगली लहसुन की डील से शुरू हुई जांच

मामले की शुरुआत जून 2025 में अनंतनाग पुलिस को मिली शिकायत से हुई थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, उसने डार और दो अन्य लोगों के साथ जंगली लहसुन खरीदने का समझौता किया था। सौदे के तहत शुरुआत में ₹1.78 लाख का भुगतान किया गया। आरोप था कि दो दिन के भीतर जंगली लहसुन उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया, लेकिन तय समय पर माल नहीं मिला।

इसके बाद आरोपियों ने कथित तौर पर और रकम की मांग की। शिकायतकर्ता ने बैंक ट्रांसफर और नकद के जरिए कुल ₹55.80 लाख का भुगतान कर दिया। इसके बावजूद न तो जंगली लहसुन की आपूर्ति हुई और न ही रकम वापस की गई।

जांच के दौरान पुलिस को यह भी पता चला कि आरोपियों के पास जंगली लहसुन की खरीद और बिक्री के लिए वन विभाग से आवश्यक लाइसेंस या अनुमति नहीं थी। यह स्थिति अनंतनाग के डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर की ओर से भी पुष्टि किए जाने की बात सामने आई।

बैंक लेनदेन और हस्तलिखित रसीद की जांच

पुलिस ने मामले में पैसों के लेनदेन की भी जांच की। बैंक रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपियों से जुड़े खातों में ₹34,16,995 ट्रांसफर किए गए थे। शिकायतकर्ता ने ₹13.50 लाख की एक हस्तलिखित रसीद भी जांच एजेंसी के सामने पेश की।

पुलिस के अनुसार, रसीद की फॉरेंसिक जांच में यह निष्कर्ष सामने आया कि उसे तसदुक हुसैन डार ने ही लिखा था। जंगली लहसुन से जुड़ी शिकायत पर अनंतनाग पुलिस थाने में FIR नंबर 126/2025 दर्ज की गई। इसके बाद पुलिस ने सबूत जुटाने और संभावित पीड़ितों तथा सहयोगियों की पहचान के लिए तीन स्थानों पर छापेमारी की।

कई कारोबारों के जरिए कथित नेटवर्क

जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने मामले को केवल जंगली लहसुन की कथित ठगी तक सीमित नहीं रखा। जांचकर्ताओं के अनुसार, डार के साथ मोहम्मद इकबाल वानी और मुजीब अहमद कोका भी अलग-अलग नामों से संचालित कई फर्मों से जुड़े थे।

पुलिस का आरोप है कि इन कथित कारोबारों में जमीन, कीमती पत्थर, वन उपज और अन्य वस्तुओं से जुड़े सौदे शामिल थे। जांचकर्ताओं ने तीनों के बीच फोन पर हुई बातचीत और कॉल रिकॉर्ड की भी जांच की। पुलिस के अनुसार, तीनों के बीच लगातार संपर्क कथित तौर पर समन्वित गतिविधियों की ओर इशारा करता है।

जांच में ऐसे अन्य लोगों के बारे में भी जानकारी मिलने का दावा किया गया है, जो कथित तौर पर इस नेटवर्क से प्रभावित हुए हो सकते हैं।

नकली एंटीक और आयुर्वेदिक उत्पाद भी जांच के दायरे में

पुलिस ने आरोप लगाया है कि डार कथित तौर पर नकली एंटीक सामान को असली बताकर ग्राहकों को बेचता था। इसके अलावा आयुर्वेदिक उत्पादों और विभिन्न औषधियों के जरिए ग्राहकों को आकर्षित करने का भी आरोप है। प्रॉपर्टी लेनदेन से जुड़े आरोपों की भी जांच की जा रही है।

पुलिस के मुताबिक, कथित ठगी का तरीका कई मामलों में एक जैसा था। लोगों को लाभदायक कारोबार में निवेश करने और बड़ी रकम वापस मिलने का भरोसा दिया जाता था। इसके बाद कथित तौर पर अतिरिक्त रकम की मांग की जाती और भुगतान वापस मांगने पर धमकी या दबाव बनाए जाने के आरोप हैं।

PSA के तहत कार्रवाई, जांच जारी

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, PSA के तहत हिरासत का आधार यह आकलन है कि डार की कथित गतिविधियां किसी एक वित्तीय विवाद तक सीमित नहीं थीं और उनसे व्यापक स्तर पर सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका थी।

हालांकि, डार के खिलाफ लगाए गए आरोप अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। पुलिस वित्तीय लेनदेन, कथित कंपनियों, संभावित पीड़ितों और अन्य सहयोगियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।

₹55.80 लाख की जंगली लहसुन डील से शुरू हुई जांच अब नकली एंटीक, आयुर्वेदिक उत्पाद, जमीन, कीमती पत्थरों और अन्य कारोबारी गतिविधियों तक पहुंच गई है। पुलिस अब कथित नेटवर्क की पूरी संरचना और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाने में जुटी है।

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