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साइबर ठगी के जाल पर पुलिस ने कसा शिकंजा: तीन साल में 1,692 गिरफ्तार, ₹68 करोड़ की रिकवरी

Roopa
By Roopa
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नोएडा: साइबर क्राइम ब्रांच ने 1 जनवरी 2023 से 27 मार्च 2026 तक 1,692 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है और डिजिटल ठगी, फर्जी केवाईसी अपडेट, निवेश फ्रॉड तथा अन्य ऑनलाइन अपराधों में फंसे पीड़ितों को कुल ₹68.3 करोड़ से अधिक की राशि लौटाई है। पुलिस ने बताया कि इस अभियान में तकनीकी निगरानी और राज्य-पार्श्व सहयोग से अपराधियों की पहचान की गई, जो कई राज्यों में सक्रिय थे।

पुलिस कमिश्नरेट ने कहा कि तीन वर्षों में किए गए अभियानों की व्यापकता और अंतर-राज्यीय नेटवर्क यह दर्शाता है कि साइबर अपराधी अब और अधिक संगठित और जटिल तरीकों से नागरिकों को निशाना बना रहे हैं। अभियानों के दौरान कुल ₹139.5 करोड़ फ्रीज करने में सफलता मिली, जिसमें से ₹68.3 करोड़ पीड़ितों को लौटाया गया।

साइबर अपराध मामलों में समय पर रिपोर्टिंग को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी साइबर फ्रॉड या डिजिटल ठगी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर सूचना दें या आधिकारिक पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

साइबर जागरूकता और रोकथाम पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, कार्यशालाएँ, सामुदायिक आउटरीच प्रोग्राम और साइबर सुरक्षा सेमिनार के माध्यम से आम जनता को नियमित जानकारी दी जा रही है। जागरूकता अभियानों में नागरिकों को यह सलाह दी जाती है कि वे किसी भी अज्ञात कॉलर या अविश्वसनीय लिंक के माध्यम से व्यक्तिगत, बैंकिंग या ओटीपी विवरण साझा न करें।

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पुलिस कमिश्नरेट ने यह भी कहा कि केवल अधिकृत और सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करके वित्तीय लेन-देन करें। “सुरक्षित डिजिटल व्यवहार और समय पर रिपोर्टिंग ही ठगी को रोकने और धन वसूलने में सबसे कारगर उपाय हैं,” अधिकारियों ने जोर दिया।

अभियानों में गिरफ्तार अपराधियों में फर्जी निवेश पोर्टल, डिजिटल वॉलेट धोखाधड़ी, बैंकिंग ट्रांजैक्शन घोटाले और ऑनलाइन गेमिंग फ्रॉड शामिल रहे। इनमें से कई अपराध अंतर-राज्यीय नेटवर्क द्वारा संचालित थे, जिन्हें पुलिस ने तकनीकी साधनों और बैंकिंग सहयोग के जरिए ट्रेस किया।

विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई और पीड़ितों को राहत दिलाने के प्रयास लगातार बढ़ रहे हैं। डिजिटल लेन-देन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार और बैंकिंग संस्थानों ने तकनीकी और प्रशासनिक उपाय सुदृढ़ किए हैं।

अधिकारी यह भी बताते हैं कि जागरूक नागरिक ही साइबर अपराध का पहला और सबसे प्रभावी रोकथाम कड़ी हैं। समय पर सूचना, सतर्कता और डिजिटल सुरक्षा का पालन करके लाखों रुपये के नुकसान को रोका जा सकता है।

साइबर क्राइम ब्रांच ने कहा कि अभियान निरंतर जारी रहेंगे और जनता को डिजिटल ठगी के खतरों के प्रति सचेत रखने के लिए और अधिक जागरूकता गतिविधियाँ आयोजित की जाएँगी। इसके अलावा, पुलिस ने साइबर फ्रॉड की प्रकृति और रोकथाम पर विशेष रिपोर्ट और ऑनलाइन गाइडलाइन भी तैयार की हैं, ताकि नागरिक सुरक्षित तरीके से डिजिटल लेन-देन कर सकें।

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