नई दिल्ली: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने NEET-UG 2026 पेपर लीक और परीक्षा में कथित अनियमितताओं के मामले में गिरफ्तार 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। यह आरोपपत्र दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया है, जिसे अब पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए गठित विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट के समक्ष भेजा जाएगा।
सीबीआई के अनुसार, आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक न्यासभंग, साक्ष्य नष्ट करने सहित कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। इनके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम तथा सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के प्रावधान भी लगाए गए हैं।
चार्जशीट में जिन 13 आरोपियों के नाम शामिल हैं, वे हैं यश यादव, मंगीलाल बीवाल, दिनेश बीवाल, विकास बीवाल, शुभम खैरनार, धनंजय लोखंडे, प्रह्लाद कुलकर्णी, तेजस हर्षद कुमार, डॉ. मनोज शिरुरे, शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर, मनीषा वाघमारे, मनीषा मंधारे और मनीषा संजय हवालदार। सीबीआई के अनुसार सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
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जांच एजेंसी ने बताया कि चार्जशीट 360 गवाहों, 422 दस्तावेजी साक्ष्यों और 43 भौतिक साक्ष्यों पर आधारित है। इसमें डिजिटल फोरेंसिक रिपोर्ट, हस्तलेखन विशेषज्ञों की राय तथा शैक्षणिक विशेषज्ञों के तकनीकी विश्लेषण भी शामिल किए गए हैं।
सीबीआई ने मई 2026 में उच्च शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्रालय की लिखित शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया था। शिकायत में 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित अनियमितताओं और प्रश्नपत्र लीक होने का आरोप लगाया गया था। यह परीक्षा भारत के 551 शहरों और विदेश के 14 शहरों में आयोजित हुई थी, जिसमें करीब 23 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे।
पेपर लीक के आरोपों को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन और व्यापक जनआक्रोश के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा रद्द कर दी थी। इसके बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित कराई।
जांच के दौरान सीबीआई ने 72 अधिकारियों की कई टीमों का गठन कर महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली समेत विभिन्न राज्यों में 92 स्थानों पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान डिजिटल उपकरण, संचार उपकरण और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए, जिनकी फोरेंसिक इमेजिंग और विस्तृत डिजिटल जांच कराई गई।
सीबीआई के अनुसार, जांच में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और भौतिकी विषयों के तीन विशेषज्ञों की कथित संलिप्तता सामने आई, जिन्हें गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा प्रश्नपत्र हासिल कर उसे विभिन्न लोगों तक पहुंचाने वाले कई कथित बिचौलियों की पहचान कर उन्हें भी गिरफ्तार किया गया। जांच में कोचिंग संस्थानों से जुड़े दो व्यक्तियों की गिरफ्तारी भी हुई, जिन पर प्रश्नपत्र प्राप्त करने का आरोप है।
एजेंसी ने बताया कि मामले में मनी ट्रेल की भी जांच की गई है। वित्तीय जांच के दौरान आरोपियों से जुड़े कई बैंक खाते, बैंक लॉकर और एक डीमैट खाता फ्रीज किए गए हैं, ताकि कथित अपराध से अर्जित धन का पता लगाया जा सके।
सीबीआई का कहना है कि डिजिटल फोरेंसिक विश्लेषण, हस्तलेखन परीक्षण और शैक्षणिक विशेषज्ञों की रिपोर्ट से यह पुष्टि हुई है कि परीक्षा से पहले कथित रूप से प्रश्नपत्रों का प्रसार किया गया था। एजेंसी ने कहा कि अब मामले की आगे की सुनवाई और कानूनी कार्यवाही नामित विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट में होगी।
