नागपुर (महाराष्ट्र): महाराष्ट्र के नागपुर में एक 31 वर्षीय डॉक्टर से ऑनलाइन शेयर निवेश के नाम पर ₹46.16 लाख की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि साइबर ठगों ने यूट्यूब पर निवेश से जुड़ा विज्ञापन दिखाकर डॉक्टर को अपने जाल में फंसाया और फर्जी ब्रोकिंग फर्म के प्रतिनिधि बनकर भारी मुनाफे का लालच दिया। बाद में निवेश की राशि निकालने के लिए ₹16 लाख की प्रोसेसिंग फीस मांगने पर डॉक्टर को ठगी का अहसास हुआ और उन्होंने साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस के अनुसार, पीड़ित डॉक्टर अप्रैल 2025 से एक मेडिकल कॉलेज में कार्यरत हैं और पिछले चार वर्षों से शेयर बाजार में निवेश कर रहे थे। मई 2026 में उन्होंने यूट्यूब पर शेयर बाजार में निवेश से संबंधित एक विज्ञापन देखा, जिसके बाद कथित ठगों ने उनसे संपर्क किया।
जांच में सामने आया कि डॉक्टर को व्हाट्सऐप पर एक व्यक्ति का संदेश मिला, जिसने खुद को एक इक्विटी ब्रोकिंग कंपनी का प्रतिनिधि बताया। आरोपी ने निवेश संबंधी सलाह देने का दावा किया और डॉक्टर को एक व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ दिया, जहां नियमित रूप से शेयर खरीदने-बेचने की सिफारिशें साझा की जाती थीं।
पुलिस के मुताबिक, ग्रुप के एक अन्य सदस्य ने कथित तौर पर SEBI पंजीकरण प्रमाणपत्र भी साझा किया, जिससे डॉक्टर का भरोसा और मजबूत हो गया। प्लेटफॉर्म पर शुरुआती निवेश पर लाभ दिखाई देने के कारण डॉक्टर ने उसे वास्तविक मान लिया और निवेश बढ़ाते गए।
आरोप है कि ठगों ने लगातार अधिक निवेश करने के लिए प्रेरित किया, जिसके बाद डॉक्टर ने उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए विभिन्न बैंक खातों में कुल ₹46.16 लाख ट्रांसफर कर दिए।
मामले का खुलासा तब हुआ जब आरोपियों ने दावा किया कि डॉक्टर का निवेश बढ़कर ₹16.52 करोड़ हो गया है। हालांकि, जब डॉक्टर ने ₹50 लाख निकालने का प्रयास किया, तो उनसे ₹16 लाख की अतिरिक्त प्रोसेसिंग फीस जमा करने को कहा गया। इस मांग पर संदेह होने के बाद डॉक्टर ने साइबर पुलिस से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने कथित आरोपियों, फर्जी इक्विटी ब्रोकिंग कंपनी के प्रबंधन और संबंधित व्हाट्सऐप ग्रुप संचालकों के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम तथा अन्य प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस डिजिटल लेनदेन, बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़े तकनीकी साक्ष्यों की जांच कर रही है।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, साइबर अपराधी निवेश संबंधी फर्जी विज्ञापनों, व्हाट्सऐप ग्रुप, नकली दस्तावेज और शुरुआती मुनाफे का भ्रम पैदा कर लोगों का विश्वास जीतते हैं। इसके बाद वे अधिक निवेश कराने और अंत में निकासी के समय टैक्स, प्रोसेसिंग फीस या अन्य शुल्क के नाम पर अतिरिक्त रकम मांगते हैं। उन्होंने निवेशकों को सलाह दी कि किसी भी निवेश प्लेटफॉर्म की वैधता की पुष्टि संबंधित नियामक संस्थाओं और आधिकारिक स्रोतों से अवश्य करें तथा केवल सोशल मीडिया या मैसेजिंग ऐप के आधार पर निवेश का निर्णय न लें।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया, यूट्यूब या व्हाट्सऐप के माध्यम से मिलने वाले निवेश प्रस्तावों पर बिना सत्यापन भरोसा न करें। यदि किसी निवेश प्लेटफॉर्म पर निकासी से पहले अतिरिक्त शुल्क मांगा जाए या असामान्य रूप से अधिक रिटर्न का दावा किया जाए, तो सतर्क रहें और तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
