मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में एक बार फिर ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी का बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें दादर निवासी 51 वर्षीय शेयर ट्रेडर से साइबर ठगों ने करीब ₹86.9 लाख की ठगी कर ली। आरोपियों ने फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म और व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए उसे शेयर ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का झांसा दिया और धीरे-धीरे बड़ी रकम ट्रांसफर करवा ली।
पीड़ित, जो पहले से ही शेयर बाजार में ट्रेडिंग का अनुभव रखता था, एक ऑनलाइन विज्ञापन के जरिए इस ठगी के जाल में फंसा। विज्ञापन में तेजी से बढ़ते शेयरों में निवेश कर ऊंचे रिटर्न कमाने का दावा किया गया था। लिंक पर क्लिक करते ही उसे एक व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ा गया, जिसका नाम “F5 Axis Securities Group” रखा गया था। ग्रुप के एडमिन्स ने खुद को एक प्रतिष्ठित सिक्योरिटीज फर्म का प्रतिनिधि बताते हुए निवेश सलाह देना शुरू किया।
शुरुआत में पीड़ित को छोटे निवेश करने पर अच्छा रिटर्न दिखाया गया, जिससे उसका भरोसा बढ़ गया। इसके बाद आरोपियों ने उसे एक फर्जी वेबसाइट पर रजिस्टर कराया, जिसका डोमेन “asloepxccv.com” बताया गया है। यहां उसे एक डैशबोर्ड दिखाया गया, जिसमें धीरे-धीरे उसका कथित निवेश बढ़कर ₹2.1 करोड़ से अधिक दिखने लगा।
साइबर ठगों ने इस पूरी प्रक्रिया को इस तरह डिजाइन किया था कि पीड़ित को लगे कि उसका निवेश तेजी से बढ़ रहा है। इसी भरोसे के आधार पर उससे बार-बार अलग-अलग खातों में रकम जमा करवाई गई। जब पीड़ित ने ₹50 लाख की निकासी की कोशिश की, तो उसे बताया गया कि पहले उसे “IPO चार्ज”, टैक्स और अन्य प्रोसेसिंग फीस जमा करनी होगी।
इसके बाद जैसे ही पीड़ित ने अतिरिक्त पैसे देने से इनकार किया और शक जताया, पूरा सिस्टम अचानक बंद हो गया। व्हाट्सऐप ग्रुप से उसे हटा दिया गया और वेबसाइट भी निष्क्रिय हो गई। बाद में उसे एहसास हुआ कि वह एक संगठित साइबर फ्रॉड का शिकार हो चुका है।
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जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार इस तरह के निवेश फ्रॉड में ठग पहले सोशल मीडिया और सर्च इंजन पर विज्ञापन चलाकर संभावित निवेशकों को आकर्षित करते हैं। इसके बाद उन्हें व्हाट्सऐप या टेलीग्राम ग्रुप में जोड़कर “ट्रस्ट बिल्डिंग” की जाती है, जहां फर्जी विशेषज्ञ लगातार मुनाफे का भ्रम पैदा करते हैं।
एक साइबर विशेषज्ञ के अनुसार, “ऐसे मामलों में सबसे खतरनाक बात यह होती है कि ठग निवेशक के भरोसे और लालच दोनों का उपयोग करते हैं। शुरुआत में छोटे रिटर्न दिखाकर मानसिक रूप से फंसा लिया जाता है और बाद में बड़ी रकम वसूली जाती है। फर्जी प्लेटफॉर्म इतने वास्तविक दिखते हैं कि अनुभवी लोग भी भ्रमित हो जाते हैं।”
पुलिस के मुताबिक, इस तरह के मामलों में रकम को तुरंत कई बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता है, जिन्हें आमतौर पर म्यूल अकाउंट्स कहा जाता है। इसके बाद यह पैसा तेजी से विभिन्न लेयर में घुमाकर क्रिप्टोकरेंसी या विदेशी चैनलों के जरिए बाहर भेज दिया जाता है, जिससे रिकवरी बेहद मुश्किल हो जाती है।
साइबर सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि ऐसे निवेश घोटालों में सबसे बड़ी चुनौती समय पर शिकायत न करना होता है। यदि पीड़ित तुरंत साइबर हेल्पलाइन या बैंक को सूचना दे दे तो कुछ मामलों में ट्रांजैक्शन को रोका जा सकता है, लेकिन देरी होने पर पूरा पैसा सिस्टम से बाहर चला जाता है।
विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि कोई भी प्लेटफॉर्म जो “गारंटीड 5% से 30% रिटर्न” का दावा करता है, वह लगभग निश्चित रूप से संदिग्ध होता है। निवेश से पहले कंपनी की वैधता, SEBI रजिस्ट्रेशन और आधिकारिक स्रोतों की जांच करना बेहद जरूरी है।
मुंबई की यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि डिजिटल निवेश के बढ़ते अवसरों के साथ-साथ साइबर धोखाधड़ी के तरीके भी लगातार उन्नत हो रहे हैं। ₹86.9 लाख की यह ठगी न केवल आर्थिक नुकसान है, बल्कि यह इस बात का संकेत भी है कि ऑनलाइन निवेश में एक छोटी सी लापरवाही भी भारी नुकसान में बदल सकती है।
