मुक्तसर: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Instagram के जरिए चल रहे ‘डबल मनी’ निवेश जाल का बड़ा खुलासा करते हुए एक साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया गया है। इस मामले में ₹45 लाख से अधिक की धोखाधड़ी सामने आई है, जिसमें मुख्य आरोपी नवदीप कौर उर्फ निशा रानी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि उसके पति रणजीत सिंह और सहयोगी रमणदीप सिंह अब भी फरार हैं।
जांच में सामने आया है कि यह गिरोह सुनियोजित तरीके से सोशल मीडिया पर फर्जी निवेश योजनाएं चलाता था और लोगों को कम समय में पैसा दोगुना या चौगुना करने का लालच देता था। शुरुआती चरण में आरोपियों द्वारा पीड़ितों को छोटी रकम पर मुनाफा देकर विश्वास जीता जाता था, जिसके बाद उन्हें बड़ी रकम निवेश करने के लिए उकसाया जाता था। जैसे ही निवेश की रकम बढ़ती, आरोपी अचानक संपर्क तोड़कर गायब हो जाते थे।
पुलिस की जांच के अनुसार, यह गिरोह खासतौर पर कम पढ़े-लिखे और जल्दी मुनाफा कमाने की चाह रखने वाले लोगों को निशाना बनाता था। ठगी का तरीका बेहद सुनियोजित था, जिसमें इंस्टाग्राम अकाउंट्स के जरिए आकर्षक पोस्ट और मैसेज भेजे जाते थे। इन पोस्ट्स में भारी रिटर्न के दावे किए जाते थे, जिससे लोग आसानी से जाल में फंस जाते थे।
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मामले में एक पीड़िता कुलविंदर कौर से करीब ₹14.92 लाख की ठगी की गई, जिसने अलग-अलग समय पर कई ट्रांजेक्शन किए थे। इसी तरह एक अन्य मामले में मलकीत कौर और रजनी वर्मा समेत कई लोगों से मिलाकर ₹27 लाख से ज्यादा की राशि ठगी गई। दोनों मामलों में एक समान पैटर्न देखने को मिला, जिससे जांच एजेंसियों को गिरोह की कार्यप्रणाली समझने में मदद मिली।
तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल ट्रेल के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई। विभिन्न शिकायतों से मिले डेटा को जोड़कर आरोपियों की लोकेशन और नेटवर्क का पता लगाया गया। इसके बाद मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया गया। उसे अदालत में पेश कर दो दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है, जहां उससे पूछताछ जारी है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इस दौरान और भी अहम खुलासे हो सकते हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि मुख्य आरोपी पहले भी इसी तरह के मामलों में शामिल रही है और उसके खिलाफ अलग-अलग जिलों में कई मामले दर्ज हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और लगातार नए-नए तरीकों से लोगों को ठग रहा था।
साइबर ठगी के इस मामले ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर चल रहे फर्जी निवेश ऑफर्स के खतरे को उजागर किया है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में अपराधी ‘सोशल इंजीनियरिंग’ तकनीक का इस्तेमाल करते हैं, जिसमें लोगों के व्यवहार और लालच का फायदा उठाया जाता है।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह कहते हैं, “साइबर अपराधी पहले छोटे रिटर्न देकर पीड़ित का भरोसा जीतते हैं और फिर उसे बड़े निवेश के लिए तैयार करते हैं। यह पूरी तरह से एक मनोवैज्ञानिक जाल होता है, जिससे बाहर निकलना आम लोगों के लिए मुश्किल हो जाता है।”
प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर मिलने वाले किसी भी निवेश प्रस्ताव पर आंख बंद कर भरोसा न करें। विशेष रूप से ऐसे ऑफर्स जो कम समय में अत्यधिक मुनाफे का दावा करते हैं, उनसे सावधान रहना बेहद जरूरी है।
यह मामला न केवल एक संगठित साइबर गिरोह की सक्रियता को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का गलत इस्तेमाल किस तरह आम लोगों के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। ऐसे में जागरूकता और सतर्कता ही इस तरह की ठगी से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है।
