हापुड़ में समाज कल्याण विभाग की बड़ी कार्रवाई; 2012-13 से 2024-25 तक फर्जी दाखिलों के जरिए छात्रवृत्ति निकालने का आरोप, जांच में कई जिलों और राज्यों के छात्रों के रिकॉर्ड खंगाले गए

50 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति घोटाले के आरोप में मोनाड विश्वविद्यालय ब्लैक लिस्ट, 9% ब्याज के साथ होगी रकम की वसूली

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By Roopa
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नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के हापुड़ स्थित मोनाड विश्वविद्यालय पर कथित छात्रवृत्ति घोटाले को लेकर बड़ी कार्रवाई की गई है। समाज कल्याण विभाग ने विश्वविद्यालय को ब्लैक लिस्ट कर दिया है। आरोप है कि पिछले करीब 13 वर्षों में फर्जी तरीके से 50 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति निकाली गई। विभाग ने अब वित्तीय वर्ष 2012-13 से 2024-25 तक निकाली गई छात्रवृत्ति राशि को नौ प्रतिशत ब्याज के साथ वसूलने की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है।

समाज कल्याण विभाग के निदेशक की ओर से जारी आदेश के बाद मोनाड विश्वविद्यालय के छात्र अब किसी भी सरकारी छात्रवृत्ति योजना के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगे। विभाग की कार्रवाई के बाद विश्वविद्यालय की छात्रवृत्ति प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लग गई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में सामने आए तथ्यों और वित्तीय अनियमितताओं के आधार पर यह कदम उठाया गया है।

मामले की जांच तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी शिवकुमार द्वारा शुरू की गई थी। जांच के दौरान प्रदेश के कई जिलों के साथ-साथ अन्य राज्यों से जुड़े छात्रों के रिकॉर्ड की भी पड़ताल की गई। अधिकारियों ने छात्रों के दाखिले, उनके स्थायी निवास, शैक्षणिक दस्तावेज और विश्वविद्यालय में प्रवेश प्रक्रिया की जांच की। जांच में आरोप सामने आया कि बड़ी संख्या में छात्रों के फर्जी तरीके से दाखिले दिखाकर सरकारी छात्रवृत्ति का लाभ लिया गया।

जांच अधिकारियों के अनुसार, कथित रूप से ऐसे छात्रों के नाम पर छात्रवृत्ति निकाली गई जो या तो निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करते थे या जिनके दस्तावेजों में अनियमितताएं पाई गईं। जांच में करीब 50 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति राशि के दुरुपयोग का अनुमान लगाया गया है। अब संबंधित विभाग इस राशि की वसूली की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है।

मोनाड विश्वविद्यालय पहले भी जांच एजेंसियों के निशाने पर रहा है। पिछले वर्ष फर्जी डिग्री और मार्कशीट बेचने के आरोपों से जुड़े मामले में उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने विश्वविद्यालय परिसर में छापेमारी की थी। इस कार्रवाई के बाद विश्वविद्यालय के संचालक समेत कई लोगों के खिलाफ पिलखुवा कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया था। एसटीएफ ने उस दौरान कई दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच की थी।

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छात्रवृत्ति मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन के निर्देश पर कई विभागों ने अलग-अलग स्तर पर जांच शुरू की थी। प्रवर्तन निदेशालय (ED), उच्च शिक्षा विभाग और समाज कल्याण विभाग समेत कई एजेंसियों ने विश्वविद्यालय से जुड़े रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की जांच की। जांच के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी अभिषेक पांडेय और पुलिस अधीक्षक ज्ञानंजय सिंह ने भी विश्वविद्यालय को ब्लैक लिस्ट करने के लिए शासन को पत्र भेजा था।

अधिकारियों के अनुसार, जांच का उद्देश्य केवल छात्रवृत्ति घोटाले तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्वविद्यालय की प्रवेश प्रक्रिया, दस्तावेजों की सत्यता और कथित फर्जीवाड़े में शामिल लोगों की भूमिका का पता लगाना भी है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित अनियमितताओं में कितने लोग शामिल थे और छात्रवृत्ति राशि का उपयोग किस तरह किया गया।

हालांकि, इस कार्रवाई के बाद विश्वविद्यालय में पढ़ रहे छात्रों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। वर्तमान में मोनाड विश्वविद्यालय में विभिन्न पाठ्यक्रमों में करीब तीन हजार छात्र अध्ययनरत हैं। इसके अलावा नई प्रवेश प्रक्रिया भी जारी है। छात्र संगठनों और अभिभावकों का कहना है कि कार्रवाई का असर उन छात्रों पर नहीं पड़ना चाहिए जो किसी कथित अनियमितता में शामिल नहीं हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में संस्थान के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ छात्रों के हितों की सुरक्षा के लिए भी स्पष्ट व्यवस्था जरूरी है, ताकि वास्तविक विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। प्रशासन अब विश्वविद्यालय की गतिविधियों, छात्रों के रिकॉर्ड और वित्तीय दस्तावेजों की आगे जांच कर रहा है।

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