मोहाली कोर्ट का बड़ा फैसला, ऑस्ट्रेलिया स्टडी वीजा दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी साबित; शिकायतकर्ता को मिलेगा मुआवजा

इमिग्रेशन एजेंट को ₹19 लाख की वीजा ठगी में 3 साल की कठोर कैद, कोर्ट ने लगाया ₹1.02 लाख जुर्माना

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By Roopa
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मोहाली की एक अदालत ने वीजा दिलाने के नाम पर ₹19 लाख की ठगी के मामले में एक इमिग्रेशन एजेंट को दोषी ठहराते हुए तीन साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर ₹1.02 लाख का जुर्माना भी लगाया है, जिसे शिकायतकर्ता को मुआवजे के रूप में दिया जाएगा। यह मामला विदेशी शिक्षा और इमिग्रेशन सेवाओं के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी के एक गंभीर उदाहरण के रूप में सामने आया है।

मामले के अनुसार, शिकायतकर्ता ने नवंबर 2022 में मोहाली स्थित सेक्टर-70 में स्टार फ्यूचर एजुकेशन एंड इमिग्रेशन सर्विसेज से संपर्क किया था। उसने अपनी बेटी के लिए ऑस्ट्रेलिया स्टडी वीजा की प्रक्रिया शुरू करवाई थी। आरोपी एजेंट ने दावा किया था कि वह 90 दिनों के भीतर वीजा उपलब्ध करा देगा और इसी भरोसे पर शिकायतकर्ता से चरणबद्ध तरीके से लगभग ₹19 लाख वसूले गए।

हालांकि तय समय सीमा बीतने के बाद भी वीजा प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। न तो आवेदन सफल हुआ और न ही आरोपी ने पैसे वापस किए। लंबे इंतजार के बाद जब शिकायतकर्ता ने दस्तावेजों की जांच की तो पाया कि जो यूनिवर्सिटी का ऑफर लेटर उसे दिया गया था, वह फर्जी था। इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और एफआईआर दर्ज की गई।

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ने सुनियोजित तरीके से लोगों को विदेश भेजने का झांसा देकर बड़ी रकम वसूली थी। बैंक ट्रांजैक्शन और गवाहों के बयान के आधार पर यह साबित हुआ कि पैसे की डिलीवरी और वादों में स्पष्ट धोखाधड़ी की गई थी।

मोहाली कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य यह साबित करते हैं कि आरोपी ने शिकायतकर्ता को धोखे में रखकर आर्थिक लाभ लिया। अदालत ने यह भी माना कि यह केवल वीजा प्रक्रिया में देरी का मामला नहीं बल्कि स्पष्ट रूप से धोखाधड़ी का अपराध है।

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हालांकि अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि शिकायतकर्ता ने दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच नहीं की थी, लेकिन इसके बावजूद आरोपी की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर किसी भी प्रकार की धनराशि लेना अपराध की श्रेणी में आता है।

सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) और इमिग्रेशन एक्ट के तहत दोषी करार दिया। धारा 420 के तहत तीन साल की कठोर सजा और ₹1 लाख जुर्माना, जबकि इमिग्रेशन एक्ट के तहत एक साल की सजा और ₹2,000 का अतिरिक्त जुर्माना लगाया गया है।

इस फैसले को इमिग्रेशन और एजुकेशन कंसल्टेंसी सेक्टर में एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जहां अक्सर विदेश भेजने के नाम पर धोखाधड़ी के मामले सामने आते रहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में कड़े फैसले भविष्य में ऐसी गतिविधियों पर अंकुश लगाने में मदद कर सकते हैं।

स्थानीय स्तर पर इस फैसले के बाद लोगों में भी जागरूकता बढ़ने की बात कही जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि विदेश शिक्षा और वीजा प्रक्रिया के नाम पर काम करने वाले एजेंटों की बेहतर जांच और निगरानी जरूरी है ताकि आम लोग ठगी का शिकार न बनें।

फिलहाल आरोपी को जेल भेज दिया गया है और मुआवजे की राशि शिकायतकर्ता को दिए जाने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।

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