मिर्जापुर। उत्तर प्रदेश में कर चोरी के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच मिर्जापुर में एक बड़े जीएसटी घोटाले का खुलासा हुआ है। कोयला कारोबार की आड़ में पांच फर्जी फर्म बनाकर करीब ₹36 करोड़ की टैक्स चोरी करने के आरोप में पिता-पुत्र को गिरफ्तार किया गया है। यह मामला फर्जी दस्तावेजों के जरिए कंपनियों का रजिस्ट्रेशन कर व्यवस्थित तरीके से राजस्व को नुकसान पहुंचाने का है, जिसने जांच एजेंसियों को भी चौंका दिया है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान भदोही निवासी कोयला व्यवसायी यज्ञवासिनी सिंह और उनके बेटे स्वतेज सिंह उर्फ राज के रूप में हुई है। दोनों को मिर्जापुर के बथुआ क्षेत्र से पकड़ा गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इन दोनों ने मिलकर पांच अलग-अलग फर्जी फर्म खड़ी कीं, जिनके जरिए बड़े पैमाने पर फर्जी बिलिंग और टैक्स चोरी को अंजाम दिया गया।
मामले की शुरुआत 22 दिसंबर 2025 को दर्ज एक शिकायत से हुई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि ‘बजाज इंटरप्राइजेज’ और ‘बनारस ट्रेडिंग’ नाम की फर्मों के जरिए जीएसटी चोरी की जा रही है। जांच आगे बढ़ने पर यह स्पष्ट हुआ कि यह सिर्फ शुरुआत थी और इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था।
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जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी पिता-पुत्र ने अपने नाम पर दो फर्म रजिस्टर कराईं, जबकि तीन अन्य फर्म दो अलग-अलग व्यक्तियों के नाम पर कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर खड़ी की गईं। इन सभी फर्मों का इस्तेमाल फर्जी लेनदेन दिखाकर टैक्स बचाने और इनपुट टैक्स क्रेडिट का गलत फायदा उठाने के लिए किया जा रहा था।
अधिकारियों के अनुसार, ‘बजाज इंटरप्राइजेज’ के माध्यम से करीब ₹5 करोड़ और ‘बनारस ट्रेडिंग’ के जरिए लगभग ₹6 करोड़ की टैक्स चोरी की गई। इसके अलावा ‘गंगा इंटरप्राइजेज’, ‘सत्यम ट्रेडिंग’ और एक अन्य फर्म के जरिए करीब ₹25 करोड़ का कर नुकसान पहुंचाया गया। इस तरह कुल टैक्स चोरी का आंकड़ा ₹36 करोड़ तक पहुंच गया।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने फर्जी कंपनियों के नाम पर बड़े पैमाने पर बिलिंग दिखाई, जबकि वास्तविक व्यापार सीमित था। कोयला व्यवसाय को एक कवर के रूप में इस्तेमाल किया गया, ताकि फर्जी लेनदेन को वैध दिखाया जा सके। इस पूरे नेटवर्क में बैंक खातों और दस्तावेजों का सुनियोजित इस्तेमाल किया गया, जिससे लंबे समय तक यह गतिविधि पकड़ी नहीं जा सकी।
सूत्रों के अनुसार, आरोपी मिर्जापुर के कटरा क्षेत्र में रहते थे और अहरौरा इलाके में कोयला कारोबार संचालित करते थे। इसी व्यवसाय की आड़ में उन्होंने अपना नेटवर्क खड़ा किया और अलग-अलग स्थानों पर फर्जी फर्मों का संचालन किया।
हालांकि इस मामले में दो अन्य आरोपियों की भूमिका भी सामने आई है, जिनके नाम पर तीन फर्म रजिस्टर कराई गई थीं। फिलहाल ये दोनों फरार हैं और उनकी तलाश में छापेमारी जारी है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इन फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद इस पूरे नेटवर्क के और भी अहम राज खुल सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि जीएसटी प्रणाली में फर्जी फर्मों के जरिए टैक्स चोरी का यह तरीका नया नहीं है, लेकिन इस मामले में जिस स्तर पर संगठित ढंग से काम किया गया, वह चिंताजनक है। ऐसे मामलों में डिजिटल ट्रैकिंग और डेटा एनालिसिस की भूमिका बेहद अहम होती जा रही है।
फिलहाल आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। जांच एजेंसियां अब इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग कौन हैं और कितनी और फर्जी फर्में इस घोटाले का हिस्सा रही हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
