नई दिल्ली। सोशल मीडिया मंचों पर अवैध और संवेदनशील सामग्री के प्रसार को लेकर केंद्र सरकार ने रुख कड़ा कर दिया है। फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा की भूमिका और उसे मिलने वाले कानूनी संरक्षण की समीक्षा किए जाने की चर्चा के बीच बाल यौन शोषण सामग्री को लेकर भी कंपनी की जवाबदेही जांच के दायरे में आ गई है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, मेटा को केवल ‘मध्यस्थ’ मानने के बजाय उसकी भूमिका को ‘सेवा प्रदाता’ के तौर पर देखने पर विचार किया जा रहा है। ऐसा होने पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत मिलने वाले ‘सेफ हार्बर’ संरक्षण पर असर पड़ सकता है।
‘सेफ हार्बर’ के तहत सोशल मीडिया मंचों को उपयोगकर्ताओं की ओर से पोस्ट की गई सामग्री के लिए कुछ परिस्थितियों में सीधे कानूनी जिम्मेदारी से संरक्षण मिलता है। यह संरक्षण इस शर्त से जुड़ा है कि मंच निर्धारित कानूनी और नियामकीय दायित्वों का पालन करे। यदि किसी मंच की भूमिका और गतिविधियों को केवल मध्यस्थता से आगे माना जाता है, तो अवैध सामग्री को लेकर उसकी जवाबदेही बढ़ सकती है। ऐसे में कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का दायरा भी बढ़ने की संभावना होगी। हालांकि, मेटा की कानूनी स्थिति और धारा 79 के तहत संरक्षण पर अंतिम फैसला कानून की व्याख्या और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
सरकार की चिंता का एक प्रमुख आधार सोशल मीडिया मंचों के एल्गोरिदम भी हैं। ये प्रणालियां यह तय करती हैं कि किसी उपयोगकर्ता को कौन-सी सामग्री कितनी बार और किस प्राथमिकता के साथ दिखाई जाए। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, जब किसी कंपनी की तकनीकी प्रणाली सामग्री की पहुंच और दृश्यता को प्रभावित करती है, तो उसकी भूमिका को केवल निष्क्रिय मध्यस्थ के रूप में देखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। खासतौर पर ऐसी सामग्री के मामलों में यह सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है, जिसका प्रसार बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।
इसी कड़ी में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के समक्ष मेटा इंडिया के वरिष्ठ अधिकारियों की एक सप्ताह के भीतर दूसरी पेशी हुई। आयोग बाल यौन शोषण और बच्चों के दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री तथा ऐसे मामलों से संबंधित विज्ञापनों की जांच कर रहा है। पेशी में मेटा इंडिया के प्रमुख भी शामिल हुए। आयोग के समक्ष जवाबदेही दर्ज कराने के बाद बाहर निकलते समय कंपनी के अधिकारियों ने मीडिया के सवालों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
मामले में सूचना साझा करने की प्रक्रिया को लेकर भी महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है। मेटा ने बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री की जानकारी भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों को तत्काल उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता जताई है। इससे पहले ऐसी रिपोर्टिंग अमेरिका स्थित नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन के माध्यम से किए जाने की व्यवस्था थी। भारतीय एजेंसियों तक सूचना पहुंचने में लगने वाले समय को लेकर उठती चिंताओं के बीच सीधे सूचना साझा करने की प्रतिबद्धता को अहम कदम माना जा रहा है।
मेटा की जवाबदेही को लेकर उठ रहे सवाल केवल बाल यौन शोषण सामग्री तक सीमित नहीं हैं। सोशल मीडिया मंचों की सिफारिश प्रणालियों, एल्गोरिदम में संभावित पक्षपात और उपयोगकर्ताओं के व्यवहार पर उनके प्रभाव की भी विभिन्न स्तरों पर जांच हो रही है। इनमें उपयोगकर्ताओं में अत्यधिक ऑनलाइन निर्भरता बढ़ने, मानसिक स्वास्थ्य पर संभावित प्रतिकूल प्रभाव और हानिकारक या संवेदनशील सामग्री को सिफारिश के जरिए अधिक लोगों तक पहुंचाने जैसे मुद्दे शामिल हैं।
वैश्विक स्तर पर भी सोशल मीडिया कंपनियों से उनकी तकनीकी प्रणालियों की जवाबदेही को लेकर सवाल किए जा रहे हैं। भारत में बाल सुरक्षा और डिजिटल मंचों की जिम्मेदारी से जुड़े मामलों में नियामकीय निगरानी बढ़ने के साथ मेटा के मामले में आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल सरकार की ओर से कंपनी का ‘सेफ हार्बर’ संरक्षण औपचारिक रूप से समाप्त किए जाने की अंतिम घोषणा नहीं हुई है। आगे की प्रक्रिया में मेटा की कानूनी स्थिति, सामग्री की निगरानी, एल्गोरिदम की भूमिका और भारतीय एजेंसियों के साथ सूचना साझा करने की व्यवस्था प्रमुख मुद्दे रहेंगे।
