मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ में फर्जी टेलीकॉम एक्सचेंज के जरिए विदेशी कॉल को लोकल कॉल में बदलकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। एंटी टेरर स्क्वाड (ATS) और स्वाट टीम की संयुक्त कार्रवाई में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि मुख्य सरगना अभी फरार है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन, खासकर पाकिस्तान लिंक की भी जांच शुरू कर दी गई है।
पुलिस लाइन में आयोजित प्रेसवार्ता में वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि लिसाड़ी गेट क्षेत्र में संचालित यह फर्जी वीओआईपी नेटवर्क केवल आर्थिक अपराध तक सीमित नहीं था, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी बड़ा खतरा बन सकता था। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क के तार किन-किन देशों और संगठनों से जुड़े हैं।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान लोहियानगर जाकिर कॉलोनी निवासी फरदीन, नाजिम उर्फ फुरकान, फहीम, सुल्तान, शादाब और रहीस के रूप में हुई है। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था और इंटरनेट आधारित कॉलिंग सिस्टम का दुरुपयोग कर रहा था।
जांच में खुलासा हुआ है कि अंतरराष्ट्रीय कॉलिंग की ऊंची दरों से बचने के लिए यह गिरोह तकनीकी जाल बिछाकर विदेशी कॉल को भारत में लोकल कॉल के रूप में परिवर्तित कर देता था। इससे न केवल टेलीकॉम कंपनियों को भारी नुकसान होता था, बल्कि सरकार के राजस्व पर भी बड़ा असर पड़ता था। एक दिन में हजारों कॉल रूट कर गिरोह लाखों रुपये कमा लेता था, जिससे यह अवैध कारोबार करोड़ों रुपये तक पहुंच गया।
पूछताछ के दौरान यह भी सामने आया कि गिरोह पहले अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों को झांसे में लेकर या कमीशन का लालच देकर उनके नाम पर सिम कार्ड जारी कराता था। इन सिम कार्डों को वीओआईपी-जीएसएम गेटवे डिवाइस में लगाया जाता था। विदेश से आने वाली कॉल पहले इंटरनेट के जरिए इस सिस्टम तक पहुंचती, फिर उसे लोकल मोबाइल नंबर में बदल दिया जाता था। कॉल रिसीवर को यह पूरी तरह सामान्य भारतीय कॉल प्रतीत होती थी, जिससे किसी को शक नहीं होता था।
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छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में तकनीकी उपकरण बरामद किए गए हैं। इनमें दो वाई-फाई एयरटेल एक्सट्रीम एयर फाइबर 5G डिवाइस, दो फाइबर राउटर, 32 एक्सटर्नल एंटीना, तीन लैपटॉप, पांच वीओआईपी-जीएसएम गेटवे मशीन, 186 सिम कार्ड और पांच मोबाइल फोन शामिल हैं। इसके अलावा कई केबल, एडॉप्टर और अन्य नेटवर्किंग उपकरण भी जब्त किए गए हैं।
जांच एजेंसियों का मानना है कि इस तरह के फर्जी टेलीकॉम एक्सचेंज का इस्तेमाल सिर्फ आर्थिक लाभ के लिए ही नहीं, बल्कि संदिग्ध गतिविधियों, साइबर अपराध और संभावित आतंकी संचार के लिए भी किया जा सकता है। यही कारण है कि मामले को बेहद संवेदनशील मानते हुए केंद्रीय एजेंसियों को भी इसमें शामिल किया गया है।
फरार सरगना की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है और उसके संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। साथ ही, जब्त किए गए उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कर नेटवर्क के पूरे ढांचे को समझने का प्रयास किया जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह उजागर कर दिया है कि तकनीक के दुरुपयोग से किस तरह बड़े स्तर पर आर्थिक अपराध और सुरक्षा से जुड़े खतरे उत्पन्न हो सकते हैं। आने वाले दिनों में जांच के और भी अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की पूरी तस्वीर सामने आ सकती है।
