पुणे: डिजिटल दौर में नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को निशाना बनाकर साइबर अपराधियों ने एक नया जाल बिछाया है। महाराष्ट्र मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (MahaMetro) के नाम पर फर्जी वेबसाइट और सोशल मीडिया पेज बनाकर बेरोजगारों को ठगने का मामला सामने आया है। इस गंभीर साइबर धोखाधड़ी के खिलाफ संबंधित अधिकारियों ने साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
प्राथमिक जानकारी के अनुसार, अज्ञात आरोपियों ने MahaMetro के नाम और ब्रांडिंग का इस्तेमाल करते हुए एक नकली वेबसाइट तैयार की, जो पहली नजर में पूरी तरह असली वेबसाइट जैसी दिखाई देती है। इतना ही नहीं, इन लोगों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी फर्जी पेज बनाकर नौकरी के विज्ञापन पोस्ट किए, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच बनाई जा सके।
अधिकारियों का कहना है कि इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए बेरोजगार युवाओं को आकर्षक नौकरी के ऑफर दिए जा रहे थे। आवेदन प्रक्रिया के नाम पर उनसे व्यक्तिगत जानकारी, दस्तावेज और कई मामलों में पैसे भी मांगे जाने की आशंका है। इस तरह के मामलों में पीड़ितों को यह विश्वास दिलाया जाता है कि वे एक सरकारी या प्रतिष्ठित संस्था में नौकरी पाने जा रहे हैं, जबकि वास्तव में यह एक सुनियोजित साइबर ठगी का हिस्सा होता है।
जांच में यह भी सामने आया है कि फर्जी वेबसाइट में MahaMetro का लोगो, डिजाइन और कंटेंट इस तरह से कॉपी किया गया था कि आम व्यक्ति के लिए असली और नकली में फर्क कर पाना बेहद मुश्किल हो जाए। यही वजह है कि कई लोग इस जाल में फंस सकते हैं, खासकर वे जो जल्द नौकरी पाने के दबाव में रहते हैं।
MahaMetro ने स्पष्ट किया है कि उसकी सभी आधिकारिक भर्तियां केवल उसकी आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ही की जाती हैं। संस्था ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान वेबसाइट या सोशल मीडिया पोस्ट पर भरोसा न करें और आवेदन करने से पहले स्रोत की पूरी तरह जांच करें। पुणे, नागपुर और ठाणे जैसे शहरों में चल रही मेट्रो परियोजनाओं के लिए भी भर्ती संबंधी जानकारी केवल आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर ही उपलब्ध कराई जाती है।
साइबर पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तकनीकी जांच शुरू कर दी है। फर्जी वेबसाइट और सोशल मीडिया अकाउंट्स के सर्वर, आईपी एड्रेस और डिजिटल ट्रेल की जांच की जा रही है, ताकि आरोपियों की पहचान की जा सके। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस गिरोह का पर्दाफाश किया जा सकता है।
FutureCrime Summit 2026 Calls for Speakers From Government, Industry and Academia
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह कोई एकल घटना नहीं, बल्कि एक बड़े साइबर नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जो अलग-अलग सरकारी और निजी संस्थाओं के नाम का दुरुपयोग कर लोगों को निशाना बनाता है। इस तरह के गिरोह लगातार नई-नई रणनीतियां अपनाते हैं, जिससे उनकी पहचान करना और उन्हें पकड़ना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने इस तरह के मामलों पर चिंता जताते हुए कहा, “आजकल साइबर अपराधी सोशल इंजीनियरिंग का बड़े स्तर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। वे लोगों की जरूरतों—जैसे नौकरी, लोन या सरकारी योजनाओं—को समझकर उसी के आधार पर जाल बिछाते हैं। फर्जी वेबसाइट और कॉल के जरिए लोगों को विश्वास में लेकर उनसे संवेदनशील जानकारी और पैसे हासिल किए जाते हैं। जागरूकता ही इससे बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।”
विशेषज्ञों का कहना है कि नौकरी से जुड़े ऑनलाइन फ्रॉड तेजी से बढ़ रहे हैं, खासकर उन युवाओं के बीच जो डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अवसर तलाशते हैं। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि किसी भी वेबसाइट की URL, डोमेन नाम, और आधिकारिक पुष्टि को ध्यान से जांचा जाए।
यह घटना एक बार फिर यह दिखाती है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भरोसा करने से पहले सावधानी बरतना कितना जरूरी है। जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से पड़ताल कर रही हैं और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही आरोपियों को पकड़ लिया जाएगा।
