छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले से साइबर ठगी का एक और बड़ा मामला सामने आया है, जहां “डबल मुनाफे” का लालच देकर एक युवक से ₹27.26 लाख की ठगी कर ली गई। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि कुछ अन्य की तलाश जारी है। जांच में यह भी सामने आया है कि इस ठगी में “म्यूल अकाउंट” यानी फर्जी बैंक खातों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया।
यह मामला साइबर अपराध के बदलते स्वरूप और संगठित नेटवर्क की ओर इशारा करता है, जहां सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, बैंकिंग चैनल और लोकल सहयोगियों के जरिए ठगी को अंजाम दिया जा रहा है।
टेलीग्राम से शुरू हुआ ठगी का खेल
पीड़ित युवक, जिसकी पहचान राजेश सोनी के रूप में हुई है, को टेलीग्राम ऐप के जरिए संपर्क किया गया। एक युवती ने खुद को निवेश कंपनी से जुड़ा बताते हुए उसे कम समय में दोगुना मुनाफा दिलाने का भरोसा दिलाया।
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शुरुआत में भरोसा जीतने के लिए छोटे-छोटे रिटर्न का लालच दिया गया और फिर धीरे-धीरे बड़ी रकम निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया। झांसे में आकर पीड़ित ने अलग-अलग तारीखों में RTGS, UPI, ATM और डिजिटल वॉलेट जैसे माध्यमों से कुल ₹27,26,614 विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए।
जब लंबे समय तक कोई रिटर्न नहीं मिला और संपर्क टूट गया, तब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ और उसने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई।
म्यूल अकाउंट से हुआ पैसे का लेनदेन
जांच के दौरान पुलिस को एक ऐसे बैंक खाते का सुराग मिला, जिसमें ठगी की रकम का हिस्सा ट्रांसफर किया गया था। यह खाता एक स्मॉल फाइनेंस बैंक में संचालित पाया गया।
पूछताछ में आरोपी ने खुलासा किया कि उसने अपने साथी के कहने पर यह खाता खुलवाया था, जिसका इस्तेमाल केवल ठगी के पैसे को रिसीव करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था। ऐसे खातों को “म्यूल अकाउंट” कहा जाता है, जहां खाताधारक कमीशन के बदले अपना अकाउंट इस्तेमाल करने देते हैं।
औरंगाबाद से गिरफ्तारी, नेटवर्क का खुलासा
पुलिस टीम जांच के आधार पर महाराष्ट्र के औरंगाबाद पहुंची, जहां से आवेज मसूद शेख और उसके साथी अब्दुल वाहिद को गिरफ्तार किया गया। दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
पूछताछ में यह भी सामने आया कि इस नेटवर्क में कई अन्य लोग भी शामिल हैं, जो अलग-अलग राज्यों में बैठकर इस तरह की ठगी को अंजाम दे रहे हैं। एक अन्य आरोपी फिलहाल फरार है, जिसकी तलाश जारी है।
बैंक कर्मचारी और दुकानदार भी शामिल
इसी जिले में एक अन्य संबंधित मामले में म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर ठगी करने वाले गिरोह का भी पर्दाफाश हुआ है। इस मामले में एक बैंक कर्मचारी और एक दुकानदार सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
जांच में पाया गया कि 2023 और 2024 के दौरान छह बैंक खातों में करीब ₹20.40 लाख की ठगी की रकम जमा की गई थी। ये खाते फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खोले गए थे और इनका इस्तेमाल केवल अवैध लेनदेन के लिए किया जा रहा था।
कैसे काम करता है म्यूल अकाउंट नेटवर्क
साइबर ठग आमतौर पर ऐसे लोगों को निशाना बनाते हैं, जिन्हें पैसों की जरूरत होती है। उन्हें कमीशन का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाए जाते हैं। इसके बाद इन खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को ट्रांसफर करने और ट्रैकिंग से बचने के लिए किया जाता है।
इस प्रक्रिया में असली मास्टरमाइंड अक्सर सामने नहीं आते, जबकि छोटे स्तर के लोग पकड़े जाते हैं।
सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव
साइबर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया या मैसेजिंग ऐप्स पर मिलने वाले निवेश प्रस्तावों से सावधान रहें। किसी भी अनजान व्यक्ति या कंपनी के कहने पर पैसा ट्रांसफर न करें, चाहे ऑफर कितना भी आकर्षक क्यों न हो।
यदि कोई निवेश योजना “गारंटीड” या “डबल मुनाफा” देने का दावा करती है, तो उसे तुरंत संदेह की नजर से देखें। साथ ही किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत साइबर हेल्पलाइन या पुलिस को दें।
निष्कर्ष: लालच और लापरवाही का खतरनाक मेल
जांजगीर-चांपा का यह मामला साफ दिखाता है कि साइबर अपराधी अब तकनीक के साथ-साथ लोगों की मानसिकता का भी फायदा उठा रहे हैं। “डबल मुनाफा” जैसे लालच और म्यूल अकाउंट जैसे नेटवर्क मिलकर ठगी को आसान बना रहे हैं।
ऐसे में जरूरी है कि लोग जागरूक रहें और किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले पूरी जांच-पड़ताल करें, क्योंकि एक छोटी सी गलती बड़ी आर्थिक नुकसान में बदल सकती है।
