रायबरेली में सऊदी अरब में नौकरी दिलाने का झांसा देकर युवक से ₹2.70 लाख और पासपोर्ट लेने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है।

फर्जी रसीदों से करोड़ों की संपत्ति हड़पने की कोशिश? लुधियाना में हरिद्वार निवासी पर जालसाजी का केस दर्ज

Team The420
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लुधियाना: पंजाब के लुधियाना में आवासीय संपत्ति के स्वामित्व हस्तांतरण के लिए कथित तौर पर फर्जी भुगतान रसीदें और अन्य जाली दस्तावेज इस्तेमाल करने का मामला सामने आया है। ग्रेटर लुधियाना एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GLADA) की शिकायत पर हरिद्वार निवासी रवींद्र कुमार कद्द के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल समेत विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है और आरोपी की तलाश जारी है।

पुलिस के अनुसार मामला मोती नगर थाने में GLADA के एस्टेट अधिकारी की शिकायत पर दर्ज किया गया। आरोपी रवींद्र कुमार कद्द पर भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 465 (जालसाजी), 467 (मूल्यवान सुरक्षा संबंधी दस्तावेजों की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी) और 471 (फर्जी दस्तावेज को असली बताकर उपयोग करना) के तहत केस दर्ज किया गया है।

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शिकायत के अनुसार, रवींद्र कुमार कद्द को 31 मार्च 1998 को सेक्टर-40 स्थित स्कीम-99 के तहत मकान संख्या 905 आवंटित किया गया था। आवंटन प्रक्रिया पूरी करने के लिए उन्होंने अक्टूबर 1997 में ₹60,000, मई 1998 में ₹85,815 और उसी महीने बाद में ₹4.26 लाख जमा करने का दावा करते हुए भुगतान रसीदें प्रस्तुत की थीं। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर आगे की औपचारिकताएं पूरी की गईं।

हाल ही में GLADA के लेखा शाखा द्वारा रिकॉर्ड की नियमित जांच के दौरान इन भुगतानों का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं मिला। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी द्वारा प्रस्तुत रसीदों में से एक का नंबर वास्तव में किसी अन्य संपत्ति लेनदेन से संबंधित था। इससे अधिकारियों को संदेह हुआ कि कथित रूप से फर्जी रसीदों का इस्तेमाल कर ‘नो ड्यू सर्टिफिकेट’ प्राप्त किया गया और बाद में उसी आधार पर संपत्ति के स्वामित्व हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी कराई गई।

प्रारंभिक जांच में अन्य दस्तावेजों में भी कथित विसंगतियां पाई गईं। GLADA का कहना है कि वर्ष 1997 में जमा किए गए मूल आवेदन पत्र पर मौजूद हस्ताक्षर वर्ष 2021 में निष्पादित कन्वेयंस डीड पर किए गए हस्ताक्षरों से मेल नहीं खाते। इस अंतर ने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया, जिसके बाद विस्तृत जांच कर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।

अधिकारियों का मानना है कि यदि दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच में जालसाजी की पुष्टि होती है तो मामले में और गंभीर धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस कथित फर्जीवाड़े में अन्य व्यक्तियों या बिचौलियों की भी भूमिका रही है। पुलिस संपत्ति हस्तांतरण से जुड़े सभी रिकॉर्ड, भुगतान दस्तावेज, बैंकिंग विवरण और संबंधित फाइलों की जांच कर रही है।

संपत्ति संबंधी मामलों में फर्जी दस्तावेजों के जरिए स्वामित्व बदलवाने के प्रयास लगातार चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी अभिलेखों का नियमित ऑडिट, डिजिटल रिकॉर्ड का सत्यापन और दस्तावेजों की बहु-स्तरीय जांच ऐसे मामलों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। आधुनिक डिजिटल सत्यापन प्रणाली अपनाने से जाली रसीदों और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर संपत्ति हस्तांतरण की संभावनाएं काफी हद तक कम की जा सकती हैं।

फिलहाल पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी है और मामले से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित फर्जी रसीदें कैसे तैयार की गईं, उनका इस्तेमाल किस प्रक्रिया के तहत किया गया और क्या इस पूरे प्रकरण में किसी अन्य व्यक्ति की मिलीभगत थी। जांच पूरी होने के बाद पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी।

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