लुधियाना: लुधियाना ग्रामीण पुलिस ने एक पूर्व बैंक मैनेजर के खिलाफ ₹3.90 करोड़ की धोखाधड़ी के मामले में केस दर्ज किया है। यह मामला केंद्र सरकार की प्रमुख ऋण योजना प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है, जिसमें आंतरिक ऑडिट के दौरान बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं सामने आईं।
आरोपी की पहचान पंकज के रूप में हुई है, जो हरियाणा के जींद का निवासी बताया जा रहा है। वह पहले लुधियाना जिले के बद्दोवाल गांव स्थित इंडियन ओवरसीज बैंक शाखा में ब्रांच मैनेजर के पद पर तैनात था। यह मामला बैंक के सीनियर रीजनल मैनेजर उमा कंता समाल की शिकायत के बाद दर्ज किया गया।
शिकायत के अनुसार, यह पूरा घोटाला बैंक के नियमित आंतरिक ऑडिट के दौरान सामने आया, जिसमें PM Mudra Yojana के तहत संदिग्ध लोन लेन-देन पाए गए। यह योजना छोटे और सूक्ष्म उद्यमियों को बिना गारंटी ऋण उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई है।
जांच में पाया गया कि कुल 22 लोन ऐसे थे, जिनके लिए न तो कोई वैध दस्तावेज मौजूद थे और न ही सही वेरिफिकेशन प्रक्रिया अपनाई गई थी। ये सभी लोन कथित रूप से फर्जी तरीके से सिस्टम में एंट्री कर मंजूर किए गए थे।
FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पंकज ने अपने दो सहयोगियों—अर्चना गुप्ता (असिस्टेंट मैनेजर) और करमजीत सिंह (क्लर्क)—के लॉगिन आईडी का गलत इस्तेमाल कर सिस्टम में फर्जी लोन एंट्री की और उन्हें अप्रूव किया। इसके बाद इन लोन की राशि को अपने निजी बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिया गया।
बैंक अधिकारियों के अनुसार, पूरी प्रक्रिया बैंकिंग नियमों का गंभीर उल्लंघन थी, जिसमें KYC नियमों, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और लोन अप्रूवल प्रक्रिया को पूरी तरह दरकिनार किया गया।
आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट में सामने आया कि जिन व्यक्तियों के नाम पर लोन दिखाए गए थे, वे वास्तव में अस्तित्व में ही नहीं थे। इससे यह संदेह और मजबूत हुआ कि यह पूरा सिस्टमेटिक फ्रॉड था।
जांच अधिकारियों ने बताया कि आरोपी को अपने पद के कारण बैंकिंग सिस्टम तक व्यापक पहुंच प्राप्त थी, जिसका कथित रूप से उसने गलत फायदा उठाया। उसने सुरक्षा व्यवस्था को दरकिनार कर फर्जीवाड़ा किया।
FIR में यह भी उल्लेख है कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने कथित रूप से अपराध स्वीकार किया, हालांकि पुलिस इसकी स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है। अब डिजिटल रिकॉर्ड, लॉगिन हिस्ट्री और ट्रांजैक्शन डिटेल्स की गहन जांच की जा रही है।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस रकम को किन-किन खातों में ट्रांसफर किया गया और क्या इसमें कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि जांच के दौरान और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
बैंक प्रबंधन ने भी इस मामले में आंतरिक जांच शुरू कर दी है और सिस्टम में सुधार तथा निगरानी तंत्र को मजबूत करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। साथ ही रिकवरी और अनुशासनात्मक कार्रवाई पर भी विचार किया जा रहा है।
PM Mudra Yojana को छोटे कारोबारियों को आर्थिक सहायता देने के लिए शुरू किया गया था, लेकिन इस मामले ने बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा और सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस ने कहा है कि जांच शुरुआती चरण में है और वित्तीय लेन-देन की पूरी ट्रेल का विश्लेषण किया जा रहा है, जिससे आगे और महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है।
