तिरुवनंतपुरम में किराये के कार्यालय से संचालित हो रहा था फर्जी लोन कॉल सेंटर; 41 कंप्यूटर, दो लैपटॉप जब्त, अमेरिकी नागरिकों का डेटा चुराकर देते थे धमकी

लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का हाईटेक नेटवर्क बेनकाब, VoIP तकनीक से अमेरिकी नागरिकों को बनाया जाता था निशाना

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By Roopa
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लखनऊ: लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे अत्याधुनिक तकनीकी नेटवर्क का खुलासा किया है। फर्जी कॉल सेंटरों पर हाल ही में की गई कार्रवाई के दौरान जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच में सामने आया कि आरोपी पारंपरिक अंतरराष्ट्रीय टेलीफोन नेटवर्क के बजाय वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (VoIP) तकनीक का इस्तेमाल कर मुख्य रूप से अमेरिका के नागरिकों को निशाना बना रहे थे। पुलिस का कहना है कि इंटरनेट आधारित इस तकनीक ने आरोपियों को कम लागत में बड़े पैमाने पर विदेशी नागरिकों से संपर्क करने और अपनी पहचान छिपाने में मदद की।

यह खुलासा 1 और 18 जुलाई 2026 को क्राइम ब्रांच द्वारा दो संगठित साइबर ठगी गिरोहों के खिलाफ चलाए गए अभियान के बाद हुई जांच में सामने आया। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने बड़ी संख्या में कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन, नेटवर्किंग उपकरण और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद किए थे, जिनका कथित तौर पर साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था।

बरामदगी के आधार पर लखनऊ के साइबर क्राइम थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और दूरसंचार अधिनियम, 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए। इसके बाद जब्त उपकरणों की वैज्ञानिक और डिजिटल फोरेंसिक जांच शुरू की गई।

जांच में सामने आया कि गिरोह पारंपरिक पब्लिक स्विच्ड टेलीफोन नेटवर्क (PSTN) या सामान्य अंतरराष्ट्रीय कॉलिंग सिस्टम का उपयोग नहीं करता था। इसके बजाय आरोपी VoIP तकनीक के जरिए इंटरनेट पर आधारित वॉयस कॉल करते थे, जिससे वे विदेशी नंबरों पर आसानी से संपर्क स्थापित कर लेते थे। इस तकनीक के कारण कॉलिंग की लागत बेहद कम हो जाती थी और पारंपरिक दूरसंचार रिकॉर्ड के माध्यम से कॉल की ट्रैकिंग भी काफी कठिन हो जाती थी।

प्रारंभिक जांच के अनुसार, गिरोह ने इंटरनेट पर आसानी से उपलब्ध और बेहद कम लागत वाले सॉफ्टवेयर तथा डिजिटल टूल्स का उपयोग कर अपना पूरा कॉलिंग नेटवर्क तैयार किया था। इन्हीं तकनीकी संसाधनों की मदद से आरोपी कथित तौर पर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी को अंजाम देने में सफल रहे।

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पुलिस ने बताया कि जब्त किए गए सभी डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच अभी भी जारी है। जांच एजेंसियां पूरे डिजिटल संचार नेटवर्क का पुनर्निर्माण कर रही हैं, इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर की पहचान की जा रही है, प्रत्येक आरोपी की भूमिका का विश्लेषण किया जा रहा है और इस रैकेट से जुड़े संदिग्ध विदेशी हैंडलरों के खिलाफ डिजिटल साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं।

जांच के तहत यह भी पता लगाया जा रहा है कि इंटरनेट सेवाएं किन माध्यमों से प्राप्त की गईं, कॉलिंग सिस्टम किस प्रकार संचालित किया गया और क्या इस नेटवर्क का संबंध अन्य अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध गिरोहों से भी था। पुलिस विभिन्न डिजिटल लॉग, नेटवर्क रिकॉर्ड और ऑनलाइन गतिविधियों का विश्लेषण कर रही है।

प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि VoIP आधारित कॉलिंग आज अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधियों का एक प्रमुख हथियार बन चुकी है। उनके अनुसार, ऐसे गिरोह तकनीकी प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर अपनी वास्तविक पहचान छिपाते हैं और विदेशी नागरिकों को सरकारी एजेंसी, बैंक या तकनीकी सहायता प्रतिनिधि बनकर ठगी का शिकार बनाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में डिजिटल फोरेंसिक, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और तकनीकी खुफिया जानकारी जांच की सफलता के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है।

लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने बताया कि मामले की जांच के लिए दूरसंचार सेवा प्रदाताओं और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ भी समन्वय किया जा रहा है ताकि आवश्यक तकनीकी जानकारी प्राप्त कर पूरे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके। पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां तथा अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

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