लखनऊ कथित आतंकी साजिश मामले में गिरफ्तार संदिग्धों के मोबाइल फोन और डिजिटल डेटा की फॉरेंसिक जांच के आधार पर ATS नेटवर्क और फंडिंग लिंक खंगाल रही है।

मोबाइल में छिपा ‘मौत का ब्लूप्रिंट’: लखनऊ में आतंकी साजिश का बड़ा खुलासा, रिमांड में खुलेंगे कई राज

Team The420
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लखनऊ: राजधानी में पकड़े गए संदिग्ध आतंकियों के मोबाइल फोन से मिले डिजिटल सबूतों ने एक बड़े आतंकी नेटवर्क की परतें खोल दी हैं। जांच के दौरान बरामद ऑडियो क्लिप्स और डेटा से खुलासा हुआ है कि आरोपियों को न सिर्फ बड़े हमले की जिम्मेदारी दी गई थी, बल्कि वारदात के बाद उसके वीडियो बनाकर विदेशी हैंडलर्स को भेजने के निर्देश भी दिए गए थे। इस खुलासे ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है और मामले को बेहद गंभीर माना जा रहा है।

जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी साकिब को सोशल मीडिया और कॉल के जरिए लगातार निर्देश मिल रहे थे। ऑडियो रिकॉर्डिंग में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि किन स्थानों की रेकी करनी है, किस समय हमला करना है और किस तरह से भीड़भाड़ वाले इलाकों को निशाना बनाना है। सूत्रों के अनुसार, ये निर्देश बेहद सुनियोजित तरीके से दिए गए थे, जिससे किसी बड़े नुकसान की साजिश का अंदेशा जताया जा रहा है।

लखनऊ को बनाया गया था पहला टारगेट

जांच एजेंसियों को मिले इनपुट के मुताबिक, साजिश का पहला बड़ा निशाना लखनऊ था। ऑडियो क्लिप्स में संकेत मिले हैं कि भीड़भाड़ वाले इलाकों, खासकर रेलवे स्टेशन और सार्वजनिक स्थलों को प्राथमिक टारगेट बनाया गया था। आरोपियों ने कई बार शहर का दौरा कर संभावित स्थानों की रेकी भी की थी।

बताया जा रहा है कि शाम के समय जब भीड़ सबसे ज्यादा होती है, उसी दौरान हमले की योजना बनाई गई थी। इसके बाद अन्य शहरों—अलीगढ़, गाजियाबाद और कुछ धार्मिक स्थलों—को भी निशाने पर रखा गया था। इस तरह यह साफ हो गया है कि साजिश सिर्फ एक शहर तक सीमित नहीं थी, बल्कि पूरे प्रदेश में दहशत फैलाने की योजना थी।

‘नरसंहार के वीडियो’ भेजने के निर्देश

सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि हमले के बाद की स्थिति को रिकॉर्ड करने के भी निर्देश दिए गए थे। ऑडियो क्लिप्स में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि विस्फोट या हमले के बाद जो अफरा-तफरी और नुकसान होगा, उसके वीडियो बनाकर विदेशी हैंडलर्स को भेजे जाएं।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह तरीका आतंकी संगठनों द्वारा अपने नेटवर्क को मजबूत करने और भय का माहौल बनाने के लिए अपनाया जाता है। इससे न सिर्फ प्रचार मिलता है, बल्कि नए लोगों को भी जोड़ने में मदद मिलती है।

फंडिंग का भी खुला नेटवर्क

जांच में यह भी सामने आया है कि साकिब ने अपने खातों के अलावा अपने करीबियों और अन्य सहयोगियों के खातों में भी पैसे मंगवाए थे। एजेंसियां अब इन सभी बैंक खातों की जांच कर रही हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि अब तक कितनी रकम इस नेटवर्क को भेजी गई है।

सूत्रों के मुताबिक, जिन लोगों के खातों में संदिग्ध लेनदेन पाया जाएगा, उन सभी पर कार्रवाई की जाएगी। इससे यह भी स्पष्ट होगा कि इस नेटवर्क में कितने लोग सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे।

डिजिटल सबूत बने जांच की रीढ़

मोबाइल फोन से मिले ऑडियो क्लिप्स, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल डेटा अब जांच का सबसे अहम आधार बन चुके हैं। इन सबूतों को तकनीकी जांच के लिए लैब भेजा गया है, जहां उनकी गहराई से पड़ताल की जा रही है।

जांच एजेंसियों का मानना है कि इन डिजिटल सुरागों के जरिए पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा सकती हैं और विदेश में बैठे हैंडलर्स तक पहुंच बनाई जा सकती है।

रिमांड से खुल सकते हैं बड़े राज

मामले में गिरफ्तार आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि रिमांड के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं, जैसे कि नेटवर्क में शामिल अन्य सदस्य कौन हैं, किन-किन शहरों में साजिश रची गई और अब तक कितनी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं।

सुरक्षा व्यवस्था पर बढ़ी सतर्कता

इस खुलासे के बाद राजधानी समेत पूरे प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ा दी गई है और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।

गंभीर चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा मामला

यह मामला सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चेतावनी के रूप में सामने आया है। जिस तरह से डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर साजिश रची गई, वह भविष्य में और भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

फिलहाल जांच जारी है और उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और बड़े खुलासे हो सकते हैं

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