लखनऊ में नैनीताल बैंक की ऑडिट में फर्जी मालिकों और जाली दस्तावेजों के आधार पर ₹1.56 करोड़ के कथित लोन घोटाले का खुलासा हुआ है।

फर्जी मालिक, फर्जी दस्तावेज… ₹1.56 करोड़ का लोन घोटाला उजागर: नैनीताल बैंक की ऑडिट में सामने आया संगठित फर्जीवाड़ा

Team The420
4 Min Read

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में नैनीताल बैंक की गोमती नगर स्थित शाखा में ₹1.56 करोड़ के कथित लोन घोटाले का मामला सामने आया है। बैंक की आंतरिक ऑडिट में खुलासा हुआ कि फर्जी मालिकों और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर आठ हाउसिंग लोन और एक कैश क्रेडिट सुविधा स्वीकृत करवा ली गई। मामले में बैंक ने सभी नौ ऋण खातों को धोखाधड़ी (फ्रॉड) घोषित करते हुए गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) की श्रेणी में डाल दिया है तथा गोमती नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है।

बैंक की जांच के अनुसार जनवरी से मई 2025 के बीच कई संपत्तियों के वास्तविक मालिकों की जगह अन्य व्यक्तियों ने स्वयं को मालिक बताकर ऋण के लिए आवेदन किया। आरोप है कि फर्जी पहचान, जाली स्वामित्व संबंधी दस्तावेज और अन्य कूटरचित अभिलेखों के आधार पर ऋण स्वीकृत कराए गए। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि जिन संपत्तियों को बैंक के पक्ष में गिरवी (मॉर्गेज) दिखाया गया था, उनमें से कई मामलों में गिरवीकरण की प्रक्रिया वैध नहीं थी।

Only 10 Days Remain: Register Now for FutureCrime Summit 2026 at Bharat Mandapam

आंतरिक ऑडिट के दौरान बैंक को लीगल रिपोर्ट और संपत्तियों की वैल्यूएशन रिपोर्ट में भी गंभीर अनियमितताएं मिलीं। कई मामलों में संपत्ति के स्वामित्व, पते और संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन संतोषजनक ढंग से नहीं किया गया। इसके बावजूद ऋण स्वीकृत हो गए। जांच में यह भी पाया गया कि बैंक के पक्ष में तैयार किए गए कुछ मॉर्गेज दस्तावेज कानूनी मानकों पर खरे नहीं उतरते, जिससे पूरे ऋण स्वीकृति तंत्र पर सवाल खड़े हो गए हैं।

बैंक की जांच में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है कि कुछ आरोपी अलग-अलग ऋण मामलों में गवाह के रूप में भी शामिल थे। इससे आशंका जताई जा रही है कि यह कोई अलग-अलग घटनाएं नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से संचालित संगठित गिरोह का काम हो सकता है। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस कथित फर्जीवाड़े में केवल बाहरी लोग शामिल थे या बैंकिंग प्रक्रिया से जुड़े अन्य व्यक्तियों की भी किसी स्तर पर भूमिका रही है।

मामले के सामने आने के बाद बैंक ने सभी नौ ऋण खातों को फ्रॉड घोषित करते हुए उन्हें एनपीए की श्रेणी में वर्गीकृत कर दिया है। साथ ही पूरे प्रकरण की जानकारी संबंधित एजेंसियों को भी उपलब्ध कराई गई है। पुलिस प्राथमिकी के आधार पर दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड, ऋण फाइलों और संबंधित वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है। अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि फर्जी दस्तावेज किस प्रकार तैयार किए गए, उनकी जांच प्रक्रिया कैसे पार हुई और धोखाधड़ी में किन-किन लोगों की भूमिका रही।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों से जुड़े ऐसे मामलों में फर्जी पहचान, जाली संपत्ति दस्तावेज और संगठित नेटवर्क का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। उनके अनुसार डिजिटल दस्तावेज सत्यापन, लाभार्थियों की गहन केवाईसी जांच, संपत्ति रिकॉर्ड का ऑनलाइन मिलान और वित्तीय लेनदेन की वैज्ञानिक जांच से ऐसे नेटवर्क का पर्दाफाश करने में महत्वपूर्ण मदद मिलती है।

फिलहाल पुलिस बैंक द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और ऑडिट रिपोर्ट का परीक्षण कर रही है। जांच के दौरान संबंधित संपत्तियों के वास्तविक मालिकों, दस्तावेज तैयार करने वालों, गवाहों तथा ऋण स्वीकृति प्रक्रिया में शामिल अन्य व्यक्तियों से भी पूछताछ की जा सकती है। यदि जांच में किसी बड़े गिरोह या अतिरिक्त आरोपियों की संलिप्तता सामने आती है तो मामले का दायरा और बढ़ाया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि सभी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

हमसे जुड़ें

Share This Article