लखनऊ: राजधानी लखनऊ में एक शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने के उद्देश्य से खरीदी गई जमीन से जुड़े कथित ₹5.67 करोड़ के भूमि धोखाधड़ी मामले में पुलिस ने दो लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। आरोप है कि दोनों ने एक चैरिटेबल ट्रस्ट को ऐसी 14 भूमि के प्लॉट बेच दिए, जो पहले से बैंक में गिरवी रखे गए थे और जिनके पूर्व में किसी अन्य व्यक्ति को बेचे जाने का भी दावा सामने आया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और दस्तावेजों की वैधानिकता के साथ वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल की जा रही है।
पुलिस के अनुसार, यह मामला कैरियर कॉन्वेंट एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के ट्रस्टी मोहम्मद इकबाल की शिकायत पर दर्ज किया गया। शिकायत में कहा गया कि ट्रस्ट शिक्षा के क्षेत्र में स्कूल और कॉलेज स्थापित करने के लिए उपयुक्त भूमि की तलाश कर रहा था। इसी दौरान भोला नाथ शुक्ला और विनय कुमार शुक्ला ने स्वयं को त्रिपुरारी शेल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड का निदेशक बताते हुए बख्शी का तालाब क्षेत्र के महोना स्थित 14 प्लॉट ट्रस्ट को बेचने का प्रस्ताव दिया।
शिकायत के मुताबिक, दोनों आरोपियों ने संबंधित भूमि का सौदा ₹5.67 करोड़ में किया। आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्लॉटों का पंजीकरण भी ट्रस्ट के नाम पर करा दिया गया। ट्रस्ट को विश्वास था कि भूमि विवादमुक्त है और उस पर शैक्षणिक संस्थान का निर्माण किया जा सकता है। इसी आधार पर निर्माण कार्य शुरू करने की तैयारी की गई।
मामले का खुलासा उस समय हुआ जब 1 मई को प्रस्तावित स्कूल एवं कॉलेज के निर्माण का कार्य शुरू किया गया। शिकायत के अनुसार, निर्माण स्थल पर पहुंचे एक बैंक अधिकारी ने ट्रस्ट के प्रतिनिधियों को बताया कि संबंधित भूमि बैंक ऋण के बदले पहले से गिरवी रखी गई है। अधिकारी ने यह भी चेतावनी दी कि ऋण का भुगतान न होने की स्थिति में बैंक भूमि पर कब्जे की कार्रवाई कर सकता है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि बैंक अधिकारी से जानकारी मिलने के बाद जब दस्तावेजों की दोबारा जांच कराई गई तो यह भी पता चला कि उक्त भूमि वर्ष 1985 में मोहित सेठी नामक व्यक्ति को पहले ही बेची जा चुकी थी। इस जानकारी के बाद ट्रस्ट को संदेह हुआ कि उसे फर्जी या विवादित दस्तावेजों के आधार पर जमीन बेची गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जब ट्रस्ट ने इस संबंध में आरोपियों से आपत्ति जताई और स्पष्टीकरण मांगा, तब उन्हें कथित रूप से धमकियां भी दी गईं।
मामले की शिकायत पर पुलिस ने प्रारंभिक जांच की। जांच में प्रथम दृष्टया आरोपों में तथ्य मिलने के बाद चौक थाने में दोनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और अन्य संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस अब बिक्री विलेख, स्वामित्व संबंधी रिकॉर्ड, बैंक के बंधक दस्तावेज, राजस्व अभिलेख तथा अन्य कानूनी कागजात का परीक्षण कर रही है ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि भूमि का वास्तविक स्वामित्व किसके पास था और किन परिस्थितियों में उसका पंजीकरण ट्रस्ट के नाम किया गया।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि क्या इस कथित धोखाधड़ी में अन्य व्यक्ति, कंपनी या बिचौलियों की भी भूमिका रही है। यदि जांच के दौरान अतिरिक्त साक्ष्य सामने आते हैं तो मामले में अन्य आरोपियों के नाम भी जोड़े जा सकते हैं। पुलिस वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भुगतान की गई राशि किन खातों में गई और उसका आगे किस प्रकार उपयोग किया गया।
भूमि से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों में विशेषज्ञों का मानना है कि संपत्ति खरीदने से पहले स्वामित्व, बंधक स्थिति, पूर्व बिक्री, राजस्व रिकॉर्ड और बैंकिंग दावों का स्वतंत्र सत्यापन बेहद आवश्यक है। ऐसे मामलों में एक ही संपत्ति को कई पक्षों को बेचने, गिरवी रखी संपत्ति का खुलासा न करने या विवादित दस्तावेजों के आधार पर सौदा करने जैसी अनियमितताएं सामने आती रही हैं। फिलहाल पुलिस ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
