शिव शक्ति मेडिकल समेत पांच फर्मों पर कार्रवाई; संदिग्ध दवाओं की बिक्री, फर्जी इनवॉइस और जीएसटी रिकॉर्ड में गड़बड़ी के आरोप, डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी

नकली दवा कारोबार का खुलासा: रद्द लाइसेंस से फर्जी बिलिंग, पांच लोगों पर एफआईआर

Roopa
By Roopa
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लखनऊ (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में नकली दवाओं की बिक्री, फर्जी बिल तैयार करने और रद्द हो चुके औषधि लाइसेंस के कथित दुरुपयोग के मामले में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने बड़ी कार्रवाई की है। औषधि निरीक्षक की तहरीर पर कैसरबाग थाने में पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। जांच में आरोप है कि नामी कंपनियों के ब्रांड नाम से संदिग्ध दवाओं की बिक्री की गई और फर्जी इनवॉइस के माध्यम से सप्लाई को वैध दिखाने का प्रयास किया गया। पुलिस और एफएसडीए अब पूरे नेटवर्क, वित्तीय लेनदेन और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं।

एफआईआर में शिव शक्ति मेडिकल के संचालक कपिल जायसवाल को मुख्य आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा मीत एंटरप्राइजेज के हरमीत सिंह, विद्या फार्म के प्रियांशु पाल, आरएन फार्मा के साहिल जैदी और आबिद अली अतहर को भी आरोपी बनाया गया है। औषधि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इन लोगों की भूमिका संदिग्ध दवाओं की खरीद-बिक्री, फर्जी बिलिंग और लाइसेंस संबंधी अनियमितताओं में सामने आई है। जांच एजेंसियां अब आरोपियों के आपसी संपर्क और दवा आपूर्ति श्रृंखला की पड़ताल कर रही हैं।

मामले की शुरुआत उस समय हुई जब जाइडस हेल्थकेयर लिमिटेड की ओर से शिव शक्ति मेडिकल से संदिग्ध दवाओं की आपूर्ति किए जाने की शिकायत की गई। शिकायत के आधार पर औषधि विभाग ने जांच शुरू की। जांच के दौरान 10 सितंबर 2025 को संबंधित मेडिकल स्टोर बंद मिला था। अधिकारियों के अनुसार, गंभीर अनियमितताएं पाए जाने के बाद 5 जनवरी 2026 को शिव शक्ति मेडिकल का औषधि विक्रय लाइसेंस निरस्त कर दिया गया था।

जांच में आरोप है कि लाइसेंस रद्द होने के बाद भी फर्म के नाम का इस्तेमाल कर दवाओं की खरीद और बिक्री जारी रही। जुलाई में गाजियाबाद की एक दवा फर्म से ग्लेनमार्क कंपनी के टेल्मा-एम और टेल्मा-एच ब्रांड की संदिग्ध दवाएं बरामद हुई थीं। जांच में इन दवाओं की बिक्री शिव शक्ति मेडिकल के नाम से जारी कथित फर्जी इनवॉइस के जरिए किए जाने के संकेत मिले। अधिकारियों का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में फर्जी दस्तावेजों और पुराने लाइसेंस विवरण का उपयोग किया गया।

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एफएसडीए की जांच में विद्या फार्म से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में आए हैं। अधिकारियों के अनुसार, विद्या फार्म के लैपटॉप की जांच में टेल्मा दवाओं से संबंधित रिकॉर्ड मिले हैं। साथ ही कुछ डिजिटल डेटा और बैच हिस्ट्री हटाने के संकेत भी मिले हैं। विभाग अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि रिकॉर्ड में बदलाव कब और किस उद्देश्य से किया गया। निरीक्षण के दौरान विद्या फार्म में दवाओं का कोई स्टॉक नहीं मिला, जबकि आरएन फार्मा बंद पाई गई, जिसे सील कर दिया गया।

जांच में जीएसटी रिकॉर्ड, बिलिंग दस्तावेज, सॉफ्टवेयर डेटा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भी पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि फर्जी बिलिंग के जरिए दवाओं की वास्तविक आपूर्ति और बिक्री को छिपाने का प्रयास किया गया हो सकता है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि संदिग्ध दवाएं किन-किन शहरों और कारोबारियों तक पहुंचीं।

पूछताछ के दौरान मुख्य आरोपी कपिल जायसवाल ने कथित रूप से स्वीकार किया कि उसका रद्द लाइसेंस, जीएसटी नंबर और मार्ग सॉफ्टवेयर की आईडी-पासवर्ड का इस्तेमाल अन्य लोग कर रहे थे। आरोप है कि इसके बदले उसे तीन से आठ प्रतिशत तक नकद कमीशन दिया जाता था। पुलिस अब इस दावे की भी जांच कर रही है कि लाइसेंस और डिजिटल संसाधनों का इस्तेमाल किन लोगों द्वारा किया गया।

औषधि विभाग और पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच अभी जारी है। संदिग्ध दवाओं के नमूने, बैंक लेनदेन, जीएसटी रिकॉर्ड, डिजिटल उपकरण और सप्लाई चेन से जुड़े दस्तावेजों का विश्लेषण किया जा रहा है। यदि जांच में किसी बड़े संगठित नेटवर्क या अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदें और किसी भी संदिग्ध दवा या बिलिंग गतिविधि की सूचना संबंधित विभाग को दें।

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