संदिग्ध लिंक से डाउनलोड हुआ ऐप बना ‘डिजिटल चोर’; OTP और बैंकिंग डिटेल्स तक पहुंच बनाकर धीरे-धीरे खाली किया खाता

APK लिंक का जाल: 41 दिनों में कारोबारी के खाते से उड़ाए ₹52 लाख, मोबाइल बना साइबर अपराधियों का हथियार

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By Roopa
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लखनऊ: राजधानी में एक बार फिर साइबर ठगी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक कारोबारी को एक साधारण दिखने वाले लिंक पर क्लिक करना भारी पड़ गया। ऐशबाग क्षेत्र के रहने वाले कारोबारी मोहम्मद सलीम के साथ हुई इस वारदात में साइबर अपराधियों ने महज एक APK फाइल के जरिए उनके मोबाइल पर कब्जा जमाकर करीब ₹52.31 लाख की बड़ी रकम उड़ा ली।

पीड़ित के मुताबिक, जनवरी महीने में उनके मोबाइल पर एक संदिग्ध लिंक आया था। जैसे ही उन्होंने उस लिंक पर क्लिक किया, उनके फोन में अपने आप एक APK (एंड्रॉयड पैकेज किट) फाइल डाउनलोड होकर इंस्टॉल हो गई। शुरुआत में उन्हें इस पर कोई खास शक नहीं हुआ, लेकिन यही एक क्लिक उनके लिए भारी नुकसान का कारण बन गया।

जानकारी के अनुसार, सलीम ने कुछ समय बाद उस ऐप को अपने फोन से डिलीट भी कर दिया था, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। साइबर अपराधी उस ऐप के जरिए उनके मोबाइल सिस्टम में घुसपैठ कर चुके थे और बैकग्राउंड में उनकी गतिविधियों पर नजर रख रहे थे।

जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने इसी ऐप की मदद से पीड़ित के बैंकिंग डिटेल्स, OTP और अन्य संवेदनशील वित्तीय जानकारियों तक पहुंच बना ली। इसके बाद उन्होंने बेहद चालाकी से अलग-अलग ट्रांजेक्शनों के जरिए पैसे निकालने शुरू कर दिए, ताकि किसी को तुरंत संदेह न हो।

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि यह ठगी एक ही दिन में नहीं, बल्कि पूरे 41 दिनों तक लगातार चलती रही। 13 जनवरी से 23 फरवरी के बीच कई किस्तों में रकम निकाली गई और कुल मिलाकर ₹52.31 लाख खाते से साफ हो गए।

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ, जब मार्च महीने में सलीम अपने बैंक पहुंचे और पासबुक अपडेट करवाई। वहां उन्हें खाते से हुई भारी निकासी की जानकारी मिली, जिसे देखकर वह हैरान रह गए। इसके बाद उन्होंने तुरंत स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई।

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मामला सामने आने के बाद जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों के अनुसार, बैंक स्टेटमेंट और ट्रांजेक्शन ट्रेल की बारीकी से जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि पैसा किन खातों में ट्रांसफर किया गया और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं।

साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस तरह के मामलों में अपराधी अक्सर ‘रिमोट एक्सेस’ या ‘स्पाइवेयर’ तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। APK फाइल के जरिए वे मोबाइल पर पूरा नियंत्रण हासिल कर लेते हैं और यूजर को बिना जानकारी दिए उसकी निजी और बैंकिंग जानकारी चुरा लेते हैं।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने इस तरह के मामलों को लेकर चेतावनी देते हुए कहा कि आजकल साइबर अपराधी सोशल इंजीनियरिंग के जरिए लोगों को फंसाते हैं। “एक साधारण लिंक या ऐप के जरिए वे आपके फोन को कंट्रोल कर लेते हैं और फिर आपकी हर डिजिटल गतिविधि उनके नियंत्रण में चली जाती है,” उन्होंने कहा।

इस घटना के बाद साइबर सुरक्षा को लेकर फिर से अलर्ट जारी किया गया है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें और खासतौर पर WhatsApp या अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर आने वाली APK फाइलों को बिल्कुल डाउनलोड न करें।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यदि फोन में किसी संदिग्ध ऐप के इंस्टॉल होने का शक हो, तो तुरंत उसे हटाने के साथ-साथ बैंक और साइबर हेल्पलाइन को सूचित करना चाहिए, ताकि समय रहते नुकसान को रोका जा सके।

लखनऊ की यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि डिजिटल दुनिया में एक छोटी सी लापरवाही भी भारी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है। ऐसे में सतर्क रहना ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।

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