लखनऊ। क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के नाम पर लोगों को भारी मुनाफे का लालच देकर 93 लाख रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का विभूतिखंड पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस ने इस मामले में एक महिला समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने खुद को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) का अधिकृत एजेंट बताकर पीड़ितों का भरोसा जीता और उन्हें क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के बदले मोटा मुनाफा दिलाने का झांसा दिया था। रकम लेने के बाद आरोपियों ने न तो क्रिप्टोकरेंसी उपलब्ध कराई और न ही निवेश की गई राशि लौटाई।
पुलिस के मुताबिक, इस मामले में राजाजीपुरम निवासी अखिलेश त्रिपाठी ने 43 लाख रुपये और रोहतास प्लूमेरिया निवासी अंजनी कुमार ने 50 लाख रुपये निवेश किए थे। दोनों से कुल 93 लाख रुपये लिए गए। रकम देने के बाद जब पीड़ितों को न तो वादा किया गया लाभ मिला और न ही मूलधन वापस किया गया, तब उन्होंने पुलिस से शिकायत की। दोनों पीड़ितों ने 4 सितंबर को विभूतिखंड थाने में सिकंदर सौदागर, ननंद सिंह बिष्ट और पवन सिंह बिष्ट के खिलाफ धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों के ठिकाने के बारे में अहम जानकारी मिली। सर्विलांस और अन्य जांच के आधार पर पता चला कि आरोपी लखनऊ स्थित होटल दयाल गेटवे में ठहरे हुए हैं। पुलिस ने शुक्रवार को होटल के कमरा नंबर 509 में छापा मारकर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान महाराष्ट्र के ठाणे जिले के अंबरनाथ वेस्ट निवासी फरीदा सिकंदर, उत्तराखंड के अल्मोड़ा स्थित रानीखेत के सोनी गांव निवासी पवन बिष्ट और लखीमपुर खीरी के मितौली क्षेत्र के बजरखा गांव निवासी अवधेश कुमार मिश्र के रूप में हुई है। पवन बिष्ट वर्तमान में नई दिल्ली की लोधी कॉलोनी में और अवधेश कुमार मिश्र लखनऊ के इंदिरानगर स्थित आनंद धाम में रह रहा था।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने ठगी को विश्वसनीय दिखाने के लिए आरबीआई और सेबी के फर्जी अधिकृत पत्र तैयार या इस्तेमाल किए थे। इन दस्तावेजों के जरिए पीड़ितों को यह विश्वास दिलाया गया कि आरोपी वैध रूप से क्रिप्टो निवेश का काम करते हैं और उनके माध्यम से निवेश करने पर कम समय में बड़ा लाभ हासिल किया जा सकता है। जालसाजों ने संस्थागत पहचान का भरोसा पैदा करने के बाद दोनों पीड़ितों से बड़ी रकम हासिल कर ली।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक एप्पल कंपनी का लैपटॉप और तीन मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इसके अलावा आरबीआई और सेबी के फर्जी अधिकृत पत्र, तीन अलग-अलग बैंकों की चेकबुक, दो पासबुक, दो पासपोर्ट, एक पैन कार्ड, एक आधार कार्ड और तीन डेबिट कार्ड भी मिले हैं। पुलिस इन उपकरणों और दस्तावेजों की जांच कर रही है ताकि ठगी के नेटवर्क और पैसों के लेनदेन से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाया जा सके।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों से पूछताछ में गिरोह से जुड़े कुछ अन्य लोगों के बारे में भी सुराग मिले हैं। अब पुलिस उन संभावित सहयोगियों की तलाश कर रही है, जिन्होंने फर्जी दस्तावेज तैयार करने, बैंक खातों के इस्तेमाल, पीड़ितों से संपर्क करने या रकम के लेनदेन में मदद की हो सकती है। बरामद मोबाइल फोन और लैपटॉप की तकनीकी जांच से भी गिरोह के संपर्कों और अन्य संभावित पीड़ितों की जानकारी जुटाने का प्रयास किया जा रहा है।
साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के मुताबिक, निवेश के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह अक्सर नियामक संस्थाओं की पहचान का इस्तेमाल कर पीड़ितों के मन में वैधता का भरोसा पैदा करते हैं। उनका कहना है कि किसी भी क्रिप्टो या ऑनलाइन निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले संबंधित संस्था, कंपनी और निवेश मंच की आधिकारिक मान्यता की स्वतंत्र रूप से जांच करनी चाहिए। केवल किसी दस्तावेज, प्रमाणपत्र या अधिकारी होने के दावे के आधार पर बड़ी रकम का लेनदेन करना जोखिमपूर्ण हो सकता है।
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि 93 लाख रुपये की रकम किन खातों में पहुंची और उसके बाद उसका इस्तेमाल या स्थानांतरण कैसे किया गया। जांच का दायरा बढ़ने के साथ इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और संभावित पीड़ितों की संख्या सामने आने की संभावना है।
