लखीमपुर खीरी: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में साइबर पुलिस ने एक संगठित साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी सिम पोर्ट कराने का झांसा देकर लोगों के बायोमेट्रिक डेटा का कथित दुरुपयोग करते थे और उनके नाम पर फर्जी सिम कार्ड तथा बैंक खाते संचालित कराते थे। इन खातों का इस्तेमाल देशभर में होने वाली साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने और आगे स्थानांतरित करने के लिए किया जाता था। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 121 सिम कार्ड, नौ एंड्रॉयड मोबाइल फोन, दो फिंगरप्रिंट स्कैनर, नकदी और साइबर ठगी से जुड़े रिकॉर्ड बरामद किए हैं। सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है, जबकि पूरे नेटवर्क की जांच जारी है।
पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में चलाए जा रहे साइबर अपराध विरोधी अभियान के तहत की गई। साइबर थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि खीरी थाना क्षेत्र स्थित अमृतागंज नहर पुलिया के यात्री भवन में कुछ लोग अवैध रूप से सिम कार्ड और बैंक खातों के माध्यम से साइबर ठगी से जुड़े कार्यों में संलिप्त हैं। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने मौके पर छापेमारी की और आठ आरोपियों को कथित रूप से रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। सभी के विरुद्ध साइबर थाना में संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अंकित, विकास, सरोज कुमार, चन्द्रप्रताप, पप्पू, आनन्द, रिंकू और दिलीप यादव के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि तलाशी के दौरान उनके पास से 121 सिम कार्ड, नौ एंड्रॉयड मोबाइल फोन, दो फिंगरप्रिंट स्कैनर, साइबर लेनदेन का विवरण दर्ज करने वाली कॉपियां तथा नकदी बरामद हुई। जब्त किए गए मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है, ताकि गिरोह के नेटवर्क, संपर्कों और वित्तीय लेनदेन का विस्तृत विश्लेषण किया जा सके।
प्रारंभिक जांच में पुलिस के अनुसार आरोपी गरीब और भोले-भाले लोगों को सिम पोर्ट कराने या मोबाइल सेवा से जुड़े अन्य कार्यों का झांसा देकर उनका बायोमेट्रिक डेटा प्राप्त कर लेते थे। इसके बाद उसी बायोमेट्रिक का कथित रूप से दुरुपयोग कर उनके नाम पर नए सिम कार्ड जारी कराए जाते थे। जांच एजेंसियों का कहना है कि इन सिम कार्डों का उपयोग यूपीआई आईडी बनाने, बैंक खाते संचालित करने और साइबर अपराध से जुड़ी वित्तीय गतिविधियों में किया जाता था।
पुलिस के अनुसार गिरोह द्वारा संचालित बैंक खातों में देश के विभिन्न हिस्सों में हुई साइबर ठगी की रकम जमा कराई जाती थी। इसके बाद आरोपी अपना निर्धारित कमीशन काटकर शेष धनराशि अन्य साइबर अपराधियों तक पहुंचा देते थे। जांच एजेंसियां अब बैंक खातों, यूपीआई लेनदेन, मोबाइल डेटा और कॉल रिकॉर्ड का विश्लेषण कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस नेटवर्क के तार किन राज्यों और अन्य साइबर गिरोहों से जुड़े हुए हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि अब तक इन खातों के माध्यम से कितनी राशि का लेनदेन हुआ।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार साइबर अपराधी अब सीधे बैंक खातों को निशाना बनाने के बजाय लोगों की डिजिटल पहचान और बायोमेट्रिक जानकारी का दुरुपयोग कर फर्जी सिम और म्यूल बैंक खातों का नेटवर्क तैयार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को सिम पोर्ट कराने, ई-केवाईसी या बायोमेट्रिक सत्यापन के नाम पर अपनी उंगलियों के निशान अथवा पहचान संबंधी जानकारी केवल अधिकृत सेवा केंद्र पर ही उपलब्ध करानी चाहिए। किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को बायोमेट्रिक जानकारी देना गंभीर वित्तीय जोखिम पैदा कर सकता है।
पुलिस ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है और जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों, बैंकिंग रिकॉर्ड तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का गहन परीक्षण किया जा रहा है। यदि जांच के दौरान इस नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों, बैंक खातों या साइबर गिरोहों की भूमिका सामने आती है तो उनके विरुद्ध भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि सिम पोर्ट, बैंक खाता या केवाईसी से जुड़े किसी भी प्रस्ताव पर सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 या निकटतम पुलिस स्टेशन को दें।
