कुशीनगर शिक्षक की आत्महत्या मामले में कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ, पुलिस ने फरार आरोपियों की तलाश तेज की

फरार निलंबित बीएसए और लिपिक के खिलाफ एनबीडब्ल्यू जारी, इनाम बढ़ाकर ₹25 हजार किया गया

Team The420
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गोरखपुर। कुशीनगर के मूल निवासी शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की 20 फरवरी की रात आत्महत्या मामले में पुलिस ने गंभीर कदम उठाते हुए निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह के खिलाफ गैरजमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी किया है। इससे दोनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है और अगर वे सरेंडर नहीं करते हैं तो कुर्की जैसी कड़ी कार्रवाई की संभावना बनी हुई है।

पुलिस के अनुसार, घटना स्थल गुलरिहा इलाके के शिवपुर सहबाजगंज में था, जहां कृष्ण मोहन सिंह ने अपने भाई के घर में आत्महत्या की। उन्होंने सुसाइड नोट में मौत के लिए कुछ शिक्षकों और सहकर्मियों को जिम्मेदार ठहराया। सुसाइड नोट में उन्होंने विशेष रूप से देवरिया की निलंबित बीएस शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह का नाम लिया, साथ ही साथी अध्यापकों अपर्णा तिवारी और ओंकार सिंह का भी उल्लेख किया।

शिक्षक ने सुसाइड नोट में आरोप लगाया कि उन्हें बहाली के लिए भ्रष्टाचार के जरिए आर्थिक लाभ दिलाने का दबाव बनाया गया। पुलिस ने जांच के दौरान पाया कि सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह ने कृष्ण मोहन सिंह का परिचय लिपिक संजीव सिंह से कराया था और बहाली के लिए ₹16-16 लाख रुपये की रकम तय की थी। अनिरुद्ध सिंह को पहले गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।

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सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान दोनों फरार आरोपियों की तलाश शुरू की गई, लेकिन वे लगातार पुलिस की पकड़ से बचते रहे। प्रारंभ में उनके खिलाफ 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर ₹25 हजार कर दिया गया है। पुलिस इस इनाम की घोषणा के जरिए आम नागरिकों से भी मदद मांग रही है।

पुलिस की टीमें गोरखपुर, लखनऊ, प्रयागराज, देवरिया और बलिया के अलावा अन्य राज्यों में भी दबिश दे रही हैं। शालिनी श्रीवास्तव के परिवार और करीबियों से पूछताछ की जा रही है, लेकिन वे भी आरोपियों के ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं दे रहे। वहीं, लिपिक संजीव सिंह ने अपने मोबाइल फोन को बंद कर रखा है, जिससे पुलिस को उसके किसी भी गतिविधि का पता नहीं चल पा रहा है।

दोनों आरोपियों ने प्रयागराज में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल की थी, लेकिन गिरफ्तारी के डर से अदालत में व्यक्तिगत रूप से हाजिर नहीं हुए। अधिकारियों का कहना है कि कोर्ट से एनबीडब्ल्यू जारी होने के बाद उनकी कानूनी पकड़ और मजबूत हो गई है। अब पुलिस किसी भी समय उन्हें पकड़ने और कोर्ट में पेश करने की स्थिति में है।

जांच अधिकारी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि बहाली के लिए तय की गई राशि और इस मामले में शामिल अन्य व्यक्तियों की भूमिका क्या रही। साथ ही यह देखा जा रहा है कि इस तरह की प्रथा कितने समय से चल रही थी और इसमें अन्य अधिकारी या कर्मचारियों का भी नाम शामिल है या नहीं।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस मामले से स्पष्ट संदेश जाता है कि शिक्षा विभाग और सरकारी तंत्र में किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामले न केवल कर्मचारियों के कार्य व्यवहार पर असर डालते हैं, बल्कि आम लोगों और समाज में सरकारी संस्थाओं के प्रति विश्वास को भी प्रभावित करते हैं।

पुलिस ने जनता से अपील की है कि अगर किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा अवैध लाभ के लिए दबाव डाला जाए, तो तुरंत सूचना दें। अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है और दोनों फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर समन्वित कार्रवाई जारी है।

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