कुरुक्षेत्र: हरियाणा के कुरुक्षेत्र में एक प्राथमिक कृषि सहकारी समिति में करीब ₹1.13 करोड़ के कथित वित्तीय गबन का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में सहकारी समिति के क्लर्क दयाराम को गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि उसने कार्यवाहक प्रबंधक के रूप में कार्य करते हुए ओवरड्राफ्ट, होम लोन, पर्सनल लोन, एजुकेशन लोन और ग्राहकों की जमा राशि पर ब्याज की गणना में हेरफेर कर वर्षों तक करोड़ों रुपये का गबन किया। आरोपी को दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया है और फिलहाल वह चार दिन की पुलिस रिमांड पर है।
पुलिस के अनुसार आरोपी दयाराम शांति नगर का निवासी है और प्राथमिक कृषि सहकारी समिति में क्लर्क के पद पर कार्यरत था। वर्ष 2019 से 2023 के बीच वह समिति में कार्यवाहक प्रबंधक की जिम्मेदारी भी संभाल रहा था। इसी अवधि के दौरान उसने कथित तौर पर वित्तीय अनियमितताओं को अंजाम देकर समिति को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया।
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मामले की शुरुआत शांति नगर निवासी सुरजीत सिंह द्वारा दी गई शिकायत से हुई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि कार्यवाहक प्रबंधक रहते हुए दयाराम ने विभिन्न वित्तीय योजनाओं और खातों में हेरफेर कर लगभग ₹1.13 करोड़ (ब्याज सहित) का गबन किया। आरोप है कि उसने ओवरड्राफ्ट सीमा, गृह ऋण, व्यक्तिगत ऋण और शिक्षा ऋण से जुड़े रिकॉर्ड में अनियमितताएं कीं। इसके अलावा ग्राहकों द्वारा जमा और निकाली गई राशि पर ब्याज की गणना में भी कथित तौर पर बदलाव कर वित्तीय लाभ हासिल किया।
शिकायत मिलने के बाद झांसा थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को सौंप दी। जांच के दौरान अधिकारियों ने समिति के वित्तीय रिकॉर्ड, ऋण दस्तावेज, खातों के लेजर, जमा-निकासी विवरण और अन्य दस्तावेजों की जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में कथित वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद आरोपी की तलाश तेज कर दी गई।
पुलिस के अनुसार आरोपी को दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से चार दिन की पुलिस रिमांड मंजूर की गई। इस दौरान जांच एजेंसियां उससे कथित गबन की पूरी कार्यप्रणाली, धन के इस्तेमाल, संभावित सहयोगियों और वित्तीय लेनदेन के बारे में पूछताछ कर रही हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि कथित रूप से गबन की गई राशि कहां-कहां स्थानांतरित की गई और क्या उसका निवेश किसी संपत्ति या अन्य परिसंपत्तियों में किया गया।
जांच अधिकारी समिति के बैंक खातों, ऋण स्वीकृति प्रक्रिया, ब्याज गणना प्रणाली और लेखा रिकॉर्ड का भी मिलान कर रहे हैं। यदि जांच में अन्य कर्मचारियों या अधिकारियों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि कथित वित्तीय गड़बड़ियां लंबे समय तक अधिकारियों की नजर से कैसे बची रहीं और क्या आंतरिक निगरानी प्रणाली में कोई गंभीर कमी थी।
वित्तीय अपराध विशेषज्ञों का मानना है कि सहकारी संस्थाओं में नियमित ऑडिट, डिजिटल लेखा प्रणाली, बहु-स्तरीय वित्तीय अनुमोदन और समय-समय पर स्वतंत्र जांच से इस प्रकार के गबन की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। पारदर्शी रिकॉर्ड प्रबंधन और मजबूत आंतरिक नियंत्रण प्रणाली सार्वजनिक धन की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।
फिलहाल आर्थिक अपराध शाखा आरोपी से पूछताछ कर पूरे वित्तीय लेनदेन की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि गबन की राशि, धन के प्रवाह या अन्य लोगों की संलिप्तता से जुड़े अतिरिक्त प्रमाण मिलते हैं, तो जांच का दायरा और बढ़ाया जा सकता है।
