महाराष्ट्र में कथित ₹160 करोड़ वेतन घोटाले की जांच में फर्जी नियुक्ति दस्तावेजों और शालार्थ आईडी के जरिए सरकारी वेतन निकालने के आरोप सामने आए हैं।

पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती में धांधली का आरोप: पूर्व KPSC अध्यक्ष समेत कई पर एफआईआर, रिश्वत और OMR हेरफेर की जांच शुरू

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By Roopa
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बेंगलुरु: कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) के पूर्व अध्यक्ष शिवराज शंकरप्पा साहुकार की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। अपनी बेटियों की सरकारी नियुक्तियों को लेकर पहले से विवादों में घिरे साहुकार के खिलाफ अब पशु चिकित्सा अधिकारियों (Veterinary Officers) की भर्ती में कथित धांधली के मामले में भी आपराधिक जांच शुरू हो गई है। पुलिस ने आरोप लगाया है कि भर्ती प्रक्रिया में पक्षपात, रिश्वतखोरी, गोपनीय परीक्षा सामग्री के दुरुपयोग और OMR उत्तर पुस्तिकाओं में कथित हेरफेर के जरिए कुछ उम्मीदवारों को अवैध लाभ पहुंचाया गया।

विधान सौधा पुलिस ने पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. मंजूनाथ की शिकायत पर पूर्व KPSC अध्यक्ष शिवराज शंकरप्पा साहुकार, आयोग के कुछ सदस्यों और अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 400 पशु चिकित्सा अधिकारी पदों की भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित कर रिश्तेदारों और कथित रूप से पैसे देकर नौकरी पाने वाले उम्मीदवारों को लाभ पहुंचाया गया।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब इसी महीने कर्नाटक के राज्यपाल ने साहुकार को KPSC अध्यक्ष पद से निलंबित किया था। उन पर अपनी दो बेटियों की औद्योगिक विस्तार अधिकारी (Industrial Extension Officer) पद पर नियुक्ति में हितों के टकराव के बावजूद प्रभाव का इस्तेमाल करने के आरोप लगे थे। राज्यपाल ने इस मामले को संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत आगे की कार्रवाई के लिए राष्ट्रपति को भी भेजा था। इसी प्रकरण में उनकी एक बेटी पर कथित रूप से फर्जी आय प्रमाणपत्र के आधार पर आरक्षण का लाभ लेने का आरोप है और उसे अग्रिम जमानत मिल चुकी है।

पुलिस के अनुसार, वर्तमान मामला जनवरी 2026 में आयोजित पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती परीक्षा से जुड़ा है। शिकायत में दावा किया गया है कि लगभग 29 उम्मीदवारों ने अवैध तरीकों से नियुक्ति हासिल की। आरोप है कि परीक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी कुछ बिचौलियों तक पहुंचाई गई, जिन्होंने चुनिंदा अभ्यर्थियों को पहले से तैयारी कराई। इसके अलावा OMR उत्तर पुस्तिकाओं में परीक्षा के बाद अंकों में बदलाव करने के लिए कथित छेड़छाड़ किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।

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शिकायत में सुगुरेश जाक नामक व्यक्ति का भी उल्लेख किया गया है, जिसे पूर्व KPSC अध्यक्ष का रिश्तेदार बताया गया है। आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान गोपनीय अभ्यर्थी डेटा और OMR से संबंधित सूचनाएं अनधिकृत तरीके से प्राप्त कर बिचौलियों के साथ साझा की गईं।

मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब सोशल मीडिया पर एक कथित ऑडियो क्लिप वायरल हुई। इस ऑडियो में पशु चिकित्सा अधिकारी की नौकरी दिलाने के बदले ₹80 लाख की कथित रिश्वत की चर्चा होने का दावा किया गया। हालांकि पुलिस ने अभी तक ऑडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं की है और इसे जांच का हिस्सा बनाया गया है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में डिजिटल साक्ष्यों, भर्ती रिकॉर्ड, मूल्यांकन प्रक्रिया, OMR उत्तर पुस्तिकाओं और अन्य दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है। जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि परीक्षा और चयन प्रक्रिया में किसी संगठित नेटवर्क या बिचौलियों की भूमिका थी या नहीं। आने वाले दिनों में शिकायतकर्ता, चयनित और असफल अभ्यर्थियों के साथ-साथ KPSC अधिकारियों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे। प्राथमिकी में नामजद लोगों को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।

इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं के अलावा कर्नाटक सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम के प्रावधानों के तहत भी कार्रवाई की गई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या भर्ती प्रक्रिया को सुनियोजित तरीके से प्रभावित किया गया था और क्या इसके बदले आर्थिक लेन-देन हुआ।

कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खड़गे ने कहा कि सार्वजनिक सेवा में भर्ती पूरी तरह पारदर्शी और विश्वसनीय होनी चाहिए तथा किसी को भी छात्रों और नौकरी के अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने राज्य और केंद्र स्तर पर भर्ती प्रक्रियाओं को अधिक सुरक्षित और निष्पक्ष बनाने के लिए मजबूत कानूनी प्रावधानों की आवश्यकता पर भी जोर दिया। साथ ही उन्होंने पूर्व KPSC अध्यक्ष की नियुक्ति और उन्हें पूर्व में मिले समर्थन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इन पहलुओं की भी सार्वजनिक रूप से जवाबदेही तय होनी चाहिए। फिलहाल पुलिस मामले की विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही है और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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