कोझिकोड: केरल के कोझिकोड सिटी साइबर पुलिस ने कांग्रेस महासचिव एवं वायनाड सांसद प्रियंका गांधी के निजी सचिव बनकर कथित तौर पर ₹3 करोड़ की मांग करने वाले साइबर ठगी गिरोह के दो सदस्यों को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने केरल की एलाथुर विधायक विद्या बालकृष्णन को फोन कर कैबिनेट मंत्री का पद दिलाने का झांसा दिया था। मामले में पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच से संकेत मिले हैं कि यह एक संगठित साइबर नेटवर्क है, जिसने राज्य के कई सांसदों और विधायकों को भी इसी तरह निशाना बनाया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गौरव (21) और नितिन कुमार (21) के रूप में हुई है। दोनों पूर्वी दिल्ली के सपेरा बस्ती क्षेत्र के निवासी हैं। कोझिकोड सिटी साइबर पुलिस की विशेष जांच टीम ने नई दिल्ली में अभियान चलाकर दोनों को गिरफ्तार किया। जांच टीम का नेतृत्व साइबर सेल के सहायक पुलिस आयुक्त के निर्देशन में किया गया।
पुलिस के अनुसार घटना 6 जुलाई की है, जब विधायक विद्या बालकृष्णन को अंग्रेजी में एक फोन कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को “डी.एस. राजकुमार” बताते हुए प्रियंका गांधी का निजी सचिव होने का दावा किया। उसने कहा कि उसका संपर्क केरल के एक सांसद के माध्यम से हुआ है और यदि विधायक ₹3 करोड़ की व्यवस्था कर दें तो उन्हें कैबिनेट मंत्री बनवाया जा सकता है।
फोन कॉल की भाषा और बातचीत के तरीके से विधायक को संदेह हुआ। इसके बाद उन्होंने सीधे प्रियंका गांधी के कार्यालय से संपर्क किया। वहां से स्पष्ट कर दिया गया कि ऐसा कोई व्यक्ति उनके कार्यालय में कार्यरत नहीं है और यह पूरी तरह साइबर ठगी का प्रयास है। पार्टी नेतृत्व की सलाह पर विधायक ने 11 जुलाई को साइबर पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।
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शिकायत मिलने के बाद साइबर पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की। मोबाइल नंबर, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, डिजिटल ट्रेल और सिम कार्ड से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की गई। जांच के दौरान हाई-टेक क्राइम इंक्वायरी सेल की सहायता से उस सिम कार्ड के वास्तविक उपयोगकर्ताओं तक पहुंच बनाई गई, जिसके जरिए विधायक को कॉल किया गया था। इसी आधार पर पुलिस ने दिल्ली में छापेमारी कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
जांच एजेंसियों का कहना है कि यह मामला केवल एक फोन कॉल तक सीमित नहीं है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इसी गिरोह ने केरल के कई अन्य सांसदों और विधायकों से भी संपर्क कर उन्हें राजनीतिक पद दिलाने, प्रभावशाली नियुक्तियां कराने अथवा अन्य लाभ दिलाने का झांसा देने की कोशिश की थी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं तथा क्या इसका संबंध अन्य राज्यों में सक्रिय साइबर ठगी गिरोहों से भी है।
पुलिस के अनुसार गिरोह का संचालन कई लोगों के माध्यम से किया जा रहा था और इसके महत्वपूर्ण तार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से जुड़े मिले हैं। जांच अब बैंक खातों, मोबाइल उपकरणों, डिजिटल संचार, वित्तीय लेन-देन और संभावित लाभार्थियों तक विस्तारित की गई है। बरामद डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर अन्य संदिग्धों की पहचान भी की जा रही है।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि प्रभाव, राजनीतिक पहुंच या सरकारी पद दिलाने के नाम पर होने वाली ठगी सोशल इंजीनियरिंग का नया रूप है। अपराधी पहले विश्वसनीय पहचान का भ्रम पैदा करते हैं, फिर गोपनीय प्रक्रिया, तत्काल निर्णय और धनराशि जमा कराने का दबाव बनाकर लोगों को जाल में फंसाने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक, सरकारी या प्रशासनिक नियुक्ति के लिए धन की मांग किए जाने पर तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। ऐसे किसी भी संदिग्ध कॉल, संदेश या वित्तीय मांग की पुष्टि संबंधित कार्यालय से अवश्य करें और यदि साइबर ठगी का प्रयास हो तो बिना देरी किए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
