बेंगलुरु: विदेश में आकर्षक वेतन वाली नौकरी का सपना दिखाकर मानव तस्करी के जरिए लोगों को साइबर अपराध केंद्रों तक पहुंचाने वाले गिरोहों का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। कर्नाटक के कोलार जिले के दो युवकों को फेसबुक पर विदेश में नौकरी का विज्ञापन दिखाकर पहले थाईलैंड बुलाया गया और फिर म्यांमार-थाईलैंड सीमा के पास स्थित एक कथित साइबर स्कैम कैंप में पहुंचा दिया गया। वहां उनके पासपोर्ट जब्त कर उन्हें भारतीय मूल के लोगों, विशेष रूप से अमेरिका में रहने वाले भारतीयों को निशाना बनाकर ऑनलाइन ठगी करने के लिए मजबूर किया गया। दोनों युवकों को बाद में भारतीय अधिकारियों और कर्नाटक पुलिस के समन्वित प्रयासों से सुरक्षित वापस लाया गया।
पुलिस के अनुसार, पीड़ितों में से एक 32 वर्षीय युवक ने बताया कि उसने 12वीं तक पढ़ाई की थी और बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (BPO) क्षेत्र में लगभग चार वर्ष तक काम किया था। नौकरी छोड़ने के बाद वह नई रोजगार की तलाश कर रहा था। इसी दौरान उसके एक मित्र ने फेसबुक पर विदेश में नौकरी का विज्ञापन दिखाया। दोनों ने लिंक पर क्लिक कर अपना नाम, शैक्षणिक योग्यता, पासपोर्ट विवरण और अन्य आवश्यक जानकारी दर्ज कर दी।
कुछ दिनों बाद दोनों को ऑनलाइन इंटरव्यू का लिंक मिला। पीड़ित के अनुसार, इंटरव्यू लेने वाले व्यक्ति ने अपना चेहरा नहीं दिखाया और केवल सामान्य सवाल पूछे। इंटरव्यू के दो दिन के भीतर ही दोनों के वीजा और बैंकॉक की हवाई टिकट तैयार कर दी गई। 10 जुलाई को दोनों बेंगलुरु से बैंकॉक के लिए रवाना हुए। उड़ान में सवार होने से ठीक पहले उन्हें व्हाट्सएप कॉल कर खुद को उनका मैनेजर बताने वाले एक व्यक्ति ने विमान में बैठने के बाद अपनी तस्वीर भेजने के लिए कहा।
बैंकॉक पहुंचने पर कंपनी की ओर से वाहन उपलब्ध कराया गया। दोनों को करीब 450 किलोमीटर दूर ले जाकर एक होटल में ठहराया गया और बताया गया कि अन्य नए कर्मचारी भी उनके साथ जुड़ेंगे। अगले दिन उन्हें थाईलैंड-म्यांमार सीमा के निकट एक स्थान पर ले जाया गया, जहां से कथित तौर पर सैन्य वर्दी पहने लोगों ने उन्हें म्यांमार सीमा पार कराई। इसके बाद लगभग 440 किलोमीटर की यात्रा कर उन्हें म्यांमार के कायिन राज्य स्थित एक परिसर में पहुंचाया गया।
पीड़ितों ने पुलिस को बताया कि वहां पहुंचते ही उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए गए और उनसे एक समझौते पर हस्ताक्षर कराए गए। अगले दिन जब वे कार्यस्थल पहुंचे तो उन्हें पता चला कि वे किसी वैध कंपनी में नहीं बल्कि एक साइबर ठगी नेटवर्क के नियंत्रण वाले परिसर में हैं। वहां लगभग 70 से 80 भारतीय विभिन्न राज्यों से मौजूद थे, जबकि पूरे संचालन पर चीनी नागरिकों का नियंत्रण बताया गया। परिसर में अफ्रीकी नागरिक भी मौजूद थे। उनका काम अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों को विभिन्न ऑनलाइन तरीकों से ठगकर उनके बैंक खातों से धन निकालना था। परिसर के भीतर हर गतिविधि पर कड़ी निगरानी रखी जाती थी।
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दोनों युवकों के अनुसार, उन्हें प्रतिदिन लगभग 16 घंटे काम कराया जाता था। केवल एक घंटे के लिए मोबाइल फोन इस्तेमाल करने की अनुमति थी और छह घंटे सोने का समय दिया जाता था। यदि कोई नियम तोड़ता या निर्धारित लक्ष्य पूरा नहीं कर पाता, तो उसे पहले चेतावनी दी जाती थी। इसके बाद उठक-बैठक, लंबी दौड़, बिजली के झटके और बार-बार गलती होने पर अंधेरे कमरे में बंद कर दिन में केवल एक बार भोजन देने जैसी कठोर सजा दी जाती थी। हालात समझने के बाद दोनों ने किसी तरह अपने परिवारों को अपनी स्थिति की जानकारी दी।
परिजनों की सूचना के बाद एक केंद्रीय सरकारी अधिकारी के माध्यम से मामला संबंधित एजेंसियों तक पहुंचा। कर्नाटक साइबर कमांड यूनिट ने भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) और म्यांमार में भारतीय राजनयिक अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित किया, जिसके बाद दोनों युवकों को सुरक्षित भारत वापस लाया गया।
इस मामले के बाद कर्नाटक पुलिस ने विदेश में नौकरी तलाशने वालों के लिए विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। पुलिस ने कहा कि सोशल मीडिया या मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए मिलने वाले आकर्षक नौकरी प्रस्ताव, असामान्य रूप से अधिक वेतन, मुफ्त आवास, तत्काल विदेश यात्रा का दबाव, पासपोर्ट जमा कराने की मांग और अनधिकृत सीमा पार कराने जैसे संकेतों को गंभीर चेतावनी के रूप में देखा जाना चाहिए।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि दक्षिण-पूर्व एशिया में संचालित साइबर स्कैम कैंप अब संगठित मानव तस्करी और अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध का बड़ा केंद्र बन चुके हैं। उन्होंने सलाह दी कि विदेश में नौकरी स्वीकार करने से पहले कंपनी की स्वतंत्र रूप से जांच करें, भर्ती एजेंसी की वैधता सत्यापित करें और किसी भी संदिग्ध प्रस्ताव की सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस या संबंधित एजेंसियों को दें।
