कोच्चि: केरल के कोच्चि में ऑनलाइन कमोडिटी ट्रेडिंग के नाम पर ₹57.72 लाख की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि साइबर ठगों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर ‘विक्रम’ नाम से फर्जी प्रोफाइल बनाकर एक व्यक्ति को सोने (Gold) और कच्चे तेल (Crude Oil) की ट्रेडिंग में निवेश पर भारी मुनाफे का लालच दिया। निवेशक को उच्च रिटर्न का भरोसा दिलाकर कई महीनों तक अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराई गई, लेकिन बाद में न तो वादा किया गया लाभ मिला और न ही निवेश की गई मूल राशि वापस की गई।
पुलिस के अनुसार, पीड़ित कुन्नाथुनाडु क्षेत्र का निवासी है। उसकी शिकायत पर अंबालामेडु पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी ने सोशल मीडिया के माध्यम से पीड़ित से संपर्क स्थापित किया और खुद को निवेश संबंधी विशेषज्ञ बताते हुए कमोडिटी ट्रेडिंग में सुरक्षित एवं अत्यधिक लाभदायक निवेश का दावा किया।
जांच अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी ने फेसबुक पर ‘विक्रम’ नाम से संचालित एक फर्जी प्रोफाइल का इस्तेमाल कर पीड़ित का विश्वास जीता। उसने दावा किया कि सोने और कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय बाजार में निवेश कर कम समय में आकर्षक मुनाफा कमाया जा सकता है। लगातार संपर्क और कथित निवेश संबंधी सलाह के जरिए आरोपी ने पीड़ित को बड़ी धनराशि निवेश करने के लिए तैयार कर लिया।
पुलिस के अनुसार, 20 जनवरी से 13 अप्रैल 2026 के बीच पीड़ित ने कई किश्तों में कुल ₹57,72,484 विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर किए। आरोपियों ने निवेश की प्रगति और संभावित लाभ का भरोसा दिलाते हुए लगातार और धन जमा कराने के लिए प्रेरित किया। कुछ समय तक पीड़ित को यह विश्वास दिलाया जाता रहा कि उसका निवेश सुरक्षित है और शीघ्र ही उसे भारी लाभ मिलेगा।
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धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब पीड़ित ने अपने निवेश की गई राशि और कथित मुनाफे को वापस लेने का प्रयास किया। पुलिस के अनुसार, आरोपी न तो कोई लाभ देने में सफल हुए और न ही मूल निवेश वापस किया। इसके बाद पीड़ित को एहसास हुआ कि वह संगठित साइबर निवेश धोखाधड़ी का शिकार हो चुका है और उसने पुलिस से संपर्क किया।
अंबालामेडु पुलिस ने मामला दर्ज कर बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन और संदिग्धों की ऑनलाइन गतिविधियों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि पीड़ित द्वारा भेजी गई धनराशि किन-किन बैंक खातों में पहुंची, उसका आगे किस प्रकार उपयोग किया गया और इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं। साथ ही संदिग्ध फेसबुक प्रोफाइल, मोबाइल नंबर, आईपी एड्रेस और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का भी विश्लेषण किया जा रहा है।
प्रारंभिक जांच में पुलिस को आशंका है कि यह गिरोह सोशल मीडिया के माध्यम से निवेशकों को निशाना बनाकर फर्जी कमोडिटी ट्रेडिंग योजनाओं के जरिए बड़े पैमाने पर साइबर ठगी कर रहा है। जांचकर्ता यह भी पता लगा रहे हैं कि क्या इसी तरीके से अन्य लोगों को भी ठगी का शिकार बनाया गया है। आवश्यकता पड़ने पर विभिन्न राज्यों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों और संबंधित बैंकों से भी जानकारी साझा की जाएगी।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि साइबर अपराधी आजकल सोशल मीडिया के माध्यम से फर्जी निवेश सलाहकार बनकर लोगों को गारंटीड रिटर्न, कम जोखिम और तेज मुनाफे का लालच देते हैं। उन्होंने कहा कि निवेश से पहले किसी भी कंपनी, ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म या सलाहकार की वैधता की स्वतंत्र रूप से जांच करनी चाहिए तथा केवल सोशल मीडिया प्रोफाइल या ऑनलाइन दावों के आधार पर धन निवेश नहीं करना चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि यदि किसी निवेश प्लेटफॉर्म पर निकासी रोक दी जाए, लगातार अतिरिक्त निवेश का दबाव बनाया जाए या संदिग्ध बैंक खातों में रकम भेजने के लिए कहा जाए, तो तुरंत लेनदेन रोककर राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। समय पर शिकायत करने से धन की रिकवरी और अपराधियों तक पहुंचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
