कानपुर में रिटायर्ड शिक्षक को फर्जी बीमा पॉलिसी, बोनस और परिपक्वता राशि के नाम पर ₹43.15 लाख की साइबर ठगी का शिकार बनाया गया।

43 लाख रुपये की साइबर ठगी: फर्जी बीमा पॉलिसी के जाल में फंसे रिटायर्ड शिक्षक, तीन साल तक ठगों ने बनाकर रखा शिकार

Team The420
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कानपुर: कानपुर के गुजैनी क्षेत्र में साइबर ठगों ने एक सेवानिवृत्त शिक्षक को फर्जी बीमा पॉलिसी और परिपक्वता राशि दिलाने का झांसा देकर करीब ₹43.15 लाख की ठगी कर ली। आरोप है कि ठग लगभग तीन वर्षों तक अलग-अलग बहानों से पीड़ित से पैसे जमा कराते रहे। मामला तब सामने आया जब आरोपी लगातार और धन की मांग करने लगे और पीड़ित अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) तुड़वाने बैंक पहुंचे। बैंक मैनेजर को संदेह होने पर पूरी घटना का खुलासा हुआ, जिसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।

पीड़ित प्रेमदत्त शर्मा, अंबेडकर नगर निवासी हैं और गुमटी स्थित जीएन इंटर कॉलेज से शिक्षक पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उनके परिवार में पत्नी और दो बेटे हैं। एक बेटा लखनऊ के सरकारी अस्पताल में फार्मासिस्ट है, जबकि दूसरा नोएडा की एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में इंजीनियर के रूप में कार्यरत है। सेवानिवृत्ति के बाद प्रेमदत्त अपनी पत्नी के साथ कानपुर में रह रहे हैं। उन्होंने पहले से एक बीमा पॉलिसी ले रखी थी, जिसकी परिपक्वता वर्ष 2026 में होनी थी।

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शिकायत के अनुसार, वर्ष 2024 में उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने स्वयं को बीमा कंपनी का प्रतिनिधि बताते हुए कहा कि उनकी मौजूदा पॉलिसी में नुकसान से बचने के लिए एजेंट कोड बदलना आवश्यक है। इसके लिए उन्हें ₹36,000 की नई पॉलिसी खरीदने की सलाह दी गई। कॉलर ने दावा किया कि ऐसा करने पर उन्हें अधिक लाभ मिलेगा और भविष्य में बड़ी राशि प्राप्त होगी। भरोसा दिलाने के बाद पीड़ित ने बताए गए बैंक खाते में रकम स्थानांतरित कर दी। कुछ समय बाद उन्हें ऑनलाइन पॉलिसी से जुड़े दस्तावेज भी भेज दिए गए, जिससे उनका विश्वास और मजबूत हो गया।

करीब तीन महीने बाद एक महिला ने खुद को उसी बीमा कंपनी की प्रतिनिधि बताते हुए संपर्क किया। उसने दावा किया कि पीड़ित की पॉलिसी पर विशेष बोनस स्वीकृत हुआ है और यदि वे ₹2.75 लाख जमा कर देंगे तो पॉलिसी की अवधि पूरी होने पर उन्हें ₹69 लाख मिलेंगे। जब पीड़ित ने बताया कि उनके खाते में केवल ₹1.65 लाख हैं, तो महिला ने बाकी राशि स्वयं जमा कराने की बात कही और किसी को इसकी जानकारी न देने को कहा। इस तरह पीड़ित ने उपलब्ध राशि भी बताए गए खाते में भेज दी।

कुछ महीनों बाद उसी महिला ने दोबारा फोन कर कहा कि उसके द्वारा जमा की गई राशि के कारण उसकी नौकरी खतरे में पड़ गई है, क्योंकि उनकी बातचीत की रिकॉर्डिंग कंपनी प्रबंधन तक पहुंच गई है। इसके बाद फोन पर कथित मैनेजर ने बातचीत करते हुए कहा कि मामला गंभीर हो गया है और पॉलिसी बचाने के लिए अतिरिक्त राशि जमा करनी होगी। डर और लालच के मिश्रण में फंसे पीड़ित ने फिर कई किश्तों में धनराशि ट्रांसफर कर दी।

मामला यहीं नहीं रुका। मई 2026 में पीड़ित को कथित रूप से एक नोटिस भेजा गया, जिसमें बताया गया कि उनकी पॉलिसी का मामला बीमा नियामक के पास विचाराधीन है। बाद में ठगों ने टीडीएस जमा कराने सहित विभिन्न औपचारिकताओं का हवाला देकर 18 जून 2026 तक उनसे लगातार धन जमा कराया। इस पूरी अवधि में पीड़ित से कुल ₹43.15 लाख ठग लिए गए। इसके बावजूद आरोपियों ने और रकम की मांग जारी रखी।

जब अतिरिक्त धनराशि जुटाने के लिए प्रेमदत्त शर्मा बैंक में अपनी एफडी तुड़वाने पहुंचे तो बैंक मैनेजर ने कारण पूछा। पूरी जानकारी सुनने के बाद मैनेजर को साइबर ठगी की आशंका हुई और उन्होंने पीड़ित को तत्काल कोई भुगतान न करने की सलाह दी। इसके बाद पीड़ित को एहसास हुआ कि वह लंबे समय से संगठित साइबर ठगी का शिकार बने हुए हैं।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, साइबर अपराधी अक्सर बीमा परिपक्वता, बोनस, एजेंट कोड परिवर्तन, टैक्स या नियामकीय कार्रवाई का डर दिखाकर वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाते हैं। ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार का भुगतान करने से पहले संबंधित कंपनी के आधिकारिक ग्राहक सेवा केंद्र से जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए और अज्ञात खातों में धनराशि स्थानांतरित करने से बचना चाहिए।

पुलिस ने मामला दर्ज कर मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन के आधार पर आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास शुरू कर दिए हैं। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी निवेश, बीमा या बोनस से जुड़े फोन कॉल पर बिना स्वतंत्र सत्यापन के भरोसा न करें और संदेह होने पर तुरंत साइबर पुलिस से संपर्क करें।

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