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एनजीओ के खाते से ₹36 करोड़ का साइबर लेनदेन, बैंककर्मी समेत दो गिरफ्तार; 178 शिकायतों के बाद खुला फर्जी अकाउंट नेटवर्क

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By Roopa
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कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर में साइबर ठगी के लिए फर्जी बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है। साइबर सेल की पूर्वी जोन और फीलखाना पुलिस ने निजी बैंक के एक प्रतिनिधि समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एक एनजीओ के नाम से बैंक खाता खुलवाकर साइबर ठगों को उपलब्ध कराया था। इस खाते से करीब ₹36 करोड़ रुपये का लेनदेन सामने आया है, जबकि राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर इस खाते के खिलाफ 178 शिकायतें दर्ज थीं।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान फतेहपुर निवासी सूरज निषाद और बिठूर क्षेत्र निवासी बैंक प्रतिनिधि विक्रम कुमार के रूप में हुई है। पुलिस ने दोनों को फूलबाग बस स्टैंड के पास से गिरफ्तार किया। तलाशी के दौरान आरोपियों के पास से लैपटॉप, फर्जी दस्तावेज, पार्षदों की मुहरें, चेकबुक, पासबुक, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरण बरामद किए गए हैं।

पुलिस जांच में सामने आया कि सूरज निषाद ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर ‘गौमाता गौरक्षा सेवा मंच ट्रस्ट’ नाम से एक एनजीओ बनाया था। इसके बाद बैंक प्रतिनिधि विक्रम कुमार की मदद से करीब दो साल पहले माल रोड स्थित एक निजी बैंक में ट्रस्ट के नाम से खाता खुलवाया गया। जांच में पाया गया कि इस खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम के लेनदेन के लिए किया जा रहा था।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस बैंक खाते में देश के कई राज्यों से साइबर ठगी की रकम पहुंची थी। जांच में उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड, पंजाब, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों से लेनदेन के प्रमाण मिले हैं। पुलिस अब इस खाते से जुड़े अन्य लोगों और साइबर ठगी नेटवर्क की भूमिका की जांच कर रही है।

पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि वे फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। इसके बाद इन खातों को साइबर ठगों को किराये पर उपलब्ध कराया जाता था। बदले में उन्हें ठगी की रकम का 20 से 30 प्रतिशत तक कमीशन मिलता था।

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जांच में यह भी पता चला है कि विक्रम कुमार बैंक प्रतिनिधि के तौर पर काम करता था और उसके संपर्क में कई अन्य बैंक कर्मचारियों से भी थे। आरोप है कि उनकी मदद से फर्जी लेटरपैड और पार्षदों की नकली मुहर तैयार कर बैंक संबंधी दस्तावेज बनाए जाते थे। इन दस्तावेजों के आधार पर बैंक से लोन भी स्वीकृत कराने की कोशिश की जाती थी।

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों का संबंध साइबर ठगों के एक व्हाट्सऐप ग्रुप ‘जी-4 स्टॉक एनालिस्ट’ से भी सामने आया है। जांच एजेंसियां इस ग्रुप से जुड़े अन्य सदस्यों की जानकारी जुटा रही हैं। पुलिस के अनुसार, सूरज निषाद के खिलाफ फिरोजाबाद, गाजियाबाद, मुरादाबाद, वाराणसी और शाहजहांपुर में पहले से मुकदमे दर्ज हैं। वहीं विक्रम कुमार के खिलाफ NCRP पोर्टल पर करीब 27 शिकायतें दर्ज होने की जानकारी मिली है।

पुलिस ने आरोपियों के पास से ऑप्टिकल फिंगरप्रिंट स्कैनर, एटीएम पिन जनरेटर, 15 फिनो पेमेंट बैंक कॉम्बो किट और बैंक लोन से जुड़े दस्तावेज भी बरामद किए हैं। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने डिजिटल माध्यमों और बैंकिंग प्रक्रियाओं की जानकारी का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर फर्जी खाते तैयार किए।

अधिकारियों के अनुसार, एक बैंक खाते की जांच में सिर्फ सात दिनों का स्टेटमेंट निकालने पर 5,766 पेज का रिकॉर्ड सामने आया है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि खाते का इस्तेमाल लंबे समय से साइबर अपराधियों के लिए किया जा रहा था।

पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की आर्थिक कड़ियों की जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि फर्जी बैंक खाते कितने साइबर गिरोहों को उपलब्ध कराए गए और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य बैंककर्मी या बिचौलिए कौन-कौन हैं। अधिकारियों का कहना है कि आगे की जांच में साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।

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