कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर में ₹250 करोड़ के कथित साइबर ठगी नेटवर्क की जांच के दौरान पुलिस ने ₹25 हजार के इनामी स्क्रैप कारोबारी अंचित गोयल को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी की तीन कथित फर्जी फर्मों के माध्यम से जनवरी 2025 से अप्रैल 2026 के बीच करीब ₹53 करोड़ का वित्तीय लेनदेन किया गया। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि इन फर्मों का इस्तेमाल साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को वैध कारोबारी लेनदेन का रूप देने, फर्जी जीएसटी बिलों के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) और आयकर लाभ लेने तथा धन के वास्तविक स्रोत को छिपाने के लिए किया जाता था। पुलिस अब इस पूरे वित्तीय नेटवर्क, उससे जुड़े खातों और अन्य लाभार्थियों की भूमिका की जांच कर रही है।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि साइबर ठगी की रकम का एक हिस्सा अमेरिका के कैलिफोर्निया में रहने वाली जेनिफर फ्लोरेंस नामक महिला के बैंक खाते में भी भेजा गया था। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि संबंधित महिला का इस नेटवर्क से प्रत्यक्ष संबंध था या उसके बैंक खाते का उपयोग केवल धनराशि स्थानांतरित करने के लिए किया गया। इस विदेशी कनेक्शन की जांच के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेनदेन और बैंकिंग रिकॉर्ड का भी विश्लेषण किया जा रहा है।
पुलिस के अनुसार, इस मामले की जांच पहले दर्ज ₹125 करोड़ की साइबर ठगी से शुरू हुई थी। उसी जांच के दौरान चार बैंककर्मियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। बाद में गिरफ्तार किए गए दो अन्य आरोपियों से पूछताछ में यह सामने आया कि पूरे नेटवर्क के माध्यम से लगभग ₹250 करोड़ का संदिग्ध लेनदेन हुआ हो सकता है। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया और विभिन्न राज्यों में फैले वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जोड़ा गया।
अब तक इस साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े कुल नौ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। जांच में पता चला कि अंचित गोयल की मुलाकात सह-आरोपी राजवीर सिंह से उसके चालक सतीश पांडेय के माध्यम से हुई थी। पुलिस ने पहले सतीश पांडेय के कब्जे से 30 से अधिक मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद किए थे। जांच एजेंसियों का मानना है कि इन मोबाइल नंबरों और सिम कार्डों का इस्तेमाल साइबर ठगी, बैंक खातों के संचालन और डिजिटल पहचान छिपाने के लिए किया जाता था। इसके बाद तकनीकी और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर अंचित गोयल को आगरा से गिरफ्तार किया गया।
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पूछताछ और दस्तावेजों की जांच के दौरान पुलिस को राजाराम ट्रेडर्स, श्रीश्याम ट्रेडर्स और राधा ट्रेडर्स नाम से संचालित तीन कथित फर्जी फर्मों के दस्तावेज मिले हैं। जांच के अनुसार, आरोपी राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और दिल्ली के स्क्रैप कारोबारियों से कथित तौर पर फर्जी जीएसटी बिल प्राप्त करता था। इन बिलों के आधार पर फर्जी कर लाभ लेने के साथ-साथ साइबर ठगी की रकम को वैध व्यावसायिक लेनदेन के रूप में दिखाने का प्रयास किया जाता था। जांच एजेंसियां अब इन फर्मों से जुड़े बैंक खातों, जीएसटी रिकॉर्ड और वित्तीय दस्तावेजों की विस्तृत जांच कर रही हैं।
जांच के दौरान प्रतिबिंब पोर्टल पर इन फर्मों से संबंधित बिहार के मोतिहारी, आंध्र प्रदेश के कर्नूल और महाराष्ट्र के गोरेगांव से साइबर ठगी की शिकायतें भी दर्ज मिली हैं। इसके अलावा, जांच में यह भी सामने आया कि गाजियाबाद निवासी एक बीएसएफ जवान की बेटी के बैंक खाते में पिछले एक वर्ष के दौरान लगभग ₹45 करोड़ का लेनदेन हुआ। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस खाते का उपयोग साइबर ठगी की रकम के प्रवाह में किस प्रकार किया गया और खाताधारक की भूमिका क्या थी।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि संगठित साइबर अपराधी अब फर्जी कंपनियों, म्यूल बैंक खातों और फर्जी जीएसटी बिलिंग का इस्तेमाल कर ठगी की रकम को वैध दिखाने की कोशिश करते हैं। उनके अनुसार, इस तरह के नेटवर्क में कई स्तरों पर धन का लेनदेन किया जाता है, जिससे जांच एजेंसियों के लिए वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। उन्होंने कहा कि बैंकों, जीएसटी विभाग, वित्तीय खुफिया इकाइयों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच रियल-टाइम समन्वय तथा संदिग्ध लेनदेन की निगरानी ऐसे नेटवर्क को समय रहते ध्वस्त करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और डिजिटल साक्ष्यों, बैंक खातों, जीएसटी रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा तथा अंतरराज्यीय वित्तीय लेनदेन का गहन विश्लेषण किया जा रहा है। यदि जांच में अन्य व्यक्तियों, फर्जी फर्मों या अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क की संलिप्तता सामने आती है तो आगे और गिरफ्तारियां तथा कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
