पुलिस का दावा—इंस्टाग्राम पर क्लिप साझा कर मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से कथित तौर पर पैसे लेकर भेजी जाती थी बाल यौन शोषण सामग्री; खरीदारों और पूरे नेटवर्क की पहचान में जुटी जांच एजेंसियां

बाल यौन शोषण सामग्री बेचने के आरोप में तीन गिरफ्तार, सोशल मीडिया के जरिए कथित अवैध कारोबार की जांच तेज

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By Roopa
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कानपुर (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के कानपुर में साइबर क्राइम पुलिस ने ऑनलाइन बाल यौन शोषण सामग्री (Child Sexual Abuse Material–CSAM) के कथित प्रसार और बिक्री से जुड़े एक मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का आरोप है कि आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर छोटी क्लिप साझा कर इच्छुक लोगों से ऑनलाइन भुगतान प्राप्त करने के बाद निजी माध्यमों से आपत्तिजनक सामग्री भेजते थे। मामले में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर विस्तृत जांच जारी है और पूरे नेटवर्क की पहचान की जा रही है।

पुलिस के अनुसार, जांच की शुरुआत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर प्राप्त एक सूचना के आधार पर हुई। अधिकारियों ने बताया कि बच्चों के यौन शोषण से संबंधित सामग्री की निगरानी करने वाले अंतरराष्ट्रीय तंत्र से प्राप्त इनपुट के बाद एक सोशल मीडिया अकाउंट की पहचान की गई, जिस पर कथित रूप से बाल यौन शोषण सामग्री साझा की जा रही थी। इसके बाद साइबर क्राइम टीम ने मोबाइल नंबर, IMEI और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर तकनीकी जांच शुरू की।

जांच के दौरान पुलिस ने मोहम्मद उवेश (20), सैय्यद शारान (18) और आकिब खान (22) को गिरफ्तार किया। पुलिस का दावा है कि पूछताछ में सामने आया कि आरोपियों ने पिछले लगभग दो वर्षों के दौरान बड़ी संख्या में आपत्तिजनक क्लिप साझा की थीं। जांच एजेंसियों के अनुसार, इच्छुक खरीदारों से कथित तौर पर ₹500 से ₹2,000 तक ऑनलाइन भुगतान लेने के बाद उन्हें निजी माध्यमों से पूरी सामग्री भेजी जाती थी।

पुलिस का आरोप है कि आरोपी कथित तौर पर मैसेजिंग प्लेटफॉर्म से बाल यौन शोषण सामग्री डाउनलोड कर सोशल मीडिया पर उसका सीमित हिस्सा साझा करते थे, ताकि अधिक लोगों को आकर्षित किया जा सके। जांच के दौरान बरामद मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों को फोरेंसिक विश्लेषण के लिए भेजा गया है। पुलिस डिजिटल रिकॉर्ड, चैट, भुगतान विवरण और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कर रही है।

जांच एजेंसियां अब इस कथित नेटवर्क से जुड़े खरीदारों की भी पहचान करने में जुटी हैं। पुलिस संबंधित बैंक खातों, डिजिटल भुगतान रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन का विश्लेषण कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि भुगतान किन खातों से प्राप्त हुए और क्या इस नेटवर्क का संबंध अन्य राज्यों या संगठित गिरोहों से भी है।

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इसी जांच के दौरान पुलिस एक अन्य मामले के संभावित संबंधों की भी पड़ताल कर रही है, जिसमें हाल ही में एक व्यक्ति को अपनी नाबालिग रिश्तेदार बच्चियों और अन्य बच्चों के आपत्तिजनक वीडियो बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि दोनों मामलों के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की पुष्टि अभी जांच के बाद ही हो सकेगी।

Future Crime Research Foundation से जुड़े साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि बाल यौन शोषण सामग्री का निर्माण, संग्रह, प्रसारण, खरीद और बिक्री गंभीर अपराध हैं। ऐसे मामलों में डिजिटल फोरेंसिक, वित्तीय लेनदेन, क्लाउड स्टोरेज, चैट रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच नेटवर्क की पूरी श्रृंखला का पता लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी सामग्री देखने, खरीदने या साझा करने वाले व्यक्ति भी कानून के दायरे में आ सकते हैं।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, गिरफ्तारी या पुलिस के आरोप मात्र से किसी व्यक्ति का अपराध सिद्ध नहीं हो जाता। अभियोजन पक्ष को न्यायालय में डिजिटल, दस्तावेजी और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोप सिद्ध करने होंगे, जबकि सभी आरोपियों को विधि के अनुसार निष्पक्ष सुनवाई और अपना पक्ष रखने का अधिकार प्राप्त है।

पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है। यदि विवेचना के दौरान अन्य आरोपियों, खरीदारों या किसी संगठित नेटवर्क की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके विरुद्ध भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

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