ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर डिवाइस फार्मिंग, फर्जी अकाउंट्स, कैशबैक और रिटर्न फ्रॉड के जरिए Jamtara 2.0 मॉडल का हाई-टेक साइबर खतरा बढ़ रहा है।

Jamtara 2.0 का बढ़ता साया: eCommerce प्लेटफॉर्म पर ‘डिवाइस फार्म’ से हाई-टेक ठगी, 1% यूजर्स से हो रहा भारी नुकसान

Team The420
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नई दिल्ली। देश में डिजिटल कॉमर्स के तेजी से विस्तार के बीच अब ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म एक नए और अत्याधुनिक साइबर खतरे से जूझ रहे हैं। ताजा विश्लेषण में सामने आया है कि ऑनलाइन शॉपिंग से जुड़ा फ्रॉड अब छोटे स्तर की ठगी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ‘इंडस्ट्रियल स्केल’ पर संगठित नेटवर्क के रूप में विकसित हो चुका है। यह मॉडल झारखंड के चर्चित जामताड़ा की तर्ज पर काम करता है, जहां योजनाबद्ध तरीके से बड़े पैमाने पर साइबर अपराध संचालित होते रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, इस नए फ्रॉड सिस्टम के केंद्र में “डिवाइस फार्मिंग” तकनीक है। इसमें एक ही स्थान पर सैकड़ों मोबाइल फोन या वर्चुअल डिवाइस का इस्तेमाल कर हजारों फर्जी अकाउंट्स बनाए और संचालित किए जाते हैं। ये अकाउंट्स अलग-अलग यूजर की तरह व्यवहार करते हैं, जिससे प्लेटफॉर्म के लिए असली और नकली गतिविधियों में अंतर करना बेहद जटिल हो जाता है।

सिर्फ 10 दिनों के भीतर लगभग 7 करोड़ यूजर्स के डेटा के विश्लेषण में पाया गया कि हर 6 में से 1 संदिग्ध डिवाइस 10 से अधिक अकाउंट्स से जुड़ा हुआ था। कई मामलों में एक ही अकाउंट ने एक घंटे में 50 से ज्यादा गतिविधियां दर्ज कीं, जो सामान्य मानवीय व्यवहार से काफी अलग है। कुल 9,000 डिवाइस के जरिए करीब 45,000 अकाउंट्स संचालित होते पाए गए, जो 256 संगठित क्लस्टर्स में काम कर रहे थे।

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इस नेटवर्क की कार्यप्रणाली बेहद सुनियोजित और चरणबद्ध होती है। शुरुआत में अपराधी बड़ी संख्या में फर्जी अकाउंट बनाकर रेफरल बोनस, कैशबैक और प्रमोशनल ऑफर्स का फायदा उठाते हैं। इसके बाद ये अकाउंट्स तेजी से स्कैन किए जाते हैं ताकि ऐसे यूजर्स की पहचान की जा सके जिनके प्रोफाइल में सेव्ड कार्ड, UPI या वॉलेट जुड़े हों। एक बार ऐसे अकाउंट्स चिन्हित हो जाएं, तो उन्हें हाई-वैल्यू फ्रॉड के लिए टारगेट किया जाता है।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कई अकाउंट्स कुछ ही मिनटों में अलग-अलग शहरों से लॉगिन करते पाए गए—जैसे गुजरात और बेंगलुरु के बीच 30 मिनट के भीतर एक्टिविटी। कुछ अकाउंट्स 70 अलग-अलग लोकेशनों से लॉगिन करते दिखे, जो स्पष्ट रूप से ऑटोमेशन और बॉट-आधारित ऑपरेशन का संकेत देता है।

ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए “रिटर्न फ्रॉड” सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है। अपराधी महंगे उत्पाद ऑर्डर करते हैं और बाद में खाली बॉक्स, नकली सामान वापस भेज देते हैं या डिलीवरी लेने से ही इनकार कर देते हैं। इससे कंपनियों को लॉजिस्टिक्स और रिफंड दोनों स्तरों पर भारी नुकसान झेलना पड़ता है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इन संदिग्ध पैटर्न्स को रिटर्न शुरू होने से पहले ही पहचाना जा सकता है, बशर्ते प्लेटफॉर्म उन्नत एनालिटिक्स और मजबूत फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम अपनाएं।

दिल्ली, बेंगलुरु और नोएडा जैसे प्रमुख टेक हब इस गतिविधि के केंद्र के रूप में सामने आए हैं, जहां कुछ प्लेटफॉर्म्स पर मल्टी-अकाउंट उपयोग करने वालों की संख्या सामान्य से 15 गुना तक अधिक पाई गई। इससे संकेत मिलता है कि आकर्षक ऑफर्स और इंसेंटिव्स अनजाने में इस प्रकार के फ्रॉड नेटवर्क को बढ़ावा दे रहे हैं।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कुल यूजर्स का मात्र 0.95% हिस्सा ही इस बड़े पैमाने के फ्रॉड के पीछे है, लेकिन डिजिटल प्लेटफॉर्म के विशाल दायरे के कारण इनका प्रभाव अत्यधिक व्यापक हो जाता है।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा, “आज का साइबर फ्रॉड पूरी तरह से ‘सोशल इंजीनियरिंग प्लस टेक्नोलॉजी’ का मिश्रण बन चुका है। डिवाइस फार्मिंग जैसे टूल्स के जरिए अपराधी एक साथ हजारों पहचान बनाकर सिस्टम को धोखा देते हैं। यह पारंपरिक ठगी नहीं, बल्कि संगठित साइबर इंडस्ट्री का रूप ले चुका है, जिसमें मल्टी-अकाउंट, मल्टी-डिवाइस और हाई-स्पीड ऑपरेशन शामिल हैं।”

ई-कॉमर्स कंपनियों के सामने अब दोहरी चुनौती है—एक ओर उन्हें फ्रॉड पर सख्त नियंत्रण के लिए सुरक्षा उपाय मजबूत करने हैं, वहीं दूसरी ओर 99% वास्तविक ग्राहकों के अनुभव को भी सहज बनाए रखना है। अत्यधिक सख्ती यूजर एक्सपीरियंस को प्रभावित कर सकती है, जबकि ढील देने पर ऐसे नेटवर्क तेजी से विस्तार करते रहेंगे।

डिजिटल अर्थव्यवस्था के इस दौर में यह स्पष्ट हो गया है कि ‘जामताड़ा मॉडल’ अब केवल बैंकिंग या कॉल सेंटर फ्रॉड तक सीमित नहीं रहा। यह अब ई-कॉमर्स इकोसिस्टम में गहराई से प्रवेश कर चुका है—और यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में यह खतरा और अधिक व्यापक और जटिल रूप ले सकता है।

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