जम्मू: जम्मू-कश्मीर क्राइम ब्रांच ने आर्थिक अपराधों और दस्तावेजी जालसाजी से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में बड़ी कार्रवाई करते हुए कुल 10 आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की है। इनमें पहला मामला ₹30.29 लाख की कथित निवेश ठगी से जुड़ा है, जबकि दूसरा मामला फर्जी राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर स्थायी निवासी प्रमाणपत्र (पीआरसी) हासिल करने, जमीन खरीदने और सरकारी नौकरियां प्राप्त करने के लिए कथित साजिश रचने का है। दोनों मामलों की जांच आर्थिक अपराध शाखा (Economic Offences Wing) ने की है।
क्राइम ब्रांच के अनुसार निवेश ठगी का मामला वर्ष 2011 में दर्ज किया गया था। जम्मू के गांधी नगर थाने में शिकायतकर्ता आशीष शर्मा ने लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया था कि राजस्थान स्थित मेसर्स गोल्ड सुख ट्रेड इंडिया लिमिटेड और उसके स्थानीय प्रतिनिधियों ने उन्हें अत्यधिक लाभ का लालच देकर निवेश करने के लिए प्रेरित किया। शिकायत के अनुसार उन्होंने कंपनी की योजनाओं में ₹1,20,480 का निवेश किया, लेकिन वादा किए गए लाभ के बजाय उनकी रकम का दुरुपयोग कर लिया गया। बाद में मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई।
जांच के दौरान अधिकारियों को पता चला कि केवल शिकायतकर्ता ही नहीं, बल्कि कई अन्य लोगों को भी ऊंचे और सुनिश्चित रिटर्न का झांसा देकर कंपनी की विभिन्न योजनाओं में निवेश कराया गया। जांच में सामने आया कि निवेशकों से कुल ₹30.29 लाख एकत्र किए गए। अधिकारियों के अनुसार संबंधित कंपनी राजस्थान में पंजीकृत थी, लेकिन जम्मू-कश्मीर में उसके पास भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI), भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अथवा रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (ROC) से आवश्यक अनुमति या पंजीकरण नहीं था।
साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर आर्थिक अपराध शाखा ने कंपनी के अधिकारियों और प्रतिनिधियों मनवेंद्र प्रताप सिंह चौहान, बबलू शर्मा, महेंद्र कुमार निरवान, नीरज कांत शर्मा और विनोद कुंडल के खिलाफ चार्जशीट तैयार कर जम्मू स्थित 13वीं विशेष मोबाइल मजिस्ट्रेट अदालत में दाखिल कर दी है। अब अदालत उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की न्यायिक सुनवाई करेगी।
Registration Begins for FutureCrime Summit 2026, India’s Largest Cybercrime Conference
दूसरा मामला वर्ष 2016 में दर्ज किया गया था, जिसमें शिकायतकर्ता सूरत सिंह ने आरोप लगाया था कि कुछ लोगों ने राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ कथित मिलीभगत कर फर्जी राजस्व अभिलेख तैयार कराए और उनके आधार पर स्थायी निवासी प्रमाणपत्र हासिल किए। आरोप है कि इन प्रमाणपत्रों का उपयोग जम्मू-कश्मीर में जमीन खरीदने और सरकारी नौकरियों में लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से किया गया।
जांच में सामने आया कि सरूप सिंह, बिशंबर सिंह, पूरब सिंह और सूरज सिंह ने तत्कालीन पटवारी रशपाल सिंह के साथ कथित साजिश रचकर फर्जी राजस्व रिकॉर्ड तैयार करवाए। इसके आधार पर स्थायी निवासी प्रमाणपत्र प्राप्त किए गए। मामले की जांच के दौरान जब्त दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच कराई गई, जिसमें पुष्टि हुई कि संबंधित राजस्व दस्तावेज आधिकारिक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते और उनमें गंभीर अनियमितताएं थीं। जांच एजेंसी के अनुसार फोरेंसिक विश्लेषण से यह भी स्पष्ट हुआ कि दस्तावेज तत्कालीन पटवारी द्वारा तैयार किए गए थे और वे वास्तविक सरकारी अभिलेख नहीं थे।
इस मामले में आर्थिक अपराध शाखा ने सरूप सिंह, बिशंबर सिंह, पूरब सिंह, सूरज सिंह और तत्कालीन पटवारी रशपाल सिंह के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत चार्जशीट तैयार कर जम्मू के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत में न्यायिक विचारण के लिए प्रस्तुत कर दी है।
क्राइम ब्रांच का कहना है कि दोनों मामलों में लंबी जांच, दस्तावेजी साक्ष्यों, वित्तीय लेनदेन के विश्लेषण, गवाहों के बयान और फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर अभियोजन पक्ष ने पर्याप्त साक्ष्य जुटाए हैं। अदालत अब चार्जशीट पर संज्ञान लेने के बाद आरोप तय करने और आगे की न्यायिक प्रक्रिया शुरू करने पर फैसला करेगी। अधिकारियों का मानना है कि इन मामलों में की गई कार्रवाई निवेशकों के साथ धोखाधड़ी और सरकारी दस्तावेजों में जालसाजी जैसे गंभीर अपराधों पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
