जयपुर: जयपुर पुलिस ने अंतरराज्यीय कारोबारी धोखाधड़ी के एक बड़े मामले में दुबई से लौटे एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर एक टेक्सटाइल कारोबारी से ₹8.3 करोड़ की ठगी करने का आरोप है। जांच एजेंसियों के अनुसार वह ऐसे संगठित गिरोह का हिस्सा था, जो फर्जी या शेल कंपनियां बनाकर कारोबारियों का विश्वास जीतता, शुरुआती लेनदेन में समय पर भुगतान करता, फिर बड़े पैमाने पर उधार पर कपड़ा खरीदकर माल दूसरी जगह खपा देता और मुख्य आरोपी को विदेश भेज देता था। पुलिस अब पूरे नेटवर्क, मनी ट्रेल और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान राजस्थान के जोधपुर जिले के मथोडा निवासी पवन चांडक के रूप में हुई है। पुलिस ने उसे दुबई से भारत लौटते ही हिरासत में लेकर बाद में औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया। उससे कथित रूप से कपड़ा माल की हेराफेरी, वित्तीय लेनदेन और गिरोह के अन्य सदस्यों की भूमिका के संबंध में पूछताछ की जा रही है।
पुलिस के अनुसार यह मामला 28 मार्च को मुहाना थाना क्षेत्र में एक टेक्सटाइल व्यापारी की शिकायत पर दर्ज किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि आरोपी ने खुद को निर्यात कारोबार से जुड़ा बताते हुए दो फर्मों के माध्यम से कपड़ा खरीदा और बाद में करोड़ों रुपये का भुगतान किए बिना फरार हो गया।
जांच में सामने आया कि आरोपी ने अप्रैल 2024 से टेक्सटाइल कारोबारियों से नियमित रूप से कपड़ा खरीदना शुरू किया और शुरुआती खेपों का भुगतान समय पर कर उनका विश्वास हासिल किया। जब व्यापारियों ने उस पर भरोसा कर बड़ी मात्रा में उधार पर माल देना शुरू किया, तब उसने केवल शिकायतकर्ता से ही ₹8.3 करोड़ मूल्य का कपड़ा प्राप्त कर लिया और बाद में संपर्क तोड़कर देश छोड़ दिया।
पुलिस का कहना है कि यह धोखाधड़ी एक सुनियोजित अंतरराज्यीय मॉडल के तहत अंजाम दी गई। जांच के अनुसार गिरोह के सदस्य पहले नई फर्में पंजीकृत कराते, कार्यालय किराये पर लेकर वैध कारोबार का आभास देते और शुरुआती खरीद के लिए सहयोगियों से धन की व्यवस्था कर समय पर भुगतान करते थे। कारोबारियों का भरोसा जीतने के बाद वे बड़ी मात्रा में उधार पर माल लेते, कई बैंकों से व्यापारिक एवं कैश-क्रेडिट ऋण प्राप्त करते, माल को अन्य सहयोगियों के माध्यम से बाजार में खपा देते और मुख्य आरोपी को विदेश भेज देते थे।
जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस नेटवर्क ने जयपुर के कई टेक्सटाइल कारोबारियों को मिलाकर ₹15 करोड़ से ₹20 करोड़ तक का नुकसान पहुंचाया हो सकता है। इसके अलावा आरोप है कि आरोपी ने देश छोड़ने से पहले कम से कम सात बैंकों से ऋण भी प्राप्त किया। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि ऋण लेने के दौरान कहीं फर्जी दस्तावेज, शेल कंपनियों या गलत वित्तीय विवरणों का उपयोग तो नहीं किया गया।
पुलिस के अनुसार आरोपी के दुबई जाने के बाद उसकी पत्नी और अन्य सहयोगियों ने कथित रूप से हेराफेरी किए गए कपड़े को बाजार में बेच दिया। अब जांच टीम माल की आवाजाही, खरीद-बिक्री से जुड़े लोगों, बैंक खातों, व्यावसायिक दस्तावेजों और धन के प्रवाह का विश्लेषण कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क और लाभार्थियों की पहचान की जा सके।
तकनीकी निगरानी के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी विदेश चला गया है। उसकी वापसी की सूचना मिलने पर विशेष टीम ने एयरपोर्ट पर उसे हिरासत में लिया और बाद में गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का मानना है कि पूछताछ से गिरोह की कार्यप्रणाली, वित्तीय प्रबंधन और अन्य आरोपियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि क्या इसी तरीके से अन्य राज्यों में भी कारोबारियों को निशाना बनाया गया था। पुलिस का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, संगठित वित्तीय और कारोबारी धोखाधड़ी में अपराधी पहले भरोसा कायम करते हैं और फिर बड़े लेनदेन के समय धोखा देते हैं। उन्होंने कारोबारियों को सलाह दी कि किसी भी नई कंपनी को उधार पर माल देने से पहले उसके पंजीकरण, वित्तीय रिकॉर्ड, बैंकिंग पृष्ठभूमि और कारोबारी साख का स्वतंत्र सत्यापन अवश्य करें, ताकि इस प्रकार की योजनाबद्ध धोखाधड़ी से बचा जा सके।
